ग्लोवल वार्मिंग का दिख रहा असर !

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मधेपुरा /चौसा (संजय कुमार सुमन ) : ग्लोवल वार्मिंग के कारण मौसम में हो रहे बदलाव का असर अब चौसा क्षेत्र में भी दिखने लगा है। जानकार बताते हैं कि यहां मौसम में पिछले कुछ सालों में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। इसका प्रभाव धीरे -धीरे कृषि और अन्य क्षेत्रों में दृष्टिगोचर होने लगा है। चौसा समेत पूरा कोसी का इलाका अच्छे वर्षा के लिए जाना जाता था। लेकिन धीरे -धीरे वर्षा में कमी दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के मुताबिक यह चिंता कि बात है क्योंकि एक दो साल कि घटना नहीं है। आकंड़ों को देखे तो साल दर साल वर्षा में कमी आ रही है। 2014 में जहां 789.9 मिमी वर्षा हुई थी वहीं 2015 में 674 मिमी वर्षा हुई। हालांकि मौसम विभाग ने इस बार मानसून के बेहतर रहने और अच्छी बारिश का अनुमान लगाया है। लेकिन लोगों के मन एक बार फिर आशंका है कि इस बार क्या होगा। किसानों के ललाट पर अभी से चिंता की रेखा देखी जा सकती है। किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। मृदा से नमी गायब है इसलिए पिछली बार बोआई के पहले भी सिंचाई करनी पड़ी थी इस बार अगर वर्षा समय से और पर्याप्त नहीं हुई तो किसानों की कमर ही टूट जाएगी। इधर उमस और तेज धूप ने लोगों का जीवन बेहाल कर दिया है। पारा धीरे -धीरे बढ़ते – बढ़ते 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। जानकार के मुताबिक पहले इतनी गर्मी नहीं पड़ती थी। कृषि विभाग के मुताबिक वर्षा में होने वाली कमी और गर्म हवा का नतीजा है कि यहां कि मृदा से नमी गायब हो गयी है। कृषि अधिकारी बताते हैं कि पिछले दो साल से लगातार मानसून खराब होने के कारण परेशानी बढ़ गयी है। खेतों में हल का चलना मुश्किल हो गया है। जमीन इतनी सख्त है कि उसपर ट्रैक्टर से जोत करने में मुश्किल हो रही है। यह एक गंभीर समस्या है जो लगातार वर्षा का कम होना और गर्मी का नतीजा है। यह हालत केवल अकेले चौसा क्षेत्र का नहीं बल्कि कोसी के अन्य जिले का भी है। वर्षा कम होने से धीरे -धीरे जलस्तर भी काफी नीचे जा रहा है। जानकार इसे आने वाले वक्त में क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती मान रहे हैं।