हौसले के सामने गरीबी ने टेंके घुटने,हारी मुफलिसी,जीती लगन !

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दीक्षांत समारोह में प्रशस्ति पत्र लेती रूपलता

मधेपुरा (संजय कुमार सुमन) : कौन कहता है की आसमान में सुराख नहीं हो सकता,एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों ।हौसला और जुनून हो तो पहाड़ खोदकर भी दूध की दरिया बहाई जा सकती है ।गरीबी और मुफलिसी की कोख से जन्मी रूपलता ने अपने हौसले से बेशक एक इतिहास गढ़ा है ।पुर्णिया जिले के कस्बा प्रखण्ड के गुदरी बाजार में अत्यंत साधारण परिवार मैं पैदा हुयी रूपलता बचपन से ही असीम प्रतिभा की धनी थी ।कहते हैं की पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते हैं ।लेकिन दुर्भाग्य रूपलता के साथ लगा था ।असमय पिता दुल्ली चंद्र साह की मौत हो गयी ।रूपलता पिता को खोने के बाद भी जीवन में कुछ करना चाहती थी ।लेकिन उसका साहस जबाब दे रहा था ।लेकिन इस नाजुक घड़ी में राखी की लाज रखने बड़ा भाई विक्रम कुमार साह सामने आया और बहन की हिम्मत बढ़ाई ।WhatsApp-Image-20160701 (4)

विक्रम ने मजदूरी करके अपनी बहन को पढ़ाना शुरू क्या ।पहले तो रूपलता ने मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की फिर इंटर,बीए और एमए भी प्रथम श्रेणी से पास किया ।रूपलता की लगन,मेहनत और उसके समर्पण के आगे उसकी गरीबी ने घुटने टेंक दिए ।फाकामस्ती में भी शिक्षा का अलख जग सकता है,रूपलता ने यह साबित कर दिया ।जिस घर में रोज अंगीठी नहीं जलती थी,वहाँ शिक्षा का मशाल जल रहा है ।भाई का फर्ज निभाकर विक्रम ने भी एक मिशाल कायम की है । छोटे से एक कस्बे की यह सच्ची घटना पुरे देश के लिए ना केवल एक नजीर है बल्कि देश को एक बड़ा सन्देश भी दे रही है ।