रक्षा बंधन कल : जाने राखी बाँधने का शुभ समय !

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मधेपुरा : भाई-बहन के अटूट स्नेह का प्रतीक रक्षा बंधन का त्योहार गुरूवार को मनाया जायेगा। भाई-बहनों के बीच असीम स्नेह के इस त्योहार की तैयारी में बहनें लग लगी  हैं। दूर-दराज में रहने वाले भाईयों के लिए डाक और कोरियर से बहनों ने राखी पहले ही भेज दिया है।

कब से हुई शुरूआत  राखी दुकानों पर लगी भीड़

रक्षाबंधन पर्व के आरंभ को लेकर प्राचीन कथा प्रचलित है। असुर जाति पर विजय पाने के लिए इंद्रानी ने भगवान इंद्र को रक्षा का सूत्र बांधा था। जिससे इंद्र को रक्षा असुरों पर विजय प्राप्त हुई थी। कालांतर में 16 वीं सदी के उत्तरार्द्ध में चित्तौड़ की महारानी कर्णावती के राज्य में पड़ोसी राज्य द्वारा आक्रमण किया गया था। तब महारानी कर्णावती ने दिल्ली के बादशाह हुमांयू को राखी भेज कर सहायता की गुहार लगायी थी। बादशाह ने अपने राज्य के सभी कार्य को छोड़ कर बहन कर्णावती की सहायता की,जिसमें विजय प्राप्त हुआ।

18 अगस्त (बृहस्पतिवार), 2016  को रक्षा बंधन मुहूर्त

05:55 से 14:56 तक
अपराह्न काल में रक्षाबंधन 2016  के लिए शुभ महूर्त
13:42 से 14:56
वर्ष 2016 में रक्षाबंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी

मिलता है उपहार

रक्षा बंधन के दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर एवं मिठााई खिला कर आरती उतारती है। इसके बाद रक्षा सूत्र बांधती हैं। राखी बाधने के बाद भाईयों द्वारा बहन को उपहार स्वरूप् आभूषण,वस्त्र तथा रूप्ये भेंट किये जाते हैं। बहने अपने भाईयों से अपेक्षा करती है कि जब कभी बहन पर विपत्ती तथा आन पर आंच आयेगी भाई जान की बाजी लगाकर बहन की रक्षा करेगा।

मंत्रोच्चारण का रिवाज

रक्षा बंधन त्योहार में बहन द्वारा राखी बांधते समय ‘‘ येन बंधों बली राजा दानवेंद्रो महाबलः,ते ना त्वाम् प्रति बध्नाति रक्षे मा चल मा चल‘‘मंत्र का उच्चारण कर भाई के दाहिने हाथ में राखी बांधती है। इस मंत्र का आशय है कि महाबली राक्षसों का अधिपति बलि को इसी मंत्र का उच्चारण कर पुरोहितों द्वारा रक्षा सूत्र से बांधा गया था।

लगाये गये खास स्टाॅल

जिले के कई बाजारों में आधुनिक कला से निर्मित राखी की बिक्री चरम पर है। राखी खरीदारी के लिए दुकानों पर मंगलवार को काफी भीड़ लगी रही। दुकानदारों का कहना है कि महंगाई का राखी की बिक्री पर भी असर देखा जा रहा है। दुकानदार अनंत साह लहेरी,चंदन कुमार,संतोष कुमार कहते हैं कि पांच रूपये से लेकर दो सौ रूपये तक की राखी मिल रही है। महंगी राखियों में नग का प्रयोग किया गया है। इसके अलावा लड़कियों के लिए बनी एवं खासकर मारवाड़ी युवतियों एवं महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय लेडिज लुंबा की मांग पूर्व के वर्ष से ज्यादा है। जिसकी कीमत 20 रूप्ये से दो सौ रूपये तक निर्धारित है। दुकानदार अनंत बताते हैं कि लेडिज लुंबा अब बिहारी महिलाओं द्वारा भी पसंद की जाने लगी है। यह हाथ में लगाया जाने वाला एक प्रकार का ब्रेसलेट होता है जो काफी लोकप्रिय होता जा रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में कीमतों में दो गुणा का इजाफा हो गया है।

चंदा रे भाईया से कहना

हिन्दी फिल्मों में फिल्कांकन किये जाने वाले रक्षा बंधन की बात करें तो दूर दराज के क्षेत्रों में रहने वाले अपने भाईयों तक राखी का न्योता एवं राखी भिजवाने के लिये बहन चांद से मिन्नत करती थी। लेकिन रियल लाईफ में तरीका अब भी पारंपरिक ही है। पूर्व के दस दिन पूर्व से ही बहन द्वारा डाक एवं कुरियर के माध्यम से राखी पोस्ट की गई है। मालूम हो कि हाईटेक हो रही व्यवस्था में डाक सेवा का महत्व इन खास पर्वो में देखा जा सकता है। जब हास्टॅल या परदेश में रह रहे भाईयों को भी डाकिये का भी इंतजार रहता है।