सहरसा-मानसी रेलखंड के फनगो हाल्ट पर बाढ़ के पानी का खतरा मंडराना शुरू !

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इस तरह ट्रैक के करीब है नदी (फाइल फोटो)

सहरसा (ब्रजेश भारती) : पिछले कई दिनों से उत्तर बिहार में मानसुन के बारिश व नेपाल के कई इलाको मे हो रही मुसलाधार बारिश और हर रोज कोशी बैराज से बढ़ रहे डिस्चार्ज का असर पूर्व मध्य रेलवे के सहरसा-मानसी रेलखंड के फनगो हॉल्ट के निकट स्थित कटाव स्थल पर दिखने लगा है,समय रहते अगर रेल प्रशासन कि कुंभकर्णी निंद्रा नही टुटी तो बहुत जल्द इस रेलखंड पर रेल परिचालन पर असर देखने को मिल जाय तो कोई आश्चर्य नही होगा। इस बार पिछले साल के मुकाबले जुलाई और अगस्त जैसी स्थिति अभी ही दिखनी शुरू हो गई है। यात्रियों के बीच एक बार फिर से 2012 जैसी स्थिति फिर से होने का डर सताने लगा है।

फाइल फोटो
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समय से पहले रेल प्रशासन नही जागी तो इस रूट पर परिचालन हो सकती बाधित

फनगो हाल्ट के समीप जलस्तर मे जबरदस्त वृद्धि-

कटाव स्थल के निकट निवासी कर रहे ग्रामीणों के मुताबिक पिछले एक सप्ताह से पानी मे जबरदस्त बढ़ोत्तरी हुई है,ग्रामीणों के अनुसार पानी की स्थिति देख यह लग रहा है की यदि रेलवे द्वारा तुरंत बड़े पैमाने पर अभी इस ओर ध्यान नही दिया गया तो इस बार रेलखंड को बचाना असंभव हो जायेगा.वही सबसे ज्यादा पानी फनगो हॉल्ट के निकट के पास बढ़ा है।

ग्रामीणो ने बोल्डर का प्रयोग पर उठाया सवाल-

फनगो हॉल्ट के निकट बसे ग्रामीणों के मुताबिक इस रेलखंड पर कटाव नही रुक पाने की सबसे बड़ी वजह रेलवे की सुस्ती और कटाव रोकने के लिए अधिकृत कंस्ट्रक्शन कम्पनी ही है,ग्रामीण बताते है कि कम्पनी का बोल्डर गिराने का तरीका हमैशा गलत रहा है,ग्रामीणों के अनुसार जमीन के तल से बांस-बल्ला सेट कर बोल्डर लगाने के बजाय कंस्ट्रक्शन कम्पनी ऊपरी सतह पर बोल्डर लगा खानापूर्ति करती है और रेल से जुड़े अधिकारी उन्ही बोल्डरो को देख कर संतुष्ट हो जाते है।इन लोगों का कहना है कि अभी से ही नदी के किनारे से कार्य किया जैसे तो स्थित भयावह नही बन पायेगी।

फाइल फोटो
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कटाव और बचाव के नाम पर करोड़ों का होता खेल-

पूर्व मध्य रेलवे अंतर्गत सहरसा-मानसी रेलखंड के रेल ट्रैक के कटाव और बचाव का खेल इतिहास में सालो पुराना है। छोटी लाइन से लेकर बड़ी रेल लाइन यानि अभी तक प्रत्येक वर्ष इस कटाव को देखा है.हालाँकि, बड़ी लाइन के शुरुआत के साथ ही कटाव ने अपना रूप और विकराल कर लिया.पिछले चार सालो पर यदि गौर किया जाये तो हर साल कटाव रोकने के नाम पर बोल्डर क्रेटिंग का काम कटाव स्थल पर किया जाता है परन्तु आज भी करोड़ो रूपये के बोल्डर पानी मे बहने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है.जानकारों के मुताबिक कुछ कारणों के वजह से हमेशा कटाव को फायदे के तौर पर देखा गया और इसका समाधान निकालने के बजाय इसे पाला-पोशा गया.जानकर बताते है कि इस कटाव स्थल पर बाँध से लेकर पुल बनाने की बात हुई परन्तु वक्त की लम्बी खेप मे सब गम हो गई।

फाइल फोटो
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अगर परिचालन प्रभावित हुआ तो बड़ी आबादी होंगी प्रभावित-

जानकारों के मुताबिक यदि कटाव की रफ्तार ऐसे ही जारी रही और रेल द्वारा जल्द-से-जल्द बड़े पैमाने पर ध्यान नही दिया गया तो कोसी इलाके का राजधानी सहित अन्य जगहों से रेल सम्पर्क भंग हो जायेगा और लगभग नब्बे लाख लोगो से ज्यादा की आबादी इससे प्रभावित होंगी। इससे पहले कोशी के सहरसा जिले का सड़क सम्पर्क डुमरी पुल के अबतक नही बनने के कारणों पहले से ही कटा हुआ है। कटाव स्थल के आसपास के ग्रामीण बताते है कि अभी बारिश की शुरुआत मे ही ऐसी स्थिति डरा रही है जुलाई,अगस्त माह बाकी ही है।रेलवे जल्द-से-जल्द ध्यान दे।ग्रामीण कहते है कि जब तक पानी पटरी के पास नही आता है, तबतक रेल प्रशासन हरकत मे नही आती है।