18 अगस्त को शोभन योग में मनेगा रक्षा बंधन !

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दुकानों में राखी की खरीदारी करते बहनें

खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र ) : स्नेह और लगाव का एक छोटा सा धागा इतिहास रचा है।भाई बहन के स्नेह ओर लगाव का त्यौहार रक्षा बंधन श्रावण मास के पूर्णिमा को मनाया जाता है। जिसकी तैयारियों घर घर में प्रारंभ हो चुकी है। दुकानें रंग बिरंगे राखियाँ से सज धज कर तैयार हैं। सभी तबक़े के लोग इस त्यौहार को हर्षोल्लास के साथ सदियों से मनाते आ रहे हैं। मंहगाई की इस दौर में राखी की कीमतों में इस बार इजाफा हुआ है।  koshixpress

रक्षा बंधन का शुभ श्रेष्ठ मुहूर्त

संसार पुर गांव निवासी पंडित अजय कांत ठाकुर बताते हैं कि 17 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 58 मिनट के बाद पूर्णिमा तिथि का प्रवेश हो जाता हैं।जो अगले दिन 18 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। वहीं भाद्रा  नक्षत्र 17 अगस्त की देर रात्रि को ही समाप्त हो जाता है। इसलिए रक्षा बंधन का शुभ श्रेष्ठ मुहूर्त 18 अगस्त को सूर्योदय के बाद दोपहर 3 बजकर  8 मिनट तक है। धार्मिक शास्त्र के मुताबिक दोपहर में शुभ कार्य करना मंगलकारी सिद्ध होता हैं। इस बार शोभन योग में रक्षा बंधन मनेगा जो सर्वार्थ मंगलकारी होता हैं।भाई बहन के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त है।

 धागे से जुड़े हैं संस्कार

सनातन परम्परा से किसी भी शुभ कार्य या अनुष्ठान की पूर्णाहुति बिना रक्षा बांधे पुरी नहीं होती हैं। हाथों में धागे लपेटने के पीछे मान्यता है कि इससे उनका परिवार धन धान्य रहे।

रेडिमेड दुकानों में भी उमड़ी ग्राहकों की भीड़
 रेडिमेड दुकानों में भी उमड़ी ग्राहकों की भीड़

रक्षा बंधन का मंत्र

“येनवद्धो बलिराजा दानवेन्द्र: महासुर: । तेन त्वां प्रतिवद्ध। नामि रक्षोमाचल मा चल।। यानी जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था। उसी रक्षा से में तुम्हें बंधता हूं।जो तुम्हारा रक्षा करें। इसी रक्षा बंधन मंत्र के साथ बहनें अपने भाई के कलाई में राखी बांधती हैं। ओर  माथे पर तिलक लगाकर आरती ऊतारती हैं। भाई भी बहनें की रक्षा करने हेतु वचन देते हैं। धार्मिक ग्रंथ में  वर्णित कृष्ण जब एक युद्ध में घायल होकर द्रोपती के पास पहुँचे तो द्रोपती ने बिना कहें अपने वस्त्र का  एक किनारा चीर कर उनकी घायल कलाई पर बांध  दिया। वस्त्र के उस छोटे टुकड़े का लाज कृष्ण ने तब रखी जब कौरवों की सभा में द्रोपती के वस्त्र खीचें जा रहे थे।                koshixpress

बहनें के लिए भाई के तरफ से उपहार

यह त्यौहार भाई बहन का एक दूसरे के प्रति स्नेह,प्यार ओर अटूट विश्वास का प्रतीक हैं। इस पवित्र मौके पर भाई द्वारा बहनें को उपहार भेंट किया जाता है। जो स्नेह एवं प्यार का प्रतीक हैं। बहनें हर्षित होकर उपहार को ग्रहण करती हैं।रक्षा बंधन के दिन विभिन्न मंदिरों में काफ़ी भीड़ देखने को मिलती हैं।