डम-डम डिगा-डिगा मौसम भींगा भींगा…सुरली नगमों के गायक को गूगल ने भी याद किया !

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सहरसा (kx डेस्क) : डम-डम डिगा-डिगा मौसम भींगा भींगा जैसे सुरली नगमों के बेताज बादसाह मुकेश को उनके 93वें जन्मदिन पर गूगल ने अपना डूडल बनाकर याद किया है।वर्षो बाद भी आज मुकेश की आवाज की दीवानी दुनिया है |अपनी दर्द भरी सुरली आवाज से संगीत प्रेमियों के दिलो पर राज कर चुके मुकेश ने अपने 40 वर्षो के करियर में 200 से अधिक फिल्मों के लिए गीत गाए |koshixpressउस वक़्त के हर सुपर स्टार के लिए आवज बने मुकेश के गाए गीतों को आज भी लोग गुनगुनाते है |वर्ष 1971 में बनी फिल्म आनंद के गाने कहीं दूर जब दिन ढल जाए,साँझ की दुल्हन बदन चुराएं या फिर 1966 में बिहार में फिल्मांकन की गई फिल्म तीसरी कसम के गाने तुम्हारे महल चौबारे यहीं रह जाएंगे सारे गाने हो या फिर ‘दोस्त-दोस्त ना रहा’, ‘जीना यहां मरना यहां’, ‘कहता है जोकर’, ‘दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई’, ‘आवारा हूं’, ‘मेरा जूता है जापानी’ जैसे नगमों के सरताज मुकेश चन्द्र माथुर की गीत हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से कहीं न कहीं जुड़ते हैं और यही नहीं, उनके गाए नगमें आज के नए गीतों को टक्कर देते हैं, रीमिक्स भी बनता है। मुकेश का जन्म 22 जुलाई, 1923 को दिल्ली में हुआ था। मुकेश के पिता जोरावर चंद्र माथुर इंजीनियर थे। मुकेश उनके 10 बच्चों में छठे नंबर पर थे। उन्होंने दसवीं तक पढ़ाई कर पीडब्लूडी में नौकरी शुरू की थी। कुछ ही साल बाद किस्मत उन्हें मायानगरी मुंबई ले गई

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मुकेश के माया नगरी का सफर (विकिपीडिया से)

मुकेश की आवाज़ बहुत खूबसूरत थी की को उनके एक दूर के रिश्तेदार मोतीलाल ने तब पहचाना जब उन्होंने उसे अपने बहन की शादी में गाते हुए सुना। मोतीलाल उन्हें बम्बई ले गये और अपने घर में रहने दिया। यही नहीं उन्होंने मुकेश के लिए रियाज़ का पूरा इन्तजाम किया। इस दौरान मुकेश को एक हिन्दी फ़िल्म निर्दोष (1941) में मुख्य कलाकार का काम मिला। koshixpressपार्श्व गायक के तौर पर उन्हें अपना पहला काम 1945 में फ़िल्म पहली नज़र में मिला। मुकेश ने हिन्दी फ़िल्म में जो पहला गाना गाया, वह था दिल जलता है तो जलने दे जिसमें अदाकारी मोतीलाल ने की। इस गीत में मुकेश के आदर्श गायक के एल सहगल के प्रभाव का असर साफ़-साफ़ नज़र आता है। 1959 में अनाड़ी फ़िल्म के ‘सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी’ गाने के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था। 1974 में मुकेश को रजनीगन्धा फ़िल्म में कई बार यूँ भी देखा है गाना गाने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

1976 में जब वे अमेरीका के डेट्रॉयट शहर में दौरे पर थे, तब उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनकी मृत्यु हो गयी।