विश्वविद्यालय से भी पुराना है कॉलेज उपेक्षा का शिकार होकर भी फैला रहा है ज्ञान का प्रकाश !

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मुकेश कुमार मिश्र : बिहार के खगड़िया जिलाअंतर्गत परबत्ता प्रखंड मुख्यालय स्थित कबीर मोती दर्शन महाविद्यालय को अब स्थापित हुए पूरे साठ वर्ष बीत चुका है। वर्ष 2013 में इसके स्थापना के 58 वर्ष पूरी करने के बाद स्वर्ण जयंती समारोह आयोजित किया गया था।इस कॉलेज की स्थापना में कबीर मठ परबत्ता के तत्कालीन महंथ मोती दास के अलावा इलाके के तमाम राजनीतिक एवं सामाजिक हस्तियों का भरपूर सहयोग रहा था।बताया जाता है कि कॉलेज के संस्थापकों ने घर घर जाकर भवन निर्माण के लिये चंदा के रुप में एक एक बाँस तथा रुपये पैसे माँगा था।इसके अलावा सभी अभिभावकों से अपील किया गया था कि वे पढने हेतु एक एक छात्र भी भेजें।बताया यह भी जाता है कि अर्थाभाव में प्रबंधन समिति ने वेतन के रुप में खाद्यान्न आदि देकर भी इस कॉलेज का संचालन किया था।आज भी प्रबंधन समिति के द्वारा बनाये गये भवन में ही महाविद्यालय संचालित हो रहा है।
 कॉलेज की स्थापना 1956 में की गयी
कॉलेज की स्थापना के साथ ही इसे बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर से संबद्धता प्राप्त हो गयी थी।वर्ष 1960 में भागलपुर विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।इस लिहाज से यह कॉलेज भागलपुर विश्वविद्यालय से भी पुराना है।भागलपुर विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद इसे इस विश्वविद्यालय से संबद्धता दिया गया।बाद में 27 जुलाई 1982 को इस कॉलेज को भागलपुर विश्वविद्यालय ने अंगीभूत कर लिया तथा प्रबंधन समिति स्वत: भंग हो गयी।तब से लेकर भागलपुर में विक्रमशिला सेतु बनने तक इसे शिक्षा जगत में इस युनिवर्सिटी का काला पानी कहा जाता था।बताया जाता है कि शिक्षकों तथा गैर शैक्षिक कर्मियों को सजा के तौर पर इस कॉलेज में भेजे जाने के कारण ही इसका नाम शिक्षा जगत का काला पानी पड़ गया।कॉलेज के इस 60 वर्षों के इतिहास में यहाँ चयनित प्रधानाचार्य का पदस्थापन कुछ ही महीनों के लिये हो पाया है।इन 60 वर्षों में प्रेमा झा पहली कुलपति बनी जिन्होंने वर्ष 2007 में यहाँ आकर यहाँ का हाल जानने की उत्सुकता दिखाया। वहीं 25 जुलाई 2013 को कॉलेज में आयोजित स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में भाग लेने तत्कालीन कुलपति नीलांबुज किशोर वर्मा भी परबत्ता आये थे।इस कॉलेज के खुलने से इलाके के लोगों को स्नातक तक पढाई करने की सुविधा मिली।शायद इसका ही प्रतिफल है कि परबत्ता प्रखंड को जिला में सबसे शिक्षित प्रखंड माना जाता है।सुदूर क्षेत्र में स्थित इस कॉलेज के प्राकृतिक वातावरण तथा ग्राम्य माहौल को देखकर यह विश्वास करना कठिन हो जाता है कि यहाँ नियमित कक्षाओं का संचालन होता होगा।