गंगा के जलस्तर में कमी : व्यवहार न्यायालय में पानी आ जाने से न्यायिक कार्यवाही बाधित !

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संजय कुमार सुमन :  गंगा के जलस्तर में कमी के बावजूद नवगछिया के लोगों का दर्द कम नहीं हो रहा है। न केवल सभी सरकारी कार्यालय बाढ़ के पानी के चपेट में है, बल्कि इन दिनों न्याय का मंदिर भी जलमग्न हो चुका है। जिससे न्यायिक कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। नवगछिया में बाढ़ के कारण जहाँ आम जनजीवन अस्त व्यस्त है |koshixpresskoshixpress

वहीं व्यवहार न्यायालय में घुस जाने से न्यायिक कार्यवाही बाधित हो गई है। जिसकी कारण से कोर्ट का संचालन भी नहीं हो पा रहा है। कोर्ट संचालन से ज्यादा जरूरी न्यायिक अधिकारियों का ध्यान डैमेज कंट्रोल पर है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद माधव ने कहा कि अचानक बाढ़ का पानी नवगछिया के न्यायालय और क्वार्टर में आठ-नौ फीट बह रहा है। न्यायिक अधिकारी व कर्मचारी एक तरह से सड़क पर आ गए हैं। ऐसी परिस्थिति में कोर्ट की कार्रवाई की कल्पना कैसे की जा सकती है।जिला जज ने कहा कि इस परिस्थिति में कोर्ट की कार्रवाई से ज्यादा प्रमुखता संपत्ति का बचाव करना है। कुछ रिकार्ड को तो निकाला गया है। लेकिन काफी रिकार्ड पानी में भीग गए हैं। जिन्हें दुरुस्त करना है। उन्होंने कहा कि एसवेस्टस परिसर वाले कोर्ट में ज्यादा डैमेज हुआ है। हालांकि पानी हटने के बाद ही उसका सही आकलन हो पाएगा।koshixpress

जिला जज ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के बावजूद न्यायिक अधिकारी या कर्मचारियों को मुख्यालय (नवगछिया) नहीं छोड़ने का निर्देश दिया गया है। बगैर सूचना के कार्य क्षेत्र छोड़कर जाने पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पटना उच्च न्यायालय को प्रतिदिन रिपोर्ट भेजी जा रही है। हाइकोर्ट भी स्थिति पर नजर रख रहा है।उन्होंने कहा कि न्यायालय न्याय का पक्षधर होता है न कि किसी को परेशान करने का। बाढ़ पीड़ितों की स्थिति को ध्यान में रखकर कोर्ट उनके अनुरूप कार्य का निष्पादन करेगा।