इस पुल से गुजरना किसी हॉलीवुड फिल्म के स्टंट से कम नही !

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रिटायर रेलिंग विहीन पुल से सफर करते लोग (तस्वीर-सुधीर)

सहरसा (कुणाल किशोर) : सहरसा-खगड़िया सीमा पर अवस्थित माँ कात्यानी मंदिर ही नही बल्कि 50 हजार के आबादी जाने के लिए आपको एक ऐसे पुल से होकर गुजरना पर सकता है जिस पुल को देख आपकी रुहें कॉप जाएगी |खास कर बरसात के समय तो इस पुल को पार करना तो दूर आप पार करने का सोच भी नही सकते | जी है हम बात कर रहे है रेलवे के रिटायर पुल संख्या 50 की |

इस तरह गुजरते है पुल से (फोटो-फाइल)
इस तरह गुजरते है पुल से (फोटो-फाइल)

अंग्रजी फिल्मों के स्टंट से कम नही 

यह पुल रेलवे की पुरानी और रिटायर पुल है |इस रेलिंग विहीन पुल को पार करना किसी अंग्रेजी फिल्मों में दिखाए जाने वाले स्टंट जैसा है| इस पुल से गुजरना फरकिया वासियों की मजबूरी है जी हां यह रिटायर पुल सहरसा-मानसी रेलखंड के धमारा घाट रेलवे स्टेशन से करीब आधे किलोमीटर दूर बलखाती कोसी की उप धारा पर वर्षो पूर्व रिटायर पुल है |

एक मात्र आवागमन का साधन

रेलिंग विहीन रिटायर पुल माँ कात्यानी मंदिर जाने का ही एक मात्र रास्ता नही है बल्कि इस पुल से फरकिया के चार पंचायत सरसवा,बुच्चा,रोहियार,ठुथी मोहनपुर सहित सलखुआ प्रखंड के सिंघरशामा पंचायत के लगभग 50 हजार की आबादी के आवागमन का एक मात्र साधन है |

सडक विहीन क्षेत्र में रेल ही एक मात्र सहारा

फाइल फोटो
         फाइल फोटो

उपरोक्त पंचायतों के आबादी के लोगों की लाइफलाइन सहरसा-मानसी के बीच चलने वाली ट्रेन ही है |अगर ट्रेन मिल गई तो राह आसान है नही तो फिर रेलवे की यह रिटायर पुल ही एक मात्र साधन है |

रेलिंग विहीन पुल से गिरने से हो चुकी है मौत

वर्षो के आकड़ों को छोड़ दे तो महज एक माह दे दौरान इस पुल से गिरने से 2 की मौत हो चुकी है और दर्जन से अधिक लोग घायल हो चुके है |इस पुल से 27 जून को सहरसा के बनमा इटहरी निवासी मनोज यादव का पुत्र पप्पू कुमार मोटरसाईंकिल सहित पुल से नदी में गिर गया था जिसे आस-पास के लोगों ने बचा तो लिया |वही 24 जून को सहरसा के रघुनाथ नामक युवक पुल से नदी में गिरकर घायल हो गया था जिसकी मौत बाद में इलाज के दौरान हो गयी |इसी तरह मानसी के बलहा बाज़ार में दुकान करने वाले शम्भू साह की भी पुल से गिरकर इलाज के दौरान मौत हो चुकी है |

कात्यानी शक्तिपीठ मंदिर
कात्यानी शक्तिपीठ मंदिर

बैरागन के दिन उमड़ती है भीड़

माँ कात्यानी मंदिर में बैरागन के दिन सोमबार और शुक्रवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने कोसी-सिमांचल सहित अन्य जिलों से ट्रेन से आए तो ठीक है नही तो इसी पुल को पार कर मंदिर पहुचते है |बैरागन के दिन इस पुल को पार करना और भी खतरनाक बन जाता है क्योकि इस दिन काफी भीड़ रहने के कारन लोगों का आना-जाना लगा रहता है | बच्चे,बूढ़े,महिलाए,मोटरसाइकल सब का एक ही साधन मात्र यह रिटायर पुल ही होता है |

धमारा घाट पर राज्यरानी हादसा (फाइल फोटो)
धमारा घाट पर राज्यरानी हादसा (फाइल फोटो)

19 अगस्त 2013 हो चूका है दर्दनाक हादसा

इस तारीख को धमारा घाट रेलवे स्टेशन देश-दुनिया के पटल पर अचानक सुर्खियों में आया था इसी दिन सहरसा से चलने वाली राज्य्रानी ट्रेन की चपेट में आने से माँ कात्यानी मंदिर जा रहे 28 लोगों की जान चली गयी थी |इस हादसे ने बिहार के सत्ता के गलियारे से लेकर देश के संसद तक कोहराम मचा| स्थानीय स्तर पर धरना-प्रदर्शन भूख हड़ताल तक हुआ था |

वादों में सिमट रह गयी घोषणा

राज्य सरकार ने इस घटना के बाद बदला से कोपरिया तक सडक निर्माण की बात कही थी तो रेलवे ने पैदल ब्रिज बनाने की बात की | हादसे के करीब 3 वर्ष गुजरने के बाद भी अबतक ना तो सड़क निर्माण हो सका है ना ही ब्रिज का निर्माण पूर्ण |

खैर जो भी हो फरकिया के लोगों के जीवन शैली में नाव,ट्रेन और रेलवे की यह रिटायर पुल रोजमर्रा की चीज बन गयी है |

(चौथम खगड़िया के सुधीर कुमार शर्मा से मिले इनपुट के आधार पर )