प्रेम विषयक एकल काव्य-पाठ एवं पावस काव्य गोष्ठी का आयोजन !

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मधेपुरा (kx डेस्क) : कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन मधेपुरा के अंबिका सभागार में ’समकालीन प्रेम कविता एवं पावस काव्य-गोष्ठी’ का भव्य आयोजन का हुआ।koshixpress

शब्दों की सार्थक अभिव्यक्ति है अरविन्द ठाकुर की कविताएं– डा. रवि मधेपुरा

समारोह की अधक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्री हरिशंकर श्रीवास्तव ’शलभ’ नें कीकार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए अपने संक्षिप्त वक्तव्य के साथ अतिथि कवि अरविन्द ठाकुर ने प्रेम विषयक लगभग तीस कविताओं का पाठ किया। उन्होंने कहा – प्रेम एक मछली है / उसे मुक्त रखो / जल में बिचड़ने को छोड़ दो उसे / स्वतंत्र व निर्वाध.. अगली कविता में उन्होंने कहा- सतत जारी रहने वाली एक खोज है प्रेम/ अपनी अखिलता में अनन्त/ एकांतिकता में कभी शुरू तो कभी खतम। उन्होंने आगे कहा- प्रेम से आगे/ प्रेम से पीछे/ भले कंगाल ही हो / प्रेम के मध्य में/ एक चक्रवर्ती सम्राट होता है हर प्रेमी । आगे उन्होंने कहा- पूर्णता अपने पूर्णतम रूप में होती है/ जब होते हैं हम प्रेम में.. जोरदार तालियों से कवि अरविन्द ठाकुर की कविताओं का स्वागत किया गया।

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सहरसा से पधारे हास्य कवि केदारनाथ गुप्ता ने अपनी सम-सामयिक व्यंग्य कविताओं से उपस्थित श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। कार्यक्रम के शुभारंभ में अतिथि कवि का परिचय कराते हुए संस्थान के सचिव डा. भूपेन्द्र मधेपुरी ने कहा कि अरविन्द ठाकुर हिन्दी और मैथिली साहित्य में समान हस्तक्षेप रखते हैं। इनकी कविताओं का बांग्ला, पंजाबी, मराठी आदि में अनुवाद प्रकाशित है। ये प्रथम सचित्र मैथिली दैनिक ’मिथिला आवाज’ के संस्थापक संपादक रहे हैं। साहित्य अकेदमी, नई दिल्ली द्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में इनकी भागीदारी रही है। ये बिहार प्रगतिशील लेखक संघ के उपाध्यक्ष हैं। इनके चार संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, अत: कौशिकी क्षेत्र साहित्य सम्मेलन इनका सम्मान करते हुए गर्वान्वित हो रहा है |तत्पश्चात अतिथि कवि का संस्थान के सचिव नें अंगवस्त्र के साथ सम्मानित किया।

इस अवसर पर उपस्थित स्थानीय कवियों नें भी अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज करायी। जिनमें सिद्धेश्वर काश्यप, दशरथ प्र. सिंह कुलिष, मणिभूषण वर्मा, आलोक कुमार, राजू भैया, राकेश द्विजराज, संतोष सिन्हा, उल्लास मुखर्जी, कुमारी रश्मि, आशीष मिश्रा आदि कवियों की प्रेम व पावस विषयक कविताओं का श्रोताओं भरपूर आनंद उठाया।koshixpress

कवि अरविन्द श्रीवास्तव की कविता की बानगीजब चुप्पी तोड़ी थी तुमने/ पास एक नदी सूखी पड़ी थी/ अचानक आयी बाढ़ में बह गया था मैं/ शायद कहीं ग्लेशियर पिघला था/ बदल गयी थी दुनिया./ ग्रह-नक्षत्र सारे !

संस्थान के संरक्षक डा. रवि जी ने कहा किअरविन्द ठाकुर की कविताओं में शरीरी और अशरीरी दोनों तरह की अभिव्यक्ति है जो आगे बढ़कर सूफ़ीवाद तक को अपने में समेट लेती है, इनकी कविताएं शब्दों की सार्थक अभिव्यक्ति है।koshixpress

पूर्व प्रतिकुलपति के.के मंडल ने अपने उदगार में प्रेम कविता की सार्थकता को रेखांकित किया

संस्थान के अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ नें कहा कि अरविन्द ठाकुर की काव्य-भाषा में माधुर्य, सहजता, सरलता, बोधगम्य तथा ’ अरथ अमित आखर अति थोड़े’ की विशेषता है। इस अवसर पर डा. शचीन्द्र, योगेन्द्र प्राणसुका, शिवजी साह, डा. अरुण कुमार यादव, श्यामल किशोर सुमित्र आदि उपस्थित थे।