सोलर लाईट खरीद में गड़बड़ी की फाईलें गायब,सूचना आयोग की सख्ती के बाद हरकत में आया प्रशासन !

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खगड़िया (मुकेश कुमार मिश्र) : पटना सचिवालय में पशुपालन विभाग की फाईल गायब होने के बाद मचे हो हंगामे के बीच परबत्ता प्रखंड कार्यालय से सोलर लाईट की खरीद में की गयी गड़बड़ी से संबंधित फाईलें गायब होने के बाद चर्चा का बाजार गर्म है। जिले के तीन प्रखंडों परबत्ता,चौथम और बेलदौर प्रखंडों में सोलर लाईट की खरीद में की गयी गड़बड़ी से संबंधित फाईलें गायब हो गयी हैं।इस बाबत जिला के सूचना अधिकार कार्यकर्ता शैलेन्द्र सिंह तरकर के द्वारा इस खरीद में भ्रष्टाचार से संबंधित वर्ष 2012 से चलायी जा रही लड़ाई में अब कर्मियों को नोटिश किया गया है।
डी डी सी ने दिया पत्र
खगड़िया के उप विकास आयुक्त ने इस मामले पर परबत्ता,चौथम तथा बेलदौर के प्रखंड विकास पदाधिकारियों को पत्र भेजकर कार्रवाई करने का आदेश दिया है।डी डी सी के पत्रांक 363 दिनांक 06 जून 16 के अनुसार सोलर लाईट खरीद में दोषी पदाधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध नीलाम पत्र दायर नहीं किया गया है जो कि खेद का विषय है।जबकि इस मामले में राज्य सूचना आयोग में 03 जून 16 को सुनवाई निर्धारित थी।पत्र में दोषी के विरुद्ध नीलाम पत्र वाद दायर करने तथा प्रपत्र ‘क’ गठित करने का आदेश दिया गया है।
बी डी ओ ने दिया नोटिश ,बी डी ओ ने किया तीन कर्मियों को नोटिश
परबत्ता के प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ कुंदन ने प्रखंड के पूर्व प्रधान सहायक वशिष्ठ प्रसाद सिंह,पूर्व प्रखंड नाजिर सिद्धार्थ राज तथा पूर्व लिपिक अहमद खलिल को नोटिश कर इस फाईल के गायब होने के बारे में जिम्मेदार ठहराते हुए जानकारी माँगा है।नोटिश के अनुसार परबत्ता प्रखंड अंतर्गत सोलर लाईट क्रय में अनियमितता बरतने वाले दोषी पदाधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध नीलाम पत्र वाद दायर करने तथा प्रपत्र ‘क’ गठित करने का निर्देश प्राप्त हुआ है।इस हेतु कई स्मार पत्र प्राप्त हो चुके हैं एवं यह मामला अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यालय में खोज करने पर संबंधित संचिका का पता नहीं चल सका एवं इन कर्मियों द्वारा दिये गये प्रभार सूची में भी उक्त संचिका का कोई जिक्र नहीं है।यह मामला कार्य में लापरवाही को प्रदर्शित करता है।नोटिश में निर्देश दिया गया है कि पत्र प्राप्ति के 24 घंटों के भीतर कार्यालय को सोलर लाईट क्रय में अनियमितता बरतने से संबंधित संचिका कार्यालय को उपलब्ध करावें। अन्यथा विलंब की सारी जबाबदेही संबंधित कर्मी की होगी तथा राज्य सूचना आयोग द्वारा निर्धारित दण्ड भी इन सभी कर्मियों से वसूलनीय होगी।
क्या है मामला
जिले के पंचायतों में सोलर लाईट खरीदने में हुई विगत वर्षों में जमकर गड़बड़ी की गयी।इसमें कुछ पंचायतों ने बिना निविदा जारी किये ही लाईट खरीद लिया।किसी ने जुगाड़ तकनीक से बने लाईट की खरीद कर लिया। कुछ पंचायतों ने बिना लाईट लगाये राशि की निकासी कर लिया।गुणवत्ता एवं कीमत पर समझौता किया गया। इन गड़बड़ियों का अन्वेषन करने के उद्येश्य से सूचना अधिकार कार्यकर्ता शैलेन्द्र सिंह तरकर ने खगड़िया जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी से वर्ष 2012 में सूचना मांगा था। ससमय सूचना नहीं मिलने पर यह मामला राज्य सूचना आयोग में वाद संख्या 83534/12-13 में सुनवाई के लिये चला गया।इस मामले में हुई कार्रवाई के संबंध में जानकारी मांगने पर आवेदक को सूचना उपलब्ध कराने के लिये यह कवायद की जा रही है।
कई बार हुआ पत्राचार
इस बारे में जानकारी को उपलब्ध कराने के लिये खगड़िया जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सह उप विकास आयुक्त द्वारा अब तक आधा दर्जन बार पत्राचार किया गया है। लेकिन डी डी सी के पत्र पर भी कोई उत्तर नहीं दिया गया।डी डी सी कार्यालय से प्रखंड को अबतक पत्रांक 247 दिनांक 29 मार्च 16, पत्रांक 312 दिनांक 06 मई 16,पत्रांक 326 दिनांक  16 मई 16,पत्रांक 333 दिनांक 25 मई 16 तथा पत्रांक 363 दिनांक 06 जून 16 के द्वारा कार्रवाई का ब्योरा मांगा गया है।
सितंबर में होगी सुनवाई
इस मामले के आवेदक शैलेन्द्र सिंह तरकर ने बताया कि राज्य सूचना आयोग में 03 जून को सुनवाई की गयी जिसमें लोक सूचना पदाधिकारी सह उप विकास आयुक्त खगड़िया के द्वारा पंचायत चुनाव में व्यस्त रहने का कारण बताकर अनुपस्थित रहे। इस मामले की अगली सुनवाई अब सितंबर माह में निर्धारित की गयी है। आवेदन ने बताया कि प्रशासन सरकारी राशि के लूट के इस पूरे खेल पर जान बूझकर आँखें मूंद रही है। लेकिन राज्य सूचना आयोग की सख्ती के बाद धीरे धीरे मामला परत दर पर खुल रहा है।भ्रष्टाचार के विरुद्ध इस लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाये बिना दम लेने का सवाल ही नहीं है।
क्यों नहीं होती कार्रवाई
पंचायत सचिवों की कम संख्या होने के कारण इन मामलों में प्रशासन द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं हो सकती है।जिले में कुल 129 पंचायतें हैं जिसमें मात्र 70 पंचायत सचिव कार्यरत हैं।यही कारण है कि जिला प्रशासन से लेकर प्रखंड प्रशासन तक इस मामले में कार्रवाई करने से बचने की कोशिश करता है।इसके अलावा पंचायत सचिवों का संगठन हमेशा जिला प्रशासन पर इस एवं ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं करने का दबाब बनाये रखता है।इसके अलावा सोलर लाईट समेत ऐसे तमाम मामलों में पंचायत सचिवों ने पहले ही सभी संबंधित पदाधिकारियों को उनका ‘हिस्सा’ उपलब्ध करा दिया था।फिर एक मुर्गी को कोई कितनी बार हलाल करेगा।