भेड़ बकरी की तरह शौचालय मे करते है यात्रा,मजदुरो का प्रदेश पलायन बदस्तुर जारी !

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इस तरह सफ़र करते है यात्री

सहरसा (ब्रजेश भारती) : रेलमंत्री चाहे जो दावा यात्री सविधाओं को कर ले पर से सिर्फ बड़े लोगो के बीच सिमटकर रह गई है,गरीब यात्रीयो को से सब दावा मात्र दिवास्पन ही है। करीब मजदुरो किस कदर ट्रेन में यात्रा करते है इसकी बानगी देखना हो तो सहरसा मामला रेलखंड पर देखना को मिल सकती है ।चिलचिलाती गर्मी मे पेट की भूख किस तरह गरीबो पर भारी पड़ती है, इसका सीधा उदाहरण आपको पूर्व मध्य रेलवे अंतर्गत सहरसा-मानसी रेलखंड पर मिल जायेगा.जून की भीषण गर्मी मे शाम से लेकर रात, रात से लेकर सुबह और सुबह से लेकर ट्रेन आने तक हजारो की संख्या मे कोसी इलाके के विभिन्न जिलो से आये मजदूर अपने और अपने परिवार के पेट की आग को शांत करने के लिए किस तरह भेड़-बकरियों की तरह ट्रेन मे लद कर यात्रा करते है वह देखना ही इतना कष्टकारी है की उसके साथ यात्रा करने की लोग सोचते तक नहीं.ना वह दूसरे ग्रह से आये जीव है और ना भारत से बाहर के नागरिक तो फिर क्यों उन्हें इस आधुनिक भारत की ऐसी तंग यात्रा करनी पड़ती है ये विचारणीय प्रश्न है।

  • रेलमंत्री की यात्री सुविधाओं इस रेलखंड पर खोखला साबित13417418_276097492738857_2103283144091281417_nWhatsApp-Image-20160619 (3)

हाउसफुल जा रही है जनसेवा और जनसाधारण-

कोसी ईलाके से हर रोज हो रहे है पलायन का सिलसिला बदस्तूर जारी है.हालाँकि, रेलवे से लेकर जनप्रतिनिधि इस बात को लेकर आराम करने मे फिर से व्यस्त हो गये है की भीड़ कम गई परन्तु शुक्रवार को ठूस-ठूस कर गई जनसाधरण इस ओर इशारा कर रही है की ऑल इज नोट वेल.शुक्रवार को जनसाधारण मे विभिन्न जिलो के मजदूर दिखे, कुछ चुरा और दालमोट संग अपनी भूख मिटाते दिखे तो कुछ पीले से सुर्ख सफेद हो चुके सत्तू को शौचालय की पानी मिला अपना नाश्ता बनाते दिखे.नरपतगंज से आये सुरेश पासवान, उपेन्द्र, विनोद राम आदि कहते है कि दस तारीख से ही धान रोपनी शुरू है, जायेंगे तो कमायेंगे।

प्रत्येक वर्ष की यही कहानी-13417585_276097366072203_4014615495927252729_n

पिछले दो सप्ताह से कोसी क्षेत्र से मजदूरों का पलायन शुरू है.रोजगार की तलाश में दो सप्ताह के दौरान कोसी के विभिन्न इलाकों से लाखो मजूदरों का पलायन पंजाब सहित अन्य प्रांतो में हो चुका है.ये मजदूर सिर्फ इसी वर्ष नही अपितु हर वर्ष भेड़-बकरियों की तरह लद कर ट्रेन मे यात्रा करते है.इनकी यात्रा ऐसी होती है की ट्रेन में तिल रखने की भी जगह नहीं बचती है. बोगी सहित बाथरूम में बोरे की तरह ठुंसकर ये मजदूर यात्रा करते है.प्रतिदिन दस हजार से अधिक यात्री अन्य प्रांतों के लिए पलायन करते है. बाबजूद इसके हजारों यात्री ट्रेन पकड़ नहीं पाते है और वे सब स्टेशन पर छूट जाते है.ये मजदूर कोसी के अलावे पूर्णिया प्रमंडल के इलाकों से भी लोगों का हुजूम के हुजूम हर साल सहरसा स्टेशन पर जनसेवा पकड़ने पहुंचते है. ऐसे में पूरा प्लेटफार्म मजदूर यात्रियों से भरा पड़ा रहता है।

क्या कहना है मजदूरों का-13394128_276097539405519_8274337395034007484_n13445236_279712269044046_8624194055733334664_n

जनसाधरण से शौचालय मे बैठ कर पंजाब जा रहे सहरसा के रामपुर गांव निवासी ताराचंद राम, कमलेश आदि ने पूछने पर बताया कि क्या करे यही जिन्दगी है, यहां से दुगुना मजदूरी पंजाब में मिलता है इसलिए जाना जरूरी है. लुधियाना जा रहे इन मजदूरों ने बेहिचक कहा कि पंचायत चुनाव में गांव आए थे, अब धान रोपनी का सीजन आ गया अब फिर कमाने जा रहे है, वही से कमाकर ही दो बेटियों की शादी किये. बनमनखी के धीमा के रहनेवाले धर्मेन्द्र शर्मा, भूपेन्द्र शर्मा, सीताराम शर्मा ने कहा कि अभी धान रोपनी का समय है, दो महीना तक वहां फुर्सत नहीं मिलता है और कुछ कमायेंगे तब ना घर चलेंगा.वही मजदूरों से ये पूछे जाने पर की बिहार मे भी तो सरकार द्वारा कई कार्यक्रम चलाया जा रहा है उनका फायदा उठाये तो मजदूर मुस्कुराते हुए कहते है कि छोड़ो साहेब, क्यों मुंह खुलवाते हो.सब अपने कमाने मे व्यस्त है हमे नही कोई देखने वाला.