सेवानिवृति के तीस वर्ष बाद भी ले रहे हैं पेंशन,पुत्र भी हो चुका है सेवानिवृत !

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सेवानिवृत पिता -पुत्र

खगडिया (मुकेश कुमार मिश्र) : सेवानिवृति को आमतौर पर सक्रिय जीवन का अंत माना जाता है |जी हम बात कर रहे है | असरगंज के डाक विभाग के डाक कर्मी पद से सेवानिवृत्ति तीर्थ नारायण मिश्रा की जो लगातार करीब 30 वर्षो से पेंशन प्राप्त कर रहे है |
चर्चा में है सेवानिवृत पिता पुत्र की जोड़ी 

बिशौनी निवासी तीर्थ नारायण मिश्र ने डाक विभाग में 1945 में मात्र 16 वर्ष की उम्र में डाकिया के रुप में संयुक्त बिहार के धनबाद में नौकरी आरंभ किया और वे 1987 में असरगंज से सेवानिवृत हुए।उस जमाने में नौकरी आरंभ करने की न्यूनतम आयु निर्धारित नहीं थी।मात्र 40 रुपये वेतन से अपनी सेवा शुरु करने वाले मिश्र 1083 रुपये वेतन पर सेवानिवृत हुए।जबकि अभी वे पेंशन के रुप में लगभग 10 हजार रुपये प्राप्त कर रहे हैं।अब वे विगत 29 वर्षों से पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।

 पिता पुत्र दोनों हुए सेवानिवृत

31 जनवरी 15 को सेन्ट्रल बैंक के क्षेत्रीय सहायक प्रबंधक पद (पटना)  से सेवानिवृत्त हो चुके है उनके पुत्र मनोज मिश्रा |लेकिन पुत्र के सेवानिवृति पर पूर्व से सेवानिवृत पिता की सामाजिक सक्रियता प्रखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है।परवत्ता प्रखंड के लगार पंचायत अंतर्गत बिशौनी गांव निवासी सेवानिवृत डाक कर्मी तीर्थ नारायण मिश्रा को डाक विभाग से सेवानिवृत हुए लगभग तीस साल बीत चुके हैं। लेकिन वे लगातार सामाजिक जीवन में सक्रिय हैं।

रिटायरमेंट के पच्चीसवें वर्ष में सम्मानित हुए डाक कर्मी ,  

यहाँ तक कि डाक विभाग ने श्री मिश्र को सेवानिवृति के बाद एक बार फिर से सम्मानित भी किया है।यह सम्मान उन्हें 25 वर्ष से अधिक समय तक पेंशन प्राप्त करने के अवसर पर किया गया है।इस सम्मान में डाक विभाग के बेगूसराय प्रमंडल ने छड़ी,अंगवस्त्रम् तथा नगद राशि दिया गया।
भरा पूरा  परिवार 
सेवानिवृत्त डाक कर्मी के  सात पुत्र है। प्रथम पुत्र मनोज कुमार मिश्र सेवानिवृत्त हुए हैं। ओर पांच: पुत्र प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के उॅचे पद पर कार्यरत हैं। एवं एक पुत्र कृषि के क्षेत्र में सब्जी उत्पादन में एक अलग पहचान बनाने में लगे हुए हैं।अपने गांव में दर्जनों नौजवानों को बेंगलुरु,हैदराबाद,चेन्नई ,दिल्ली में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में नौकरी दिला चुके हैं। समाजिक,धार्मिक कार्यों में यह परिवार अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं। सेवानिवृत्त पिता पुत्र की जोड़ी जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
शाकाहार के फायदे का उदाहरण
तीर्थ नारायण मिश्र तथा उनका पूरा परिवार शाकाहारी है।इस उम्र में भी सक्रिय सामाजिक जीवन जीने वाले मिश्र कहते हैं कि वे एवं उनका परिवार शाकाहारी होने के फायदों का जीता जागता उदाहरण है।ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर प्रशंसा होती है।
सेवा में बदलाव के रहे साक्षी
तीर्थ नारायण मिश्र डाक सेवा में आमूल बदलाव के साक्षी रहे हैं।ग्रामीणों को अपना अनुभव सुनाते हुए बताते हैं कि 1950 के दशक में जब वे किसी के घर पर डाक लेकर जाते थे तो वहाँ उनका अतिथियों की तरह होता था।डाक प्राप्त करने वाले अपने घरों में कई दिन उन्हें रोक कर उनका आव भगत करते थे।
ग्रामीणों में है खुशी
बिशौनी के ग्रामीणों में इस बात के लिये प्रसन्नता का भाव है कि पुत्र के सेवानिवृति के समय पिता भी स्वस्थ एवं सक्रिय हैं।ग्रामीण एवं पूर्व मुखिया सत्य नारायण मिश्र,अविनाश मिश्र, हेमेन्द्र झा,विद्यापति झा,धीरेन्द्र मिश्रा,कर्ण किशोर मिश्र आदि ने उनके स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन की शुभकामनाएँ दिया है।