बिहार की सरस्वती आन्ध्र प्रदेश में मचा रही है धुम !

1103
नृत्यांगना सरस्वती

खगडिया (मुकेश कुमार मिश्र) : शिव शक्ति योग पीठ नवगछिया (भागलपुर) से जुड़े तुलसीपुर जमुनियाॅ निवासी योगाचार्य गुड्डु जी की आठ वर्षीय पुत्री ‘सरस्वती’ आन्ध्र प्रदेश में  नृत्य कला के क्षेत्र में धुम मचा रही है। उस परिवार पर परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त है। 45 वर्षीय गुड्डु जी आन्ध्र प्रदेश अन्तर्गत प्रकाशम जिले के अंगोल शहर में रहते हैं।ओर शादी भी वहीं किए।उनकी धर्म पत्नी लक्ष्मी आन्ध्र प्रदेश की स्थाई निवासी है। गुड्डु जी को एक पुत्री सरस्वती हैं।

आन्ध्र प्रदेश के सांसद एवं प्रशासनिक अधिकारी सरस्वती को पुरस्कृत करते
आन्ध्र प्रदेश के सांसद एवं प्रशासनिक अधिकारी सरस्वती को पुरस्कृत करते
आन्ध्र प्रदेश में सरस्वती को पुरस्कृत करते
आन्ध्र प्रदेश में सरस्वती को पुरस्कृत करते

सरस्वती  की माँ लक्ष्मी अपने बेटी को और उपर उड़ान भरने की  जी तौर कोशिश कर रही हैं। आठ वर्षीय सरस्वती चार वर्ग में पढ रही हैं।भारत में नृत्य कला का एक विशेष स्थान हैं।पढाई के साथ सरस्वती आन्ध्र प्रदेश की स्वदेशी नृत्य ‘कुचीपुडी’ की विधा हासिल कर एक अलग पहचान बना चुकी हैं। सरस्वती साई नाट्य कला भारती (आन्ध्र प्रदेश) से नृत्य कला सीख रही हैं। कुचीपुडी नृत्य के साथ,क्लासिकल डांस भी करती हैं।

वर्ष 2014  में आयोजित इन्टरनेशनल कुचीपुडी नृत्य प्रतियोगिता(आन्ध्र प्रदेश) में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुकी सरस्वती आन्ध्र प्रदेश के सांसद एवं प्रशासनिक विभाग के वरीय पदाधिकारियों द्वारा सम्मानित हो चुकी हैं। इसके अलावा भी सरस्वती नृत्य कला के क्षेत्र में दर्जनों बार पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं।

नृत्य करती सरस्वती
नृत्य करती सरस्वती

विगत दिनों भागलपुर के लाजपत पार्क मैदान में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान सरस्वती ने अपने नृत्य कला को प्रस्तुत कर लोगों का दिल जीत लिया। सरस्वती के पैरों में बंधी घुंघरू की छन  छन आवाज के साथ कुचीपुडी नृत्य उपस्थित हजारों लोगों का दिल छु लिया। गुरु पूर्णिमा महोत्सव में सरस्वती अपने माता पिता के साथ परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आन्ध्र प्रदेश से आईं हुई थीं।

सरस्वती की माँ लक्ष्मी बताती हैं कि सरस्वती जब छ: माह की थी तो उसके मुँह से ओम् शब्द का उच्चारण हुआ करता था। बचपन से ही नृत्य के प्रति काफी लगाव था। आज अपने मेहनत के बदौलत इस मुकाम तक पहुंचीं हैं। सरस्वती नृत्य कला के क्षेत्र में और आगे बढेगी। बचपन से ही सरस्वती प्रतिभा की धनी है। सरस्वती के पिता गुड्डु जी योग के माध्यम से लोगों को स्वस्थ कर रहे हैं।

गुड्डु जी ने बताया कि सरस्वती एक दिन नृत्य कला के क्षेत्र में बिहार,आन्ध्र प्रदेश ही नहीं अपने देश का नाम रोशन करेगी। मुझे पूर्ण विश्वास हैं और परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज का आशीर्वाद हैं। दिसंबर माह में आयोजित होने वाले नृत्य प्रतियोगिता की तैयारी में सरस्वती लगीं  हैं। सिलकन आन्ध्रा इन्टरनेशनल कुची पुडी नृत्य कला प्रतियोगिता आन्ध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में आयोजित होगी।