देह मंडी में कब तक चलेगा दलालों का घिनौना खेल !

2930
रेड लाईट एरिया में बने मकान

सहरसा:देह की दुकान सजनी बंद है देह मंडी में पुलिस की छापेमारी के बाद यह बदनाम गली आज सुनसान और वीरान लग रहा है | तबले की थाप और घुंगरूओं का शोर थम सा गया है |

आखिर क्या हुआ 

एक बार फिर रेड लाईट एरिया सहरसा परिवर्तित नाम परिवर्तन नगर वार्ड संख्यां 26 में चकला मालिक बिनोद कुमार उर्फ कमरूल पिता रूपचन खलीफा के घर से देह धंधा करवाने के लिए सालों पूर्व बहला-फुसला कर लायी गयी तीन लड़कियों को सहरसा पुलिस की एक टीम ने एनजीओ के निशानदेही पर मुक्त कराने में सफलता हासिल की है। हालांकि रेड लाईट एरिया से मुक्त तीनों लड़कियों को अब तक किस रिमांड होम में भेजी जाएगी यह अभी फैसला नहीं हो सकी है।

IMG_20160615_133131

क्या स्थानीय थाना को इसकी जानकारी नही थी 

सदर थाना सहरसा से महज कुछ ही दूरी पर सहरसा-सुलिंदाबाद मुख्य मार्ग पर रेड लाईट एरिया अवस्थित है। सबसे खास बात यह है कि सदर थाना पुलिस की हर रोज की गश्ती ड्यूटी रेड लाईट एरिया के लिए दिन-रात होती है। गश्ती दल भी नये-पुराने लड़कियों को भी देखते हैं और आने-जाने वाले ग्राहकों को भी। लेकिन इनकी मंशा कभी वरीय पुलिस पदाधिकारियों को सूचना देना नहीं बल्कि दलाल, ग्राहक व चकला मालिक से नजराना वसूली तक ही रिश्ता बनी रहती है। यही वजह है कि साल दर साल रेड लाईट एरिया में देह धंधा का कारोबार फलता-फुलता गया और देश के विभिन्न कोने से कोई प्रेम के झांसे में तो कोई फिल्म बनाने तक का झांसा देकर बिनोद सरीखे दलालों के हाथ बेच दिया करता है।

कुछ माह पुर्व भी मुक्त करायी गयी थी मासुम बच्ची 

रेड लाइट एरिया से मुक्त अजमेरी खातून की बेटी पुलिस के साथ
रेड लाइट एरिया से मुक्त अजमेरी खातून की बेटी पुलिस के साथ (फोटो- फाईल)

हाल ही में इसी रेड लाईट एरिया के चकला मालिक किशोर व बिनोद के घर से कुसहा बाढ की विभिषिका के दौरान भटकी अजमेरी खातुन की बेटी को भी इन लोगों ने देह धंधा में उतारने के लिए पाल-पोस रहा था। लेकिन चकला मालिकों को क्या पता कि अजमेरी अपनी बेटी को ढूंढते हुए यहां भी पहूंच जाएगी। किसी तरह पुलिस के सहयोग से ही सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडल क्षेत्र के ग्राम प्रतापपुर बद्कुरवा वार्ड संख्या -3 निवासी अंजू उर्फ़ अजमेरी पिता मो. जाकिर अपनी बेटी को दलालों के चंगुल से मुक्त कराने में कामयाब रही। इस संबंधी भी सदर थाना कांड संख्या 39/15 दिनाक 21 जुलाई 2015 मामला भी सहरसा न्यायालय में लंबित है।काफी मशक्कत के बाद अजमेरी की बेटी को मुक्त कराया गया। जबकि कुसहा बाढ़ के दौरान खुद अजमेरी भी बिक चुकी थी। वे भी किसी तरह 15 जुलाई 2014 को खुद से भागने में सफल हुई थी। सवाल उठता है कि रेड लाईट एरिया सहरसा में बिनोद व किशोर जैसे कई अन्य चकला मालिक भी हैं। जिनके पास एक नहीं, दो नहीं तीन-तीन पत्नियां बनाकर इस देह धंधा को अबाध गति से चला रहा है।

आखिर किसके संरक्षण में फल-फुल रहा है 

गिरफ्तार दलाल
गिरफ्तार दलाल

आखिर चकला मालिकों के सिर पर किसका हाथ है जो इतनी निर्भिकिता के साथ इस अनैतिक धंधा को बेखैंफ होकर आज तक चला रहा है। अगर सही तरीके से छापामारी की जाती तो सिर्फ बिनोद उर्फ कमरूल के घर में डेढ दर्जन से अधिक लड़कियां पकड़ी जाती। नगर परिषद क्षेत्र सं. 26 सहरसा-सुलिंदाबाद मार्ग से सटे पश्चिम तकरीबन ढाई सौ की घरों में रेड लाईट एरिया फैला हुआ है। बहला-फुसला व झांसा देकर लायी गयी बच्चियां भी अब वयस्क हो गयी है और इन लोगों की पहचान छुपाने के लिए सही नाम व ठेकाना बदलकर आकर्षित नाम रख दिया गया है। अब तो खुद मां व बाप बन कर वोटर लिस्ट तक में नाम चढा दिया है। लड़कियों की संख्यां और उसके परिजनों की खोज की जाय तो सभी के नाम व पिता का नाम बदलकर मुस्लिम समुदाय से जोड़ दिया गया है, ताकि पुलिस-प्रशासन के आंखों में भी आसानी से धूल झोंका जा सके।

पुर्व में भी मुक्त करवाया जा चूका है |

साल 2010 में सहरसा के सदर डीएसपी राजकुमार यादव ने रेड लाईट एरिया में छापामारी किया था। उस छापामारी में भी एक दर्जन से अधिक लड़किया पकड़ी गयी थी। लेकिन पकड़ी गयी सभी लड़किया अपना-नाम व पता भूल जाने के कारण और प्रशासन के पास पुनवार्सित करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं होने की वजह से सब के सब उसी दलदल में फिर से जा पहूंची। इस छापामारी में मोकामा से भगा कर लायी गयी दो बच्चियां ही मुक्त हो सकी थी।

(dainikkhabar से मनीष कुमार सिंह/भार्गव भारद्वाज की रिपोर्ट पर आधरित )