उतरने लगा बाढ का पानी : संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ा !

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मुकेश कुमार मिश्र : बिहार में गंगा समेत अन्य नदियों का जलस्तर उतरने लगा है । पानी निकलने के बाद धीरे-धीरे विनाश लीला की सही तस्वीर सामने आ रही है। परबत्ता प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में आयी बाढ के एक सप्ताह यथावत रहने के बाद अब गंगा का जलस्तर घटने लगा है।हलाँकि जलस्तर के घटने की रफ्तार काफी धीमी है।लेकिन इससे बाढ प्रभावित लोगों को अब यह उम्मीद हो चली है कि अगले एक सप्ताह में उनका जीवन बाढ के पूर्व की स्थिति में आ जायेगा।koshixpress

स्वच्छ पानी है एक समस्या

बाढ प्रभावित क्षेत्रों में पीने का स्वच्छ पानी एक समस्या बनी हुई है।हलाँकि कुछ स्थानों पर पी एच ई डी के द्वारा उँचे जगहों पर नया चापानल लगाया गया है।लेकिन इसकी संख्या सीमित होने के कारण प्रखंड की बड़ी आबादी अभी भी पीने के साफ पानी के लिये परेशान है।अधिकांश चापानल पानी में डूबे हुए हैं।कुछ सक्षम लोगों के द्वारा निजी कंपनियों द्वारा आपूर्ति किये जा रहे पानी के जार को खरीदकर काम चलाया जा रहा है।koshixpress

डूब चुके शौचालय ने बढायी मुश्किलें

बाढ प्रभावित क्षेत्रों में बनाये गये सभी शौचालय डूब चुके हैं।राहत शिविरों में भी रहने वाले लोगों की संख्या की तुलना में काफी कम शौचालय हैं।ऐसे में लोगों को लाचारी में खुले में शौच करने के लिये विवश होना पड़ रहा है।अब बाढ को आये हुए करीब एक सप्ताह से अधिक हो जाने के कारण इन स्थानों पर लगातार बड़ी संख्या में लोगों के द्वारा खुले में शौच करने के कारण भारी बदबू होने लगा है।लोग यह आशंका जता रहे हैं कि यदि जल्दी ही इस स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया गया तो लोगों को इससे संबंधित तरह तरह की बीमारियाँ हो सकती है।

परेशान हैं पशुपालक

प्रखंड में आयी बाढ से सबसे अधिक परेशानी पशुपालकों को हो रही है।अधिकांश पशुपालकों का भूसाघर डूब चुका है।इसके अलावा हरा चारा की भी समस्या हो गयी है।इस वजह से दूध का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है।काफी सीमित संख्या में सूखा जगह बचा रहने के कारण पशुओं को रखना भी एक गंभीर समस्या बन गयी है।सैकड़ों पशुपालक अपने पशुओं को लेकर राष्ट्रीय उच्च पथ पर शरण लिये हुए हैं।पशुपालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है |koshixpress

नाकाफी है राहत

प्रशासन के द्वारा बाढ पीड़ितों को राहत पहुँचाने के लिये तमाम तरह के प्रयास किये गये।लेकिन बाढ प्रभावितों के लिये यह नाकाफी सा है।इस बाढ में हजारों लोगों की फसल क्षति,पशुधन की क्षति के अलावा दर्जनों लोगों का घर पानी के प्रभाव से गिरकर नष्ट हो गया।इस बारे में अभी तक किसी प्रकार का आश्वासन नहीं मिल पा रहा है।koshixpress

स्वच्छ पानी का है संकट,शौचालय के बिना बदबू का साम्राज्य

जिला एवं स्थानीय प्रशासन का मानना है राहत शिविर में बाढ़ पीड़ितों को सारी व्यवस्था दी जा रही  हैं। किसी प्रकार की कोई भी परेशानी नहीं हैं। मालूम हो कि जिले के विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगभग चार दर्जन राहत शिविर चल  रहा है। वहीं भागलपुर में शिव शक्ति योग पीठ के स्वयंसेवक बाढ़ पीड़ित के बीच राहत वितरण का कार्य अनवरत जारी रखा है।