श्रद्धा भक्ति के साथ मनाया जा रहा है मधुश्रावणी पूजा !

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फुल तोड़ती महिलाएं
खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : मिथिला संस्कृति का महान पर्व मधुश्रावणी पूजा श्रद्धा एवं भक्ति के साथ नवविवाहिता मना रही हैं। पांच अगस्त तक चलने वाली इस पूजा से नवविवाहिता के आसपास का माहौल भक्ति मय बना हुआ है।सदियों से नवविवाहिता इस पूजन को श्रद्धा,भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ मनाते आ रहे हैं। इस पूजन में संध्या के समय तोडे गए फूल जो सूबह पूजन के कार्य में किया जाएगा इसका विशेष महत्व है। इसलिए संध्या के समय नवविवाहिता अपने सखी सहेलियों के  साथ एक समूह बनाकर पूजन हेतु बांस के डाली में फूल तोड़ती हैं। साथ में महिलाएं गीत गातीं हैं। 24 जूलाई को पूजा प्रारंभ हुआ है और 5 अगस्त तक चलेगी।koshixpresskoshixpress
नवविवाहिता सखी सहेलियों के साथ फूल तोड़ती
लगातार तेरह दिनों तक नवविवाहिता अपने ससुराल का अरवा भोजन प्राप्त करती हैं। तपस्या के समान यह पर्व पति की दीर्घायु के लिये हैं। नवविवाहिता के ससुराल पक्ष से विधि विधान में कोई कसर नहीं होने देती हैं। पूजा के अंतिम दिन नवविवाहिता के ससुराल पक्ष से काफी मात्रा में पूजन की सामग्री, कई प्रकार के मिष्ठान ,नए वस्त्र के साथ पांच बुजुर्ग लोग आशीर्वाद देने के लिए पहुँचते हैं। नवविवाहिता ससुराल पक्ष के बुजुर्ग लोगों से आशीर्वाद पाकर हीं पूजा समाप्त करती हैं । मधुश्रावणी पूजा के अंतिम दिन कई विधि विधान तरीके से पूजन का कार्य किया जाता हैं।सुबह शाम महिलाएं समूह बनाकर घंटों गीत गाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लगातार तेरह दिनों तक पूजा स्थल पर नवविवाहिता की देख रेख में  अखंड दीप प्रज्वलित रहती हैं। कथा वाचिका प्रत्येक दिन नवविवाहिता को मधुश्रावणी व्रत कथा सुनाती हैं। पूजा के समय नवविवाहिता नए वस्त्र में आभूषण से सुसज्जित होकर कथा श्रवण के साथ पूजा ,अर्चना कर रही हैं।