चौसा प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में नाग पंचमी भक्ति के साथ मनाया गया !

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मंदिर में उमड़ी भीड़

मधेपुरा (संजय कुमार सुमन) : जिले के चौसा प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में आज रविवार को नाग पंचमी का त्योहार बड़े ही आस्था एव श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया गया। मालूम हो कि नाग हमारी संस्कृति का अलग हिस्सा हैं।नाग देवता भगवान शिव के गले नही आभूषण के रूप लिपटे रहते हैं।भगवान विष्णु जी शेष नाग की शेय्या पर शयन करते हैं।मान्यता है कि जब जब भगवान पृथ्वी पर अवतरित हुआ है।शेष नाग भी उसके साथ अवतरित हुआ है।पौराणिक कथा के अनुसार मातृ शाप से नागलोक जलने लगे थे। तब नागों की दाह पीड़ा श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी के दिन शांत हुआ। उस दिन से नाग पंचमी पर्व मनाया जाता है।माता बिसहरी को पूजा अर्चना करने के बाद बड़े श्रद्धा से लोग माता विषहरी का गीत गाकर और दूध लावा चढ़ाकर माता से अपनी मनोकामना पूरी होने का कामना भी की।koshixpresskoshixpress

चौसा,लौआलगान,फुलौत,कलासन,घौषई,बैशेठा समेत सभी शिव मंदिर,एवं बिषहरी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड पड़ी। मंदिर में स्थापित बिषहरी माता का लोगों ने पूजन किया। कई दशकों से नाग पंचमी के दिन विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। नवाह पाठ के मंत्रोउच्चारण से पूरा वातावरण भक्ति मय हो गया है। घोषई में अवस्थित माँ बिषहरी मंदिर सैकडो बर्ष पुराना है।आदिकाल से ही यहां मां बिषहरी कि पूजा अर्चणा होती है| koshixpress

शशि भूषण, स्वर्णकार, संतोष मिस्त्री मनोज शर्मा,संतोष स्वर्णकार,सोटन शर्मा, पप्पू शर्मा, प्रहलाद स्वर्णकार, मदन शर्मा, शहंशाह कैफ बताते हैं कि नाग पंचमी पूजा कल्याणकारी होता है तथा परिवार में सुख समृद्धि लाती है। मान्यता है कि अगर किसी जातक के घर में किसी सदस्य की मृत्यु सांप के काटने से हुई हो तो उस परिवार के कोई भी सदस्य बारह महीने तक पंचमी का व्रत करना चाहिए। इस व्रत का फल जातक के कुल पे कभी भी सांप का  भय  नहीं होगा। घर घर में लोगों ने मुख्य दरवाजे पर गोवर से नागदेवता की आकृति बनाकर पुष्प एवं धूप से पूजा किया।

झाड़ फूंक करने वाले अपनी सिद्धी के लिये हाथ चलाया है।जिसे देखने वालों की भीड़ लगी रही।