श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया गया नागपंचमी !

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माँ बिषहरी मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।

खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : श्रावण मास के शुक्ल पंचमी तिथि को नाग पंचमी पूजा रविवार को श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया गया। नाग हमारी संस्कृति का अलग हिस्सा हैं।नाग देवता भगवान शिव के गले नही आभूषण के रूप लिपटे रहते हैं।भगवान विष्णु जी शेष नाग की शेय्या पर शयन करते हैं।मान्यता है कि जब जब भगवान पृथ्वी पर अवतरित हुआ है।शेष नाग भी उसके साथ अवतरित हुआ है।रामावतार में लक्ष्मण, कृष्ण अवतार में बलराम जी हैं। पौराणिक कथा के अनुसार मातृ शाप से नागलोक जलने लगे थे। तब नागों की दाह पीड़ा श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी के दिन शांत हुआ। उस दिन से नाग पंचमी पर्व विख्यात हुआ। koshixpresskoshixpress

क्या कहते हैं पंडितगण,पूजन का महत्व

संसार पुर निवासी पंडित अजय कांत ठाकुर, पिपरा गांव निवासी पंडित चन्द्रभुषण मिश्र बिशौनी गांव निवासी सुदर्शन शास्त्री  बताते हैं कि नाग पंचमी पूजा कल्याणकारी होता है। तथा परिवार में सुख समृद्धि लाती है। मान्यता है कि अगर किसी जातक के घर में किसी सदस्य की मृत्यु सांप के काटने से हुई हो तो उस परिवार के कोई भी सदस्य बारह महीने तक पंचमी का व्रत करना चाहिए। इस व्रत का फल जातक के कुल पे कभी भी सांप का  भय  नहीं होगा। घर घर में लोगों ने मुख्य दरवाजे पर गोवर से नागदेवता की आकृति बनाकर पुष्प एवं धूप से पूजा किया। जिले  के सभी शिव मंदिर,एवं बिषहरी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड पड़ी।koshixpress

बिशौनी बिषहरी मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन

परवत्ता प्रखंड अंतर्गत बिशौनी बिषहरी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड पड़ी।मंदिर में स्थापित बिषहरी माता का लोगों ने पूजन किया। कई दशकों से नाग पंचमी के दिन विशेष पूजा का आयोजन किया जाता आ रहा है। फुलाईस के बाद कुंवारी कन्या को भोजन करवाया  गया। ओर लोगों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। जिले के चर्चित अगुवानी डुमरिया बुजुर्ग के भगवती स्थान में नवाह पाठ का कार्य चल रहा है। नवाह पाठ के मंत्रोउच्चारण के ध्वनि से वातावरण भक्ति मय हो चुका है।

खगडिया जिला के बेलदौर थाना के सकरोहर पंचायत के पचरासी के बहियार मे अवस्थित माँ बिषहरी मंदिर चननदह स्थान सैकडो बर्ष पुराना है।आदिकाल से ही यहां मां बिषहरी कि पूजा अर्चणा होती है| यहां माता का नैहर माना जाता है |