एक गाँव बना नजीर दो छात्रों ने एक साथ मेडिकल नीट में लहराया परचम !

3332

प्रथम प्रयास में हीं मेडिकल नीट में सफलता हासिल कर स्थानीय व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता बिनोद कुमार झा एवं प्रतिमा किरण के पुत्र प्रणव पुष्कर ने मेडिकल के नीट में सफल होकर कर जिले के साथ-साथ अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है।प्रणव पुष्कर ने मेडिकल की तैयारी सहरसा में रह कर के की है।

छात्र प्रणव पुष्कर
छात्र प्रणव पुष्कर

गाँव में भी मेधा की नहीं है कोई कमी

प्रथम प्रयास में ही बेहतर परिणाम आने के बाद  प्रणव सहित उसके परिजन खुश हैं। प्रणव ने इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हुए बताया कि वह एमबीबीएस की पढ़ाई कर एक अच्छा चिकित्सक बनना चाहती हैं। उसने बताया कि उसे यह सफलता प्रथम बार की मेडिकल की परीक्षा में मिली। इसी बार बिहार बोर्ड से आईएससी 71% अंको से पास किया है। मात-पिता ने उसका हौसला बढ़ाया और अच्छा रैंक लाने में सफल रहा । उन्होंने कहा कि उसका एक ही सपना है कि एक अच्छा चिकित्सक बनकर गरीबों की सेवा करना।मालूम हो की अधिवक्ता बिनोद कुमार झा सतरवाड़ (महिषी) के स्थाई निवासी है और फिलवक्त सहरसा के नया बाज़ार,नरियार रोड में रहकर अपने बच्चे को स्थानीय स्तर पर ही शिक्षा ग्रहण करवा रहे है | अपने बेटे की इस सफलता पर श्री झा ने कहा की प्रणव बचपन से ही पढाई में अव्वल रहा है जब वह वर्ग छः मे जब प्रणव राष्ट्रीय मेधा छात्रवृति में अव्वल अंकों से सफलता हासिल किया था तो उनके गुरुजण ने उन्हें एकदिन बड़े आदमी बनने का आशीर्वाद दिया था |

छात्र शम्मी
 छात्र शम्मी

हौसलों के दम से बनता है इतिहास

वही सहरसा के महिषी थाना क्षेत्र के सतरवार गाँव के रहने वाले शम्मी ने नीट मेडिकल में 99.47 अंक हासिल कर देश में 3990 रैंक हासिल किया है ।अभी शम्मी का परिवार सहरसा जिला मुख्यालय के नया बाजार स्थित एक भाड़े के मकान में रहता है ।शम्मी के पिता चन्द्रदेव झा अब इस दुनिया में नहीं रहे ।शम्मी की माँ विभा झा एलआईसी की एजेंट हैं ।शम्मी का बड़ा भाई मनीष कुमार झा नारायणा IIT AND TMT प्राईवेट एकेडमी,दिल्ली में मैथ के एसोसिएट प्रोफ़ेसर हैं । शम्मी उसी एकेडमी में शिक्षा ले रहा था ।शम्मी अभी दिल्ली में है ।दूरभाष पर उसने अपनी इस कामयाबी पर बेहद ख़ुशी जताई और आगे वह देश के लिए काम आये,इसकी इच्छा जाहिर की ।शम्मी कहता है की उसने पिता की मज़बूरी,माँ की मिहनत और गरीबी को बेहद करीब से देखा है और कठिन परिस्थितियों को झेला है ।माँ विभा झा कहती हैं की उन्हें दो बेटे हैं और उन्हें दोनों से बेहद उम्मीदें हैं ।दोनों समाज के काम आएं,इसके लिए वे हर वक्त ईश्वर से कामना करती हैं ।