हड़ताल पर गए धरती के भगवान को चाहिए सुरक्षा का एंटिबायोटिक !

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बिष्णु स्वरूप : बिहार के सहरसा में लगातार तीन दिनों से निजी चिकित्सकों का हड़ताल आज भी जारी रहा | चिकित्सको के तेवर देख ऐसा लग रहा है की यह आन्दोलन जल्द समाप्त नही होने वाला आज भी सुपर बाज़ार गेट के सामने बारिश में भी चिकित्सक डटे रहे और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर गरजे |

एंटिबायोटिक सरकार और प्रशासन के पास क्यो नही

समाजिक सरोकार से जुड़ कर प्रतिष्ठित पेशा करने वालो मे डाक्टर सवोॅपरि है परन्तु कुछ स्याह पक्ष को छोड़ कर यदि सेवा की बात करे तो डॉक्टरो के बगैर इस दुनिया की कल्पना गैर बाजिब होगी ,फिर इन्हे सुरक्षित रखने का क्या मापदंड है ।इनके लिए कोई  एंटिबायोटिक सरकार और प्रशासन के पास क्यो नही है.आप कह सकते है सुरझा सबो के लिए सर्व सुलभ होना चाहिए तो प्रशासनिक अझमता का उदाहरण का उदाहरण दर उदाहरण पेश करने वाले दरबारी संस्कृति से ओतप्रोत सरकार के इस विभाग का उपाय क्या है ?कडे और बड़े फैसले लेने मे अधिकारीयो को किस उपर वाले का इंतजार है .

निशाने पर बने रहने की फेहरिस्त काफी लंबी

बात डाक्टरो के सुरक्षा का हो तो इसके विभिन्न प्रकार से निशाने पर बने रहने की फेहरिस्त काफी लंबी है स्व . अनिल पाठक से शुरू होकर कहानी बरियाही पी .एच .सी .मे तोड़ फोड ,डाक्टर के कार जलाने की कोशिश ,सदर अस्पताल मे डाक्टर के साथ हाथापाई ,शहर के विभिन्न क्लिनिको पर बढ़ते हमले हंगामे ,रंगदारी मांगने की घटना ,कार पर गोली चलाना (जांच की प्रक्रिया मे) इत्यादि ऐसे मूद्दे है जो सुरक्षा की गारंटी पर सवालिया निशान लगाते है डा गोपाल शरण सिंह का बयान सिस्टम के मौजूदा हालात को स्कैन कर देता है उन्होंने कहा कि पहली बार 100 गज पूरब से एक सिम बिक्रेता को पुलिस उठा कर ले गई तो अबकी बार 100 गज पश्चिम से एक सिम विक्रेता को धड दबोचा ।अपराधीयो से दूर पुलिस मुम्बई से गम्हरिया( मधेपुरा) तक दौड रही है , डा बृजेश सिंह को अपराधियो ने कई महिनो से अपने टारगेट पर रखा है . अब तक धमकी के लिए प्रयोग होने वाले सिम कार्ड और मोबाइल तक पुलिस नही पहुंच पाइ है ।

डा बृजेश कहते है कि डॉक्टरो को सुरक्षित रखने का उपाय सिर्फ प्रशासनिक सुझ बुझ , तत्परता और अपराधियो  के होसले पस्त करने वाले पुलिसिया कार्रवाई से संभव है ,माहौल भयमुक्त नही हो तो मरीजो का ईलाज कैसे संभव है ? डाक्टर विजय शंकर समेत कई डाक्टरो ने कहा कि जब तक अपराधियो को सामने नही लाया जाता आंदोलन जारी रहेगा .डा बृजेन्द्र देव सहित अन्य ने कहा कि यह प्रशासनिक निष्क्रियता का उदाहरण है कि डॉक्टरो का समूह अपनी जान की सुरक्षा का गुहार लगा रहा है
मरीजो के सेवा करने वाले डॉक्टरो को इस बात का कष्ट है कि वे अपनी जान बचाने के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाया जिससे मरीजो को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।