रोजाना मौत का सफ़र – मुंह से निकलता है “मझधार में है नैया,पार करो हे गंगा मैया”

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इसी तरह प्रति दिन आर पार करते है यात्रि
खगड़िया/भागलपुर (मुकेश कुमार मिश्र ) : खगड़िया जिला के परबत्ता प्रखंड के दक्षिणी छोर पर स्थित अगुवानी घाट पर विगत दो सप्ताह से गंगा नदी का जलस्तर बढने का सिलसिला तेज हो गया है।इसके साथ ही अगुवानी घाट से सुलतानगंज के लिये नाव परिचालन पर खतरे का बादल भी मंडराने लगा है।विगत दो सप्ताह से जलस्तर में प्रतिदिन बढोतरी होने से गंगा के पार जाने वालों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।कभी घुटने तक पानी में नाव से उतरना पड़ता है।कभी कमर भर पानी में नाव पर चढना पड़ता है।
भगवान भरोसे गंगा पार करते हैं यात्री
नहीं रहता है सुरक्षा की व्यवस्था
अगुवानी सुलतानगंज घाट के बीच परिचालित नाव में वैकल्पिक सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं होती है।किसी तरह की दुर्घटना की स्थिति में सवारों को भगवान का ही आसरा होता है। जबकि इस घाट के संचालकों को इससे लाखों रुपये महीने की कमाई होती है।खासकर सावन भादो के महीने में बाबाधाम देवघर जाने वाले काँवरिये प्रतिदिन हजारों की संख्या में गंगा पार करते हैं। जानकारों का कहना है कि कम से कम सभी नावों में ट्यूब में हवा भर कर आपात स्थिति के लिये रखा जाना चाहिये।
श्रावणी मेला में भी नहीं हुई स्टीमर की व्यवस्था  
जुगाड़ तकनीक से बनी हैं नाव
दो दशक पूर्व अगुवानी घाट में कोयले या डीजल से चलने वाले छोटे स्टीमर तथा जहाज का परिचालन किया जाता था।किन्तु विगत कुछ वर्षों से मानव श्रम से संचालित सामान्य नाव में जुगाड़ तकनीक से डीजल चालित इंजन लगाकर काम चलाया जा रहा है।ये नाव बिना किसी तकनीकी ज्ञान के असेंम्बल कर बनाया जाता है जो परिचालन के समय होने वाले इंजन के वाईव्रेशन से दिन प्रति दिन कमजोर होता जाता है।
डी एम के आदेश की हो रही अनदेखी
नावों पर होती है ओवर लोडिंग
अगुवानी घाट से सुलतानगंज के बीच चलने वाली नावों पर खुलेआम ओवर लोडिंग होती है।किसी भी नाव की क्षमता का आकलन किये बगैर उसे अनुमान के आधार पर पूरी तरह भरने तक यात्रियों को बिठाया जाता है।राज्य सरकार के दिशा निर्देश के अनुसार यात्रियों को चढाने वाले सभी नावों की सुरक्षित लदान क्षमता को प्रदर्शित करने के लिये सफेद,पीली तथा लाल निशान लगाना है।लेकिन अगुवानी घाट से खुलने वाले नावों में इस निर्देश का पालन आरंभ नहीं हुआ है।
प्रशासन व ठेकेदार की है मिली भगत
सेतु के जाम रहने से बढी भीड़
भागलपुर के बरारी घाट और नौगछिया के बीच विक्रमशिला सेतु के बनने तथा चालू होने के बाद अगुवानी घाट से गंगा पार करने वालों की संख्या घट कर लगभग नगण्य हो गयी थी।लेकिन विगत कुछ वर्षों से विक्रमशिला सेतु पर अक्सर जाम रहने के कारण एक बार फिर से अगुवानी घाट में नाव परिचालन ने गति पकड़ लिया।

अगुवानी में चल रही है खतरे की नाव
डी एम ने लगाया है रोक
भागलपुर के डी एम ने गंगा के जलस्तर में बढोतरी होने के साथ ही सुलतानगंज अगुवानी घाट के बीच नाव परिचालन पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया है।जिला पदाधिकारी ने भागलपुर के जिला परिवहन पदाधिकारी तथा एस डी ओ व एस डी पी ओ को इस आदेश का अनुपालन कराने का निर्देश जारी किया है।यह आदेश जनहित तथा सुरक्षा को ध्यान में रखकर दिया गया है।इस आदेश से खगड़िया के जिला पदाधिकारी को भी अवगत करा दिया गया है।

   प्रति दिन आर पार करने वाले यात्रियों की मुख से निकलती हैं    
श्रावणी मेला को लेकर है चिंता
इस महीने के 20 तारीख से विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला आरंभ होने वाला है।इसको लेकर प्रशासनिक तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।लेकिन अगुवानी सुलतानगंज घाट के बीच नाव परिचालन पर रोक लगाने के भागलपुर डी एम के आदेश को लागू कराने के लिये न तो सुलतानगंज के प्रशासन व पुलिस को कोई फिक्र है,न ही खगड़िया के जिला प्रशासन व पुलिस को।
“मझधार में हैं नैया पार करो हैं गंगा मैया”
जरुरी है स्टीमर की व्यवस्था
अगुवानी घाट पर जरुरत है कि कम से कम श्रावणी मेला के दौरान स्टीमर की व्यवस्था की जाय।इस बारे में अभी घाट के संचालकों का यह तर्क भी नहीं चलेगा कि गंगा का जलस्तर कम रहने के कारण स्टीमर नहीं चलाया जा सकता है।क्योंकि गंगा के जलस्तर में काफी वृद्धि हुई है।इसके अलावा उन्हें इस शर्त पर घाट का संचालन करने के लिये दिया गया है कि वे स्टीमर की व्यवस्था करेंगे।