शिक्षक दिवस के दिन 04 लाख नियोजित शिक्षक राज्य के सभी जिला मुख्यालय में करेंगे भूख हड़ताल !

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संजय कुमार सुमन : बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ राज्य कमिटी के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार पप्पू ने आह्वान किया कि बिहार के 4लाख नियोजित शिक्षकों के सेवा शर्त निर्धारण को लेकर सरकार के उदासीन रवैये के विरूद्व 05-09-2016 को शिक्षक दिवस पर शिक्षा मंत्री का बिहार के सभी जिला मुख्यालय में पुतला दहन किया जायेगा | संघ के पदाधिकारी आन्दोलन को सफल बनावें | राज्य सरकार सूबे के लाखों शिक्षकों के साथ निदेशक से कथित संघों का वार्ता कराकर धोखा किया हैं । शिक्षा मंत्री हर वार्ता में कहा कि सेवा शर्त निर्धारण के लिए गठित उच्च स्तरीय कमिटि जिसके अध्यक्ष मुख्यसचिव एवं पांच सदस्यीय प्रधान सचिव के साथ बैठक आयोजित की जायेगी | लेकिन वह बातें खोखला साबित हुआ | मंत्री के नीयत एवं नीति संदेह पैदा कर रहा हैं | जो पदाधिकारी कमिटि का सदस्य तक नहीं हैं | उनसे वार्ता का औचित्य क्या हो सकता हैं | सिर्फ शिक्षकों को भ्रमित करने का सोची समझी साजिश हैं | जिसे संघ कभी कामयाव नहीं होने देगा |बताया जाता है कि आज विभिन्न माध्यमिक शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों और माध्यमिक शिक्षा निदेशक के साथ वार्ता होनी थी जो हुई भी।koshixpress

सबसे पहले माननीय विधान पार्षद केदार पाण्डेयजी पहुंचे और लगभग एक घंटे तक निदेशक के कमरे में गुफ्तगू की। इस दौरान सामान्य शिष्टाचार या औपचारिकतावश चाय – पानी का दौर चला। वार्ता के पूर्व भी और वार्ता के बाद भी नियोजित शिक्षक न्याय मोर्चा के सम्मानित साथी शिवेन्द्र पाठकजी से बात हुई और नवनियुक्त माध्यमिक शिक्षक संघ के सम्मानित नेता गणेश शंकर पाण्डेयजी से भी खुलकर बात हुई। सबों ने बिल्कुल साफ – साफ बताया कि वार्ता के नाम पर मांगपत्र लिया गया। उपनिदेशक अजीत बाबू ने मांगों के संबंध में प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने को कहा। निदेशक ने अपने स्तर से किसी प्रकार का भरोसा या सेवा शर्त से संबंधित प्रगति पर कोई टिप्पणी नहीं की। निदेशक अपनी संचिका निपटाते रहे और उपनिदेशक वार्ता की रस्म-अदायगी पूरी करते रहे। एक बात जो छनकर आई वह यह कि नियोजन इकाई नहीं तोड़ा जाएगा। नियोजन इकाई में हीं स्थानांतरण का प्रावधान नये ढंग से बनेगा। यानी यह एक दिखावटी नाटक का प्रथम चरण सफलता पूर्वक संपन्न हो गया।

अब दूसरे चरण के नाटक में प्रारंभिक शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों को 5 सितंबर के बाद प्राथमिक शिक्षा निदेशक से वार्ता की रस्म-अदायगी होनी है। मामला साफ है राज्य कर्मी घोषित करने से सरकार भागना चाह रही है। वर्णित स्थिति को देखते हुए लिखित मांग पत्र माननीय मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, प्रधान सचिव, शिक्षा विभाग, मुख्य सचिव, बिहार एवं निदेशक प्राथमिक शिक्षा को समर्पित किया है जिसमें पहली मांग सभी नियोजित शिक्षकों एवं सभी पुस्तकालयाध्यक्षों को जिला व राज्य संवर्ग का कर्मचारी घोषित करने और उन्हें देय सभी सुविधाएं देने की रखी है। दूसरी मांग सभी शिक्षकों को देय 9300-34800 का वेतनमान देने और सभी अप्रशिक्षित साथियों को भी ग्रेड पे देने की रखी गई है। तत्काल समर्पित मांग पत्र में सेवा शर्त से जुड़ी मांगों के अतिरिक्त शिक्षकों की अन्य समस्याओं के समाधान की भी मांग की गई है।

शिक्षक दिवस के दिन 04 लाख शिक्षक करेंगे भूखहड़तालपूरण कुमार

  • शिक्षामंत्री के शिक्षक व छात्र विरोधी नीति के खिलाफ होगा आंदोलन
  • गुणवतापूर्ण शिक्षा में बाधा उत्पन्न कर रही है सरकार की गलत शिक्षा नीति
  •  राज्य स्तरीय बैठक में लिया गया फैसला

05 सितम्बर को शिक्षक दिवस के दिन 04 लाख नियोजित शिक्षक राज्य के सभी जिला मुख्यालय पर भूख हड़ताल करेंगे

सरकार के द्वारा बार बार मांगों को पूरा करने के वादा को तोड़े जाने से आहात बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के द्वारा शनिवार को आयोजित की गई राज्य स्तरीय बैठक में 05 सितम्बर को सरकार द्वारा दी जाने वाली झूठा सम्मान का विरोध करने हेतु आंदोलन करने का ऐलान किया गया है | उक्त जानकारी देते हुए बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष पूरण कुमार ने कहा की राज्य के चार लाख नियोजित शिक्षकों के चिरप्रतीक्षित मांग एक साथ पूर्ण वेतनमान , राज्यकर्मी का दर्जा , अप्रशिक्षित शिक्षकों को ग्रेड पे, नियमित शिक्षक की भाँति सेवाशर्त , अप्रशिक्षित शिक्षकों को दो वर्षीय प्रशिक्षण , स्नातक ग्रेड में सामंजन, मासिक वेतन आदि की पूर्ति हेतु सरकार के खिलाफ 05 सितम्बर को राज्यव्यपि भूखहड़ताल आंदोलन होगा |koshixpress

प्रदेश महासचिव केशव कुमार ने कहा की सरकार द्वारा पुर्व से नियोजित स्नातक पास शिक्षकों को भी बेसिक ग्रेड में रखकर शिक्षकों को अपमानित करने का कार्य किया जा रहा है | जिसके विरोध में बेसिक ग्रेड के सभी शिक्षक 05 सितम्बर से कक्षा 6 से 8 में नहीं पढ़ाएंगे | उन्होंने सूबे के सभी नियोजित शिक्षकों से शिक्षक दिवस के एकजुट हो सरकार के तानाशाही के खिलाफ भूख हड़ताल करने का आह्वान किया |

प्रदेश सचिव आनंद कौशल सिंह ने कहा की सरकार के गलत शिक्षा नीति से गुणवतापूर्ण शिक्षा में बाधा उत्पन्न कर रही है | इसलिए सूबे के शिक्षामंत्री अशोक चौधरी के शिक्षक ,छात्र व शिक्षा विरोधी नीति के खिलाफ एक जुटता के साथ पुरे प्रदेश में आक्रोशपूर्ण आंदोलन करने का प्रस्ताव राज्यस्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से पारित किया गया है | उन्होंने कहा की एक ओर लाखों शिक्षक को 5 महीने से वेतन नहीं दिया गया है तो वही दूसरी ओर 5 महीने बाद भी 01 करोड़ बच्चों को किताब नही दी गई है | उन्होंने कहा सही मायने समाज के अंतिम बच्चों तक गुणवतापूर्ण शिक्षा पहुचाने के लिए राज्य के सभी सरकारी स्कूलों को डीएवी-डीपीस जैसे निजी स्कूलों की तरह संसाधनयुक्त बनाना ही होगा | सरकारी स्कूलों को सुबिधा संपन्न बनाने व नियोजित शिक्षक को समान काम के लिए समान वेतन देने जैसे संबैधानिक मांग के पूर्ति के लिए अंतिम साँस तक संघर्ष करता रहूँगा |

बैठक में प्रदेश अध्यक्ष पूरण कुमार, प्रदेश महासचिव केशव कुमार, उपाध्यक्ष रामपुकार सिन्हा, जयन्त कुमार सिंह , नबीन कुमार सिंह, लालबाबू, रीना कुमारी, प्रदेश सचिव आनंद कौशल, धर्मेन्द्र कुमार, मनोज श्रीवास्तव, राकेश कुमार, कोषाध्यक्ष धर्मेन्द्र कुमार, रामचंद्र रॉय, राजू यादव, राकेश कुमार, महेश राम, संजीव कौशिक, ललित नारायण मोहन , रीता गुप्ता, पवन कुमार चौधरी, वीरेंद्र कुमार यादव, मो शोएब आलम, ऋतुराज सौरभ, मो उमर, रणधीर कुमार, कुमार रजनीश आदि उपस्थित थे |

मुख्य मांगे-

  • राज्य के चार लाख नियोजित शिक्षकों को एक साथ पूर्ण वेतनमान |
  • राज्यकर्मी का दर्जा
  • सभी अप्रशिक्षित शिक्षकों को 01 जुलाई 2015 की तिथि से ग्रेड पे का लाभ
  • नियमित शिक्षक की भाँति सेवाशर्त
  • सभी अप्रशिक्षित शिक्षकों को एक साथ दो वर्षीय प्रशिक्षण देने की व्यवस्था
  • सभी स्नातक पास शिक्षकों का एक साथ स्नातक ग्रेड में सामंजन
  • जीविका जैसे निजी संस्था से निरिक्षण के निर्णय को अबिलम्ब वापस लिया जाय |
  • प्राथमिक विद्यालय में नियुक्त बीएड योग्यताधारी शिक्षकों को प्रशिक्षित शिक्षक का दर्जा दिया जाय |
  • अनुकम्पा का लाभ अप्रशिक्षितों को भूतलक्षी प्रभाव से दिया जाय |
  • बकाया वेतन का एक मुश्त भुगतान करते हुए मासिक वेतन की व्यवस्था
  • राज्य के 01 करोड़ बच्चे को किताब नहीं देने वाले अधिकारी बर्खाश्त हो ।