सावन में हरी चूड़ियाँ एवं मेंहदी से सजी दुकान !

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खगडिया (मुकेश कुमार मिश्र) : ” गोरी हैं कलाइयां  पहना दें मुझे हरी हरी चूड़ियाँ  अपना बना ले मुझे बालमा  ” गीत सावन के महीनों में सटीक बैठती है |सावन का महीना आते ही चूड़ियों की बिक्री बढ़ जाती है। खासतौर पर हरे रंग की चूड़ियों की मांग सबसे ज्यादा रहती है। यही वजह है कि चूड़ी बेचने वाले इन दिनों हरी चूड़ियों की कीमत बढ़ा देते हैं।अमर सुहाग का प्रतीक हरी चूड़ियाँ एवं मेंहदी हैं।खासकर के सावन में इसकी मांग बढ जाती हैं। सावन में हरी चूड़ियाँ एवं हाथों में मेंहदी लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही हैं। पौराणिक कथा के अनुसार सावन मास में पार्वती ने भोले शंकर को रिझाने के लिए मेंहदी लगाने के साथ हरी रंग की चूड़ियाँ पहनी थी।koshixpress

आज भी इस पुराणी परंपरा को नवविवाहिता निभा रही हैं। सभी उम्र की सुहागन महिलाएं सावन मास में हरी चूड़ियाँ एवं हाथों में मेंहदी लगाती हैं। जो भी हो आज भी सावन मास में हरी चूड़ियाँ का क्रेज बरकरार है। अब तो कांच की चूड़ियाँ पर लाह के कई डिज़ाइन वाली चूड़ियाँ बाज़ार में मिलने लगी है ओर रेडिमेड मेंहदी से दुकान सजी हूई हैं।  मंहगाई से चूड़ियाँ के कीमत में इजाफा हुआ है।युवतियां हरे रंग की लाह की चूड़ी तलासती हैं।कांच की चूड़ियाँ का क्रेज लाह की अपेक्षा कम है।लगभग सभी महिलाएं लाह को ज्यादातर पसंद करती हैं।