कोसी के तीनों जिले में जिप अध्यक्ष पद पर महिला काबिज !

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सहरसा (कुणाल किशोर) : कोसी प्रमंडल के तीनों जिले सहरसा, सुपौल और मधेपुरा में जिला पर्षद अध्यक्ष की कुर्सी पर महिला काबिज हुई है। इसमें दो मधेपुरा सहरसा महिलाओं के लिये आरिक्षत जबकि सुपौल अनारिक्षत सामान्य सीट था। इसे आधी आबादी में सामान्य भागीदारी के प्रति बढ़ती जिज्ञासा कहिये या आरक्षण का फायदा। सहरसा में जिला पर्षद अध्यक्ष की कुर्सी पर अड़हुल देवी, सुपौल में रंजू देवी और मधेपुरा में मंजू देवी काबिज हुई। इसके पूर्व मधेपुरा सुपौल में जिला पर्षद अध्यक्ष की कुर्सी पर भी महिला ही काबिज थी। सिर्फ सहरसा में महिला का कब्ज़ा नहीं था।

अड़हुल देवी
अड़हुल देवी
मंजू देवी
मंजू देवी

हालांकि लोगों का मानना है कि अगर महिला अध्यक्ष को स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाये तो पुरुष अध्यक्ष की तुलना में राजनीति कम और विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाता है। मगर ऐसा होता नहीं है। अमूमन जिम्मेदार पद पर आसीन होने वाली महिलाओं का सारा कमान उसके या तो पति अथवा करीबी रिश्तेदार के हाथों में होता है। जिप अध्यक्ष के चुनाव होते ही तीनों जिलों में समीकरण का दौर भी शुरू हो गया फलां अध्यक्ष फलां गुट के।

रंजू देवी
रंजू देवी

जानकारों का मानना है कि सुपौल जिला पर्षद अध्यक्ष रंजू देवी का एक विधायक द्वारा विरोध करने के ऐवज में जदयू का समर्थन मिला। सहरसा में जिप अध्यक्ष को निर्विवाद रूप से जदयू के वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद और मौजुदा विधायक दिनेश चंद्र यादव का वरदहस्त प्राप्त था। मधेपुरा के जिप अध्यक्ष मंजू देवी को शुरू से सांसद पप्पू यादव समर्थक माना जाता है क्योंकि मंजू देवी के पुत्र श्वेत कमल उर्फ बौवा सांसद के करीबी माने जाते है। इतना ही नहीं गत विधानसभा चुनाव में श्वेत कमल बिहारीगंज विधानसभा से पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी के टिकट पर चुनाव भी लड़े थे। इसके बावजूद यह आम चर्चा है की मंजू देवी की प्रतिद्वंदी रही प्रत्याशी को भी सांसद का समर्थन प्राप्त था। मगर सांसद के करीबी इसे सिर्फ बकवास करार देते है।

राजनितिक जानकारों का मानना है की जिस तरह से सुपौल और मधेपुरा संसदीय सीट पर राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और रंजीता रंजन का कब्ज़ा है उस हैसियत से इनके समर्थक जिला पर्षद सीट जितने में सफल नहीं हो सके। जिसका नतीजा रहा कि जिप अध्यक्ष बनाने में किंगमेकर की भूमिका निभाने के सुनहरा मौका से वंचित रहना पड़ा।