हर साल बाढ़ इस इलाके की बड़ी आबादी को खानाबदोश बनाती रही और रहनुमा बस इसके गवाह होते रहे !

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 पानी से घिरा गांव

चौसा/मधेपुरा (संजय कुमार सुमन) : कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही चौसा प्रखंड के कई पंचायतों का दर्द बढ़ने लगा है। मोरसंडा और फुलौत के लिए बाढ़ सनातन दुख गाथा है। हर साल बाढ़ इस इलाके की बड़ी आबादी को खानाबदोश बनाती रही और रहनुमा बस इसके गवाह होते रहे। सड़क,बिजली,स्वास्थ्य एवं शिक्षा से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं से तो इलाके के लोग ना जाने कब से वंचित है। बाढ़ के दौरान प्रखंड को तो जाने दें,अधिकतर इलाकाई गांव का पंचायत मुख्यालय से भी तकरीबन छह माह के लिए संपर्क टूट जाता है।

अस्थायी शौचालय
अस्थायी शौचालय

साईकिल या नाव ही साधन है ….
मोरसंडा पंचायत के मोरसंडा,अमनी,महादलित टोला करेलिया मुसहरी,श्रीपुर बासा,परवत्ता,सिढ़ो बासा,फुलौत पूर्वी पंचायत के करेल बासा,अनूपनगर नयाटोला,पिहोड़ा बासा,बड़ी खाल,बड़बिग्घी,फुलौत पश्चिमी पंचायत के झंडापुर बासा,पनदही बासा,घसकपुर,सपनी मुसहरी गांव की सवारी आज भी साइकिल एवं नाव है। गांव में सड़क तो है ही नही। कच्ची सड़क पर साइकिल से या फिर पैदल चलना ही लोग ज्यादा मुनासिब समझते हैं। आवागमन सुविधा नही होने के कारण यह क्षेत्र अपराधियों का शरणस्थली भी है। पुलिस को भी यहां पहुचने में लोहे का चना चबाना पड़ता है। बाढ़ के दिनों में यहां की मुख्य सवारी नाव हो जाती है। बच्चों को नाव की सवारी कर विद्यालय जाना होता है। इस दौरान कई बच्चों की मौत पानी में डूब कर होती रही है। फिलहाल फुलौत बाजार जाने के लिए इन्हें चचरी का सहारा लेना पड़ता है। इनके सहारे ही इनका आवागमन बहाल होता है।

फाइल फोटो
फाइल फोटो

बाढ़ आने के साथ सबसे बड़ी समस्या पशुचारे एवं शौचालय की हो जाती है। पशुचारे को लेकर किसान चिंतित होने लगे हैं। कोसी नदी में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पशुपालक अपने मवेशी को लेकर ऊॅचे स्थान की ओर पलायन करने लगे हैं। दूसरी सबसे बड़ी समस्या इन गांव वालों की शौचालय की है। पानी बढ़ने के साथ ही लोग बांस बल्ले से बनी चचरी का शौचालय बनाकर प्रयोग करते हैं। शौचालय के दौरान भी कई लोगों की मौत अब तक हो चुकी है।

यहां के ग्रामीण वासुदेव शर्मा,पंकज कुमार,सुरेश मंडल,जवाहर चैधरी, प्रभाकर कुमार,बाबूलाल चैधरी,मुन्ना सहनी,कपिलदेव चैधरी,सत्यनारायण सहनी,बोहरू ऋषिदेव आदि का कहना है कि उन्हें हर किसी ने छला और अफसरों ने उपेक्षित किया। यदि किसी योजना से सड़क बनती भी है तो वह बनते-बनते या फिर कुछ ही दिनों में टूटकर बिखर जाती है। बिचैलियों के हावी होने एवं लूट संस्कृति के कारण कोई भी कार्य प्राक्कलन के मुताबिक  नही हो पाता।

कोशी के गर्भ में बसे इन ग्रामीणों के पास मेहनत करने के अलावा कोई उपाय नही हैं। यहां के लोगों के समक्ष समस्याएं अनेक है,लेकिन इसकी परवाह किसी को नही है। चिंता यदि है तो सिर्फ अपने बेटे और बेटियों की शिक्षा और शादी की। यहां कोई अपने बेटे और बेटियों को ब्याहना नहीं चाहते है। आज भी दुल्हन को पैदल ही अपने ससुराल जाना पड़ता है। बस यही एक शर्म महसूस होता है,यहां के लोगों को। शिकायत तो बहुत है पर करें तो किससे करें। गांव के लोगों के चेहरे पर पिछड़े क्षेत्र में रहने का मलाल तो साफ नजर आता है लेकिन जुबान खामोश रहती है। यहां के लोग इतने दर्द अपने अंदर समेटे हैं,जिसका थाह लगाना आम लोगों के वश की बात नही है।
बाढ़ आने की पूर्व तैयारीः– अंचल प्रशासन चैसा द्वारा बाढ़ आने के पूर्व प्रशासनिक व्यवस्था की तैयारी कर ली है। इसके लिए गोताखोर का चयन,पंचायत वार गन्यमान्य लोगों की सूची,नाव एवं नाविकों की सूची,खेज बचाव दल का गठन कर लिया गया है।

सीओ अजय कुमार
सीओ अजय कुमार

क्या कहते हैं पदाधिकारीः-कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन की पैनी नजर है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों पर व्यवस्था को लेकर हमलोग सर्तक हैं। अंचल में पर्याप्त नाव है। मार्ग अवरूद्ध होने पर नाव का परिचालन किया जायेगा। अंचल कार्यालय में 24 घंटे का नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है।
अजय कुमार -अंचल पदाधिकारी चौसा