प्रशासनिक उदासीनता का शिकार विजय घाट बाबा विशु राउत पुल !

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अर्धनिर्मित सड़क

मधेपुरा (संजय कुमार सुमन) : उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ने वाली चौसा नवगछिया पथ पर अब चलना दूभर हो गया है। बारिश होने से आवागमन बाधित हो गया है। मधेपुरा एवं भागलपुर जिला के अधिकारियों की उपेक्षा पूर्ण रवैये के कारण निर्मार्णाधीन सड़क को अब तक भू-स्वामी से मुक्त नहीं कराया जा सका है। कोसी नदी के विजय घाट पर बाबा विशु राउत पुल बन जाने से क्षेत्र में विकास का नया द्वार खूल गया है। कई मायनों में इस अति महत्वपूर्ण पुल ने दशकों से कोसी की पीड़ा झेल रहे लोगों की जिदंगी में एक नया सवेरा ला दिया है। 15 मई 2015 को मुख्यमंत्री नीतिश कुमार द्वारा पुल का उदघाटन किये जाने से उत्तर बिहार से दक्षिण बिहार का एकीकरण ही नहीं हुआ बल्कि कोसी के सैकड़ों गावों एवं लाखों लोगों की जिदंगी बदल दिया है। लेकिन अब तक सड़क निर्माण का कार्य पूरा नहीं होने से जहां सरकार को करोड़ो रूपये का चूना लग रहा है वहीं हल्की बारिश में भी आवागमन बंद हो जाता है।

अर्धनिर्मित सड़क
अर्धनिर्मित सड़क

किसानों को क्या है फायदाः-

देश की आजादी के 68 वर्षो बाद भी स्वयं को कोसी में कैद एवं कुंठित महसूस कर रहे लोगों को न सिर्फ आवागमन की सुविधा मिली बल्कि इस पुल के कारण उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव हुआ,यह निश्चित है। इससे पूर्व कोसी की मचलती धाराएं उनके विकास में बाधक बनी हुई थी। मधेपुरा,भागलपुर एवं खगड़िया जिला सीमावर्ती का भू भाग साल में छह माह तक बाढ़ से तबाह रहता है,फिर कटाव की समस्या बनी रहती है। बाढ़ में फसलों का डूबना लगा रहता है। यातायात के लिए सिर्फ नाव का सहारा होता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। यहां के लोगों का आर्थिक जीवन पुल से प्रभावित होगा। अब उन्हें बाजार मिल गया है। किसानों को अपने कृषि उत्पादों को बेचने के लिए बिचैलियों पर निर्भर रहने की विवशता खत्म हो गयी है। इस क्षेत्र में मक्का,दलहन,मछली एवं दूध का अच्छा उत्पादन होता है। विजय घाट में पुल बनने के साथ ही दशकों से विकास के लिए लालायित पिछड़े क्षेत्र में तरक्की का नया नजरिया दिखने लगा है। आवागमन के अभाव में अधिकांश मकई गुलाबबाग मंडी पहुंच जाती है। इससे मकई उत्पादकों को उचित लाभ नहीं मिल पाता है। अब यहां के किसान भागलपुर मंडी जाकर अपनी उपज सहूलियत के साथ बेच पा रहे हैं। चौसा प्रखंड समेत सीमावर्ती क्षेत्रों में दुध उत्त्पादन भी बड़े पैमाने पर होता है। यहां से देशी घी बड़ी मात्रा में बाहर भी भेजा जाता है लेकिन दूघ उत्पादकों को सही दाम नहीं मिल पाता है। भागलपुर की मंडी से सीधे-सीधे जुड़ जाने से किसानों और दूध उत्पादकों को बेहतर दाम मिल रहा है।

कई शहरों की हुई दूरी कमः-

उद्घाटन से पूर्व की तस्वीर (फाइल)
उद्घाटन से पूर्व की तस्वीर (फाइल)

विजय घाट पुल से आधारभूत संरचनाओं के विकास के साथ-साथ आवागमन सुलभ हुआ। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अति महत्वाकांक्षी इस परियोजना के पूरा होने से कोसी के गर्भ में अवस्थित लाखों की आबादी का जीवन स्तर में बदलाव आने के साथ ही उत्तर बिहार के मधेपुरा,सहरसा एवं सुपौल जिला का भागलपुर और दक्षिण बिहार के अनेक जिले और उड़ीसा प्रांत की दूरी कम हो गई। मधेपुरा से भागलपुर की दूरी अभी डुमरी पुल से 136,सहरसा से 130 एवं सुपौल से 175 किलोमीटर है। इस पुल से मधेपुरा की दूरी 51,सहरसा की दूरी 25 एवं सुपौल की दूरी 25 किलोमीटर कम होने से आवागमन का रास्ता सुलभ हुआ।

कहां फंसा है पेंचः-

कोसी,सीमांचल एवं पूर्व बिहार को जोड़ने वाली बाबा विशु राउत पुल का उद्घाटन भले ही 15 मई 2015 को मुख्यमंत्री नीतिश कुमार द्वारा कर दिया गया लेकिन इसके पहुंच पथ के निर्माण में अब भी पेंच फसा हुआ है। स्थानीय किसान अपनी जमीन का मुआवजा वासडीह के समतुल्य मांग रहे है। लिहाजा भुगतान होने तक काम बंद रखा है। भटगामा के कृषक अमरेन्द्र कहते हैं कि भू अर्जन अधिकारियों ने जमीन की जांच पड़ताल एवं राशि का भुगतान मनमाने तरीके से किया है। मामला खुद अधिकारियों ने फसा दिया है। कई लोगों को कृषि की जमीन पर ही वासडीह का भुगतान कर दिया है और जिसका वासडीह है उसे कृषि समतुल्य की राशि का भुगतान किया गया है। मेरी जमीन वासडीह का है और राशि कृषि का मिला है। इसके अलावे भागलपुर जिले के कदवा प्रतापनगर एवं बोरवा टोला में दर्जनों लोगों ने उचित मुआवजा की मांग को लेकर सड़क का निर्माण कार्य रोक दिया है। राज्य सरकार द्वारा समय पर जमीन हस्तांरित नही करा पाने के कारण सड़क निर्माण का कार्य ठीक तरीके से नही हो पा रहा है।
क्या कहते हैं पुल निगम के अधिकारीः

विजय घाट पुल
विजय घाट पुल

12 किलोमीटर लंबाई में फोरलेन पहुंच पथ का निर्माण किया जाना है। पुल निर्माण का कार्य राज्य सरकार की इकाई बिहार राज्य पुल निर्माण निगम द्वारा एसपी सिंघला प्राइवेट लिमिटेड द्वारा युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। बिहार राज्य पुल निगम के परामर्शी कामेश्वर प्रसाद,पुल निर्माण कंपनी के डीपीएम अभय सिंह बताते हैं कि भटगामा में एक स्थान पर और भागलपुर में दो स्थान पर सड़क का निर्माण कार्य बंद है। यदि ग्रामीणों का यही रवैया रहा तो हम लोग स्वंय सड़क निर्माण कार्य को बंद कर देंगे। उन्होनें कहा कि जहां तक सड़क निर्माण में कोई बाधा नहीं है वहां तक सड़क का निर्माण कार्य पूर्ण कर दिया जाएगा।
क्या कहते हैं स्थानीय ग्रामीणः-

फुलौत के शिवेन्द्र प्रसाद मोदी,ओमप्रकाश शर्मा,चौसा के मनौवर आलम,जवाहर चैधरी,बिपीन पासवान,लौआलगान के मनौवर हुसैन,शंभू प्रसाद यादव कहते हैं कि मुख्यमंत्री ने आनन फानन में पुल का तो उदघाटन कर दिया गया लेकिन सड़क का कार्य अब तक नहीं हो पाया है। हल्की बारिश में भी सड़क बंद हो जाता है। सड़क का निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद ही पुल का उदघाटन किया जाना चाहिए था। सड़क पूर्ण नहीं होने से जहां सरकार को करोड़ो रूपये के राजस्व की हानि हो रही है वहीं लोेगो को अब तक आवागमन सुलभ नहीं हो पाया है।