बाढ़ का कहर गहराया,सांसत में लोग !

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मधेपुरा (संजय कुमार सुमन ) : लगातार बढ़ते जलस्तर से चौसा प्रखंड में बाढ़ की भयावह स्थिति पैदा हो गई है। बावजूद इसके लोग अपने घरों को छोड़ नहीं रहे है। कई विद्यालयों में पानी प्रवेश के बावजूद विद्यालय के बंद न होने से बच्चे जान जोखिम में डाल कर विद्यालय आ रहे हैं। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में अब तक राहत कार्य नहीं चलाया जा सका है। अंचल प्रशासन की माने तो अब तक कोई भी परिवार विस्थापित नहीं हुआ है। सैकड़ों एकड़ में लगी किसानों की फसल पानी में डूब गई है।koshixpress

पानी ने ही उतार दिया है चौसा प्रखंड का पानी

मालूम हो कि प्रखंड के दर्जनों गांव कोसी नदी के कछार पर बसे  है। लगातार बढ़ते जल स्तर से बाढ़ की भयावह स्थिति पैदा हो गई है। एक घर से दूसरे घर जाने के लिए भी अब लोगों को नाव का सहारा ही लेना पड़ रहा है। चौसा प्रखंड के फुलौत,मोरसंडा,चिरौरी,लौआलगान,चौसा पश्चिमी पंचायत के लिए बाढ़ पुरानी  दुखद गाथा है। हर साल बाढ़ इस इलाके की बड़ी आबादी को हर खानाबदोश बनाती रही और नेता भी बस इसके गवाह बनते रहे। बाढ़ के दिनों में यहां की मुख्य सवारी नाव हो जाती है। बच्चों को नाव की सवारी कर विद्यालय जाना होता है। इस दौरान कई बच्चों की मौत पानी में डूब कर होती रही है । सैकड़ों एकड़ खेत में लगी फसल बर्बाद हो गई। किसानों के बीच पानी के लिए हाहाकार मचता है तो कभी खेत में लहलहाती फसल को नदी अपने आगोश में ले लेती है। हर साल बाढ़ का कहर मचता है। लोग जान-माल लेकर भागते हैं। परन्तु आज तक इसका निदान नहीं निकल सका है। पानी घटने के बजाय बढ़ रहा है। koshixpress

छलते रहे नेता 

कोशी के गर्भ में बसे इन ग्रामीणों के पास मेहनत करने के अलावा कोई उपाय नही हैं। यहां के लोगों के समक्ष समस्याएं अनेक है,लेकिन इसकी परवाह किसी को नही है। हाथ में कुदाल और झोले में बीज,खेत में काम करना और रात को रूखा सूखा खाकर भगवान को याद करते हुए नींद में चले जाना। यह यहां के लोगों की नियति बनी हुई है। चिंता यदि है तो सिर्फ अपने बेटे और बेटियों की शिक्षा और शादी की। यहां कोई अपने बेटे और बेटियों को ब्याहना नहीं चाहते है। आज भी दुल्हन को पैदल ही अपने ससुराल जाना पड़ता है। बस यही एक शर्म महसूस होता है,यहां के लोगों को। शिकायत तो बहुत है पर करें तो किससे करें। गांव के लोगों के चेहरे पर पिछड़े क्षेत्र में रहने का मलाल तो साफ नजर आता है लेकिन जुबान खामोश रहती है। यहां के लोग इतने दर्द अपने अंदर समेटे हैं,जिसका थाह लगााना आम लोगों के वश की बात नही है। जब भी चुनाव आता है यहां के लोग नेताओं के सब्जबाग में फंस कर मतदान करते है लेकिन फिर पांच वर्षों तक उनलोगों के साथ वही सब कुछ होता है जो आजादी के बाद से होता आ रहा है।

अधिकारियो का कोड़ा आश्वासन 

बाढ़ पीड़ितों की समस्या को देखते हुए जिला पदाधिकारी मु0सौहेल समेत कई अधिकारी बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं। अंचल अधिकारी अजय कुमार कहते हैं कि घबराने की कोई बात नहीं हैं पीड़ित लोगों को सरकारी स्तर से आवश्यक सहायता दी जायेगी।