कोसी के रहमो-करम पर जीने को विवश है लोग !

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घांस लेकर नाव से आते पशुपालक

मधेपुरा (संजय कुमार सुमन) :कोसी नदी के रहमो करम पर चौसा प्रखंड की आधी आबादी जीने को विवश है |बाढ़ एवं समुचित सड़क व्यवस्था नहीं होने के कारण इन गांवों में पहुंचना टेढ़ी खीर है। नतीजतन छह माह तक इन गांवों से बेटियों की डोली तक नहीं उठती है। गांवों में शादी विवाह पर पूर्णतःब्रेक लग जाता है। यह स्थिति यहां की कोई नई नहीं है। यह स्थिति वर्षो से है। बरसात के दिनों में यहां के लोग या तो चचरी के सहारे या फिर नाव के सहारे ही जीते हैं। इन गांवों में मानसून की आहट के बाद से ही आवागमन की समस्या उत्पन्न हो जाती है। कोसी नदी के उफान पर आते ही चौसा प्रखंड के कई गांव टापू का रूप धारण कर लेता है। और तो और गंभीर रूप से बीमार परिजनों को भी अस्पताल पहुचाना लोगों के लिए किसी मुसीबत से कम नही है। आम तौर पर मई से लेकर जुलाई माह तक लग्न का मुख्य समय होता है। इन दिनों वृहत पैमाने पर शादी विवाह जैसे समारोह का आयोजन किया जाता है। लेकिन आवागमन की समस्या से त्रस्त इन क्षेत्रों में मई के बाद शादी-विवाह पर पूरी तरह ब्रेक लग जाता है। आवागमन की समस्या के कारण लड़का पक्ष द्वारा इस समय सीधे तौर पर शादी से इंकार कर देते हैं। जबकि बेटी पक्ष भी कोई संकट मोल लेना नहीं चाहता है।

आवागमन की समस्या को लेकर सबसे अधिक परेशानी मोरसंडा पंचायत के मोरसंडा,अमनी,महादलित टोला करेलिया मुसहरी,श्रीपुर बासा,परवत्ता,सिढ़ो बासा,फुलौत पूर्वी पंचायत के करेल बासा,अनूपनगर नयाटोला,पिहोड़ा बासा,बड़ी खाल,बड़बिग्घी,फुलौत पश्चिमी पंचायत के झंडापुर बासा,पनदही बासा,घसकपुर,सपनी मुसहरी गांव की है।