बाढ़ पीड़ितों की बढ़ने लगी परेशानी !

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मधेपुरा (संजय कुमार सुमन) : कोसी नदी के जलस्तर में लगातार हो रहे वृद्धि से बाढ़ पीड़ितों का दर्द अब बढ़ने लगा है। हजारों लोग कई समस्याओं से जूझने को विवश है। कोसी का पानी मोरसंडा पंचायत के मोरसंडा,अमनी,महादलित टोला करेलिया मुसहरी,श्रीपुर बासा,परवत्ता,सिढ़ो बासा,फुलौत पूर्वी पंचायत के करेल बासा,अनूपनगर नयाटोला,पिहोड़ा बासा,बड़ी खाल,बड़बिग्घी,फुलौत पश्चिमी पंचायत के झंडापुर बासा,पनदही बासा,घसकपुर,सपनी मुसहरी आदि गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। बाढ़ का पानी लोगों के घर आंगन से बह रहा है। लोगों को अब भोजन पकाने पर भी आफत आ पड़ी है। कई छोटे-छोटे बच्चे चूहे की खोज में नदी किनारे दिख रहे हैं और अपनी भूख को मिटाने के लिए इसे पका कर खा रहे हैं।koshixpresskoshixpress

लगातार बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा जिला पदाधिकारी मु0सौहेल कर रहे हैं लेकिन अब तक पीड़ितो के लिए राहत की व्यवस्था नहीं की गई है। पानी आने से कई गांवों का आवागमन ठप्प हो गया है। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के लोग रतजगा कर जी रहे हैं। बाढ़ का पानी कब फुस के घर को बहा ले जाएगा इसका कोई ठिकाना नहीं हैं। लोगों ने बताया कि कोसी की गर्जना से नींद नहीं आती है। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अभी तक प्रशासन की ओर से जितनी नावों का परिचालन किया गया है वह कम है। प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों के बीच सरकारी सहायता उपलब्ध नहीं कराने से लोगों की परेशानी और बढ़ती ही जा रही है। सैकड़ों एकड़ में लगी मकई एवं धान की फसल बर्बाद हो गई है। यह विडंबना नही तो क्या है। कभी कोसी के किसानों के बीच पानी के लिए हाहाकार मचता है तो कभी खेत में लहलहाती फसल को नदी अपने आगोश में ले लेती है। हर साल बाढ़ का कहर मचता है। लोग जान-माल लेकर भागते हैं। परन्तु आज तक इसका निदान नहीं निकल सका है। सबसे बड़ी समस्या पशुचारा की है। लोग अपने पशु के लिए पानी में तैर कर घास ला रहे हैं। प्रशासन द्वारा अब तक पशुचारा की भी व्यवस्था नहीं की गई है।koshixpress

बाढ़ पीड़ितों की समस्या को देखते हुए जिला पदाधिकारी मु0सौहेल पदाधिकारियों के साथ लगातार बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का नौका से दौरा कर रहे हैं। सभी बाढ़ पीड़ित आशा भरी निगाह से डीएम को देख रहे हैं कि लगातार फुलौत का दौरा कर स्वयं बाढ़ की स्थिति का जायजा ले रहें निश्चित ही राहत की घोषणा होगी पर वैसा कुछ भी अभी तक नही हो पाया है। पानी के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से घर में खाना पकाना भी अब मुश्किल सा हो गया है। जो भी जलावन था वह भी कोसी मैया बहा ले गई है। शौचालय एवं शुद्ध पानी के लिए लोग तरस रहे हैं। लंबे-लंबे बांस के चचरी का शौचालय बनाकर जान को जान जोखिम में डालकर उसका प्रयोग किया जा रहा है। छोटे-छोटे बच्चे जिनकी उम्र तकरीबन 10 से 15 साल है वे नदी या सैरात के पास मंडराते देखे जा रहे हैं। वे अपनी भूख को मिताने के लिए चूहे को खोज रहे हैं। मिलने पर उसे पकाकर अपना आहार बना रहे हैं।