गोस्वामी तुलसीदास की जयंती समारोह मनाई गयी !

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कौशिकी क्षेत्र हिंदी साहित्य सम्मलेन भवन मधेपुरा में गोस्वामी तुलसीदास की जयंती ससमारोह मनाई गयी| समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने की|
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इस आवसर पर नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष योगेन्द्र प्राणसुखका ने मुख्य अतिथि के रूप में रामचरित मानस की विशेषता पर प्रकाश डाला |उन्होंने कहा कि महान कवि तुलसीदास की प्रतिभा-किरणों से न केवल हिन्दू समाज और भारत, बल्कि समस्त संसार आलोकित हो रहा है|koshixpress
सम्मेलन के संरक्षक डा. रमेन्द्र कुमार यादव रवि ने अपना उदगार प्रगट करते हुए कहा कि तुलसीदास में वह प्रगतिशीलता विद्यमान थी, जिससे वे परिस्थितियों के अनुकूल नवीन दृष्टिकोण अपना कर प्राचीनता का संस्कार किये । तुलसीदास धार्मिक नेता ही नहीं अपितु महान समाज-सुधारक भी थे। रामराज्य की कल्पना के द्वारा उन्होंने उस समय के विद्यमान राजनीतिक गंदगी को दूर करने का यथासंभव प्रयास किया|koshixpresskoshixpress
इस अवसर पर भागलपुर विश्वविधालय के पूर्व प्रतिकुलपति डा. केके मंडल ने कहा कि तुलसीदास ने मानस में लोक और वेद, व्यवहार एवं शास्त्र का समन्वय प्रस्तुत किया| तुलसी पूर्णतया समन्यवादी थे। प्रो. मणिभूषण वर्मा ने कहा की तुलसीदास ने तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन कर उसी के अनुरूप अपने युग की रूपरेखा प्रस्तुत की उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से सामाजिक विषमता और वैमनस्य को कम करने का प्रयत्न किया|
सम्मलेन के सचिव डा. भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि तुलसी अद्भुत समन्वयकर्ता थे, उन्होंने अपने काल की विभिन्न स्थितियों, प्रचलित परम्पराओं, मतवादों तथा परस्पर विरोधी धार्मिक मान्यताओं के मूल कारणों को खोजकर उनमें समन्वय स्थापित करने प्रयास किया|koshixpress
अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ ने कहा कि तुलसीदास को जो अभूतपूर्व सफलता मिली, उसका कारण यह था कि वे समन्वय की विराट् चेष्टा थे । उनके काव्य में ज्ञान और भक्ति, सगुण और निर्गुण, गार्हस्थ्य और वैराग्य, शैव और वैष्णव, राजा ओर प्रजा, शील और सौन्दर्य आदि के समन्वय की भावपूर्ण झाँकी देखी जा सकती है..
इस अवसर पर डा. सिद्धेश्वर कश्यप, डा. विनय चौधरी, डा. इन्द्रनारायण, दशरथ सिंह कुलिश, संतोष सिन्हा, राकेश द्विजराज, उल्लास मुखर्जी, कुमारी राजलक्ष्मी व अरविन्द श्रीवास्तव ने काव्य-गोष्ठी मंं अपनी कविताओं से आयोजन को यादगार बना दिया !