शराबबंदी कानून को लेकर सरकार से आर-पार की लड़ाई को तैयार थानेदार !

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मुकेश कुमार सिंह : बिहार सरकार की शराब नीति के खिलाफ अब आवाज बुलंद होनी शुरू हो चुकी है ।विरोध आम-अवाम नहीं बल्कि जिनके जिम्मे शराबबंदी को मुस्तैदी से लागू करना है,ये स्वर उधर से ही उठ रहे हैं ।थानेदार अब थाना नहीं चाहते हैं । वे  अब अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर लगातार यही इच्छा जता रहे हैं कि उन्हें थानेदारी से मुक्त करने की गुहार लगा रहे है ।उन्हें अब थाना इंजार्च नहीं बनाया जाए।दरअसल,नए शराबबंदी कानून में सरकार ने कड़े प्रावधान किए हैं ।आम लोगों में इस बात को लेकर संशय की स्थति थी की घर में शराब मिलने की स्थिति में सभी सदस्यों को जेल जाना होगा । इसे लेकर मुख्यमंत्री ने स्पष्टीकरण दिया है और कुछ हद तक लोगों के मन से आशंका खत्म हुई है ।पर,मसला यह है की आम के बाद खास ने भी सरकार की नीति के खिलाफ विरोध शुरु कर दिया है ।

11 थानाध्यक्षों के निलंबन के बाद बिहार पुलिस एसोसिएशन बेहद गंभीर

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गौरतलब है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नए शराबबंदी कानून में इस बात का प्रावधान करवाया है कि जिस थाना अध्यक्ष के इलाके में शराब पकड़ी जायेगी,उन्हें तत्काल निलंबित किया जाएगा और अगले 10 साल तक के लिए उन्हें थानेदारी नहीं मिलेगी ।विधानमंडल से कानून पास हो चुका है और यह अब राज्यपाल के यहां लंबित है ।मुख्यमंत्री के आदेश पर पुलिस पदाधिकारियों के ऊपर कार्रवाई का डंडा चलना शुरू हो गया है ।बिहार के दर्जनभर थाना अध्यक्षों को पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के निर्देश पर निलंबित किया जा चुका है और अब वह अगले 10 साल तक के लिए थानेदार नहीं बन पाएंगे।मुख्यमंत्री के स्पष्टीकरण के आलोक में आलाधिकारियो के इस कदम को राजनीती प्रेक्षक राज्यपाल के समीप लंबित हस्ताक्षर किए जाने का दबाब के रूप में ले रहे है  पटना,आरा,पुर्णिया और रोहतास समेत कई जिलों से थानेदारों ने थाना छोड़ने के लिए लिखित आवेदन पुलिस अधीक्षक को दिए हैं । अब पुलिस पदाधिकारी थानेदारी ही नहीं चाहते,ऐसी सूचना कई जिलों से मिल रही है ।सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि जिनके कंधों पर शराबबंदी रोकने का जिम्मा सौंपा गया था वही अब विद्रोह का झंडा उठा रहे हैं ।बात यहीं पर खत्म नहीं हो रही है ।

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पुलिस पदाधिकारी थानेदारी ही नहीं चाहते

बिहार के 11 थानाध्यक्षों के निलंबन के बाद बिहार पुलिस एसोसिएशन बेहद गंभीर हुआ है ।निलम्बित थानेदारों का निलम्बन अगर 28 अगस्त तक वापस नही लिया गया तो करीब 8 हजार पुलिस निरीक्षक एवं अवर निरीक्षक थानाध्यक्ष की ज़िम्मेदारी से अपने को अलग कर लेंगे ।सभी अपने कर्तव्य का निर्वहन करेंगे पर थानाध्यक्ष का प्रभार नही सम्भालेंगे ।जल्द ही एसोसिएशन पुलिस मुख्यालय को ज्ञापन सौंपने जा रहा है ।

शराब बनी मुसीबत
बताते चलें की विगत शुक्रवार को राज्य पुलिस मुख्यालय ने शराबबंदी के कानून को सख्ती से लागू कराने में विफल राज्य के विभिन्न जिलों के कुल 11 थानाध्यक्षों को ना केवल निलंबित कर दिया है बल्कि इन सभी 11 थानाध्यक्षों को अगले दस साल तक थाने की जिम्मेदारी से अलग रखने का भी फैसला सुनाया है ।

एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय सिंह ने बताया की रविवार को एसोसिएशन की पूर्णिया व भोजपुर जिला इकाइयों की बैठक में सरकार को अल्टीमेटम देने का फैसला लिया गया है ।यह भी तय किया गया है की प्रदेश भर में सभी पुलिस निरीक्षक व पुलिस अवर निरीक्षक स्तर के सभी पुलिस अधिकारी अपने-अपने जिले के एसपी को सामूहिक ज्ञापन सौंपकर थानेदारी नहीं करने के अपने इस निर्णय से उन्हें अवगत कराएंगे ।विदित हो की बिहार में पुलिस निरीक्षकों के साïथ पुलिस अवर निरीक्षकों को थानाध्यक्ष का प्रभार दिया जाता है ।बिहार पुलिस में इस समय पुलिस निरीक्षकों व पुलिस अवर निरीक्षकों की संख्या करीब आठ हजार है ।
पुलिस एसोसिएशन के फैसले की जानकारी नहीं : डी.जी.पी.
डी.जी.पी. पी.के.ठाकुर ने कहा कि हमें बिहार पुलिस एसोसिएशन के इस फैसले की कोई जानकारी नहीं है । यदि एसोसिएशन इस संबंध में कोई ज्ञापन सौंपता है तो पुलिस मुख्यालय उसपर गंभीरता से विचार करेगा ।