मधुश्रावणी पूजा धूम धाम से मना !

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पूजा करती नव विवाहिता

खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : ” चलू- चलू बहिना हकार पूरय लेय ,टनी दाय के वर एलय टेमी दागय लय“–मधुर मैथिली गीत के साथ मिथिला संस्कृति का महान पर्व मधुश्रावणी पूजा शुक्रवार को सम्पन्न हुआ। लगातार तेरह दिनों तक नवविवाहिता ने श्रद्धा भक्ति के साथ महादेव,गौरी,नाग,नागिन आदि का पूजन किया। प्रति दिन नवविवाहिता शिव पार्वती,नाग,नागिन, बिहुला बिषहरी,मैना गौरी,मंगला गौरी,बाल बसंत आदि से जुड़ी कथाओं का श्रवण किया।

बगीचे में फूल तोड़ती नव विवाहिता
बगीचे में फूल तोड़ती नव विवाहिता

तेरह दिनों तक भक्ति  का माहौल  बना रहा

टेमी दागने की परंपरा – शुक्रवार  को पूजन काफी विधि विधान तरीके से किया गया। नवविवाहिता को रूई की टेमी से हाथ, घुठना, पैर पर पान के पत्ते रखकर टेमी जलाकर दागा गया। नवविवाहिता के लिए यह अग्नि परीक्षा अपने पति के दीर्घायु एवं अमर सुहाग की कामना के लिए की जाती है। कुछ बुजुर्ग महिला का मानना है कि टेमी दागने से पति पत्नी में मधुर सम्बन्ध बना रहता हैं।

टेमी दागने की विशेष परंपरा
         टेमी दागने की विशेष परंपरा

भाई का विशेष योगदान – इस  पूजन में नवविवाहिता के भाई का बहुत ही बड़ा योगदान रहता है। प्रत्येक दिन पूजा समाप्ति के बाद भाई अपनी बहन को हाथ पकड़ कर उठाती हैं। नवविवाहिता अपने भाई को इस कार्य के लिए दुध ,फल आदि प्रदान करते हैं।

सुहागिन महिलाएं के बीच पकवानों से भरी डाली का वितरण

वहीं नवविवाहिता चौदह सुहागिन महिलाएं के बीच फल एवं पकवानों से भरी डाली प्रसाद के रूप में वितरण कर किया। एवं ससुराल पक्ष के आए हुए बुजुर्ग लोगों से आशीर्वाद प्राप्त कर पूजन का कार्य सम्पन्न किया।इस पूजन में ससुराल पक्ष का विशेष योगदान रहता हैं।मिट्टी के बनाए हुए नाग,नागिन, हाथी आदि कि प्रतिमा एवं  पूजन के कार्य में लगे फूल पत्ते का विसर्जन कार्य संध्या में किया गया। उसके बाद नवविवाहिता ने नमक ग्रहण किया।koshixpress

सुहागिन महिलाएं के बीच पकवानों का वितरण
सुहागिन महिलाएं के बीच पकवानों का वितरण

नवविवाहिताओ ने मधुश्रावणी पूजा धूम-धाम से मनाया

आज भी बरकरार हैं पुरानी परंपरा – सदियों से चली आ रही मिथिला संस्कृति का महान पर्व आज भी बरकरार है। ओर नवविवाहिता श्रद्धा भक्ति के साथ मनाती हैं। महिलाएं समूह बनाकर मैथिली गीत गाकर भोले शंकर को खुश करती हैं। ओर आने वाले पीढ़ी को आगाज करती हैं कि इस परंपरा को बरकरार रखना।इस पर्व में मिथिला संस्कृति की झलक ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति की भी झलक देखने को मिलती हैं। इस खास पूजन में भारतीय संस्कृति के अनुसार विभिन्न वस्त्र ,श्रृंगार से सुसज्जित होती हैं।