पानी घटने के साथ ही बाढ़ से हुई तबाही का हर तरफ दिखने लगा मंजर !

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विद्यालय में घूसा पानी

मधेपुरा (संजय कुमार सुमन) : कोसी के जिलों में आई बाढ़ का असर कम होने लगा है। नदियों का पानी घटने के साथ अब महामारी और बीमारी की आशंका से लोग सहमे हैं। बड़ी संख्या में कच्चे-पक्के घर, पुल-पुलिये और सड़कें ध्वस्त हो गई हैं |कोसी के जलस्तर में कमी के कारण बाढ़ प्रभावित इलाके से पानी अब उतरने लगा है। पानी घटने के साथ ही बाढ़ से हुई तबाही का मंजर दिखने लगा है। गांव की कच्ची सड़के विलीन हो गई है तो कच्चे घर गिर गये हैं। चौसा प्रखंड की आधी आबादी हर वर्ष बाढ़ की त्रासदी झेलने को विवश है। वे बाढ़ की पीड़ा और दर्द के बीच हर वर्ष जीते और मरते हैं। प्रखंड की अधिकांश गांव बाढ़ से प्रभावित है। खेती बाड़ी और जिदंगी भर की कमाई बाढ़ में गवां कर लोग कहीं और पनाह लिये हुए हैं। जिनके चेहरे पर भविष्य की चिंता की लकीरें स्पष्ट देखी जा सकती है। सवाल यह है कि तत्काल अगर इनकी समस्या का समाधान हो भी जाये तो भविष्य का कोई ठिकाना नजर नहीं आता है।

पानी से घिरा गांव
पानी से घिरा गांव

हर वर्ष कहर बनती है कोसी 

फुलौत प्रवेश करते ही चारों ओर पानी ही पानी दिखाई देता है। कोसी का पानी मोरसंडा पंचायत के मोरसंडा,अमनी,महादलित टोला करेलिया मुसहरी,श्रीपुर बासा,परवत्ता,सिढ़ो बासा,फुलौत पूर्वी पंचायत के करेल बासा,अनूपनगर नयाटोला,पिहोड़ा बासा,बड़ी खाल,बड़बिग्घी,फुलौत पश्चिमी पंचायत के झंडापुर बासा,पनदही बासा,घसकपुर,सपनी मुसहरी आदि गांवों में पानी ही पानी नजर आता है। यदि किसी घर में पानी नहीं भी गया है तो लोगों का आवागमन का रास्ता बंद पड़ा है। लोग ऊँचे स्थानों में या फिर विद्यालय में पनाह लिये हुए हैं। इन गांवों में सैलाब ही सैलाब नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने माना कि यू तो हर वर्ष बाढ़ आती है लेकिन इस बार मुश्किल हालात पैदा हो गये हैं। सही तरीके से प्रशासन द्वारा राहत कार्य भी नहीं चलाया गया है।