1 करोड़ 77 लाख के धान गबन के आरोपी ने तत्कालीन जिला प्रबंधक व वर्तमान राईस मिल मालिक पर किया मुकदमा !

1125

सहरसा (ब्रजेश भारती) : सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल के बनमा-ईटहरी प्रखंड में वर्ष 13-14 में सरकारी दर पर किसानों से कि गई धान के गबन का मुख्य आरोपी विवेकानंद राय के कोर्ट नालसी के आधार पर सलखुआ थाना में तत्कालीन जिला एसएफसी प्रबंधक अरशद फिरोज,कार्यपालक सहायक विजय कुमार एवं वर्तमान सहरसा राईस मील के मालिक नब्बी अहमद उर्फ नकीब आलम,रक्की आलम, सहित एक अन्य लोगों पर 10 जुन को मुकदर्मा दर्ज कर लिया गया हैं। थानाध्यक्ष तरूण कुमार तरूणेश ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले कि जांच में पुलिस जुट गई हैं।

WhatsApp-Image-20160613 (5)

मामला बनमा ईटहरी क्रय केन्द्र पर वर्ष 13-14 में सरकारी दर पर खरीद कि गई धान का।

दर्ज मुकदमा में क्या है आरोप- दर्ज प्राथमिकी के आवेदक सह तत्कालीनल क्रय केन्द्र प्रभारी विवेकानंद राय ने कहा है कि 14 दिसंबर 13 को जिला प्रबंधक ने उसे क्रय केन्द्र प्रभारी बनाये जाने कि बात कही लेकिन वे बोले कि धान क्रय करने का तजुरबा नही है पर वे वोले कि कोई बात नही है कार्यपालक सहायक व उपरोक्त मेरे निजी लोग सब काम करेगा तुम सिर्फ चेक पर हस्ताक्षर करना है इसी बात पर राजी हो कर मैने कार्य प्रारंभ कर चेक पर हस्ताक्षर करने लगा। लेकिन उपरोक्त सभी लोगों ने एक सोची समझी साजिस के तहत मिलीभगत कर सरकारी धान का गबन कर लिया हैं।

खरीद क्रय केन्द्र प्रभारी विवेकानंद राय व सहायक विजय कुमार पर दर्ज है पौने दो करोड़ रूपये गबन का मुकदमा

कितनी राशि का गबन का आरोप हैं- आवेदक ने आरोप लगाया है इस क्रय केन्द्र पर कार्यपालक सहायक के द्वारा बताया गया कि कुल 17201.60 क्विंटल धान कि खरीद कि गई हैं। सरबैला वाला गोदाम में 672 क्विंटल तथा सिमरी बख्तियारपुर वाला गोदाम में 400 क्विंटल,इस तरह कुल 1072 क्विंटल धान गोदाम में रखा गया है वाकी धान बाहर खुले आसमान में रखा गया है विभाग को खाली बोरा के लिये कहे जाने पर जरूरत मात्र 25 हजार खाली बोरा ही उपल्बध कराया गया जबकि जरूरत 43 हजार बोरा कि हैं। कार्यपालक सहायक ने बताया कि नब्बी अहमद उर्फ नकीब अहमद को धान के बदले 1 करोड़ 44 लाख 11 हजार 451 रूपये का भुगतान कर दिया गया है जो उसने लिखित में दिया हैं।WhatsApp-Image-20160613 (6)

कितने धान खरीद हुई- आवेदक ने कहा कि कार्यपालक सहायक के द्वारा जो खरीद का व्यौरा दिया गया था वह गलत था विभाग के द्वारा बार बार कहे जाने पर उनके हस्ताक्षर से विभाग को 9 अक्टुबर 14 को 13726.80 क्विंटल खरीद का व्यौरा विभाग को दे दिया गया।
पूर्व का क्या है मामला- तत्कालीन एसएफसी प्रबंधक ने बार बार क्रय केन्द्र प्रभारी व सहायक से धान खरीद का व्यौरा कि मांग कि लेकिन इन दोनों ने छ माह तक जब व्यौरा विभाग को उपल्बध नही कराया तो इन दोनों को धान खरीद मामले का दोषी मानते है कुल 17201.60 क्विंटल धान सरकारी दर पर खरीद कर विभाग को व्यौरा नही देने का आरोपी मानते है मुकदमा दर्ज करवाया गया था। मुकदमा अभी पुलिस जांच के बाद न्यायालय में लंबित है वही एक आरोपी के फरार हाने कि बात कही जा रही हैं।BSFCSCL-

जमकर सरकारी राशि कि हुई थी लुट- वर्ष 13-14 में बनमा ईटहरी धान क्रय केन्द्र पर धान खरीद के नाम पर सरकारी राशि का जमकर लुट हुआ था,इस क्रम क्रय पर जितनी मात्रा दर्शा कर राशि कि निकासी कि गई थी वास्तबम में उतनी राशि का धान खरीदा ही नही गया था सिर्फ कागजों पर ही धान खरीद दिखा कर राशि का निकाली विभिन्न किसानों के नाम पर कर लिया गया। इस बात कि पोल तब खुली जब इस लुट में सामिल सभी लोगों का आपसी तालमेंल बिगर गया कहा जाता है कि एक बिचैलिया ने सारा रकम हमज कर इस धोटाले कि पोल खोल दिया।

हमाम में सभी नंगे- अगर पूर्व के प्राथमिकी व इस बक्त दर्ज प्राथमिकी कि बात कि जाये तो सभी लोग अपनी ओर से पल्ला झाड़ने के लिये ताब पैच चल रहे हैं। अगर पुलिस सही जांच इस मामले कि करे तो सभी घोटाले बाज सामने आ सकते है जिनमें कई सफेद पोश पैक्स अघ्यक्ष के नाम भी सामने आ सकते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस क्या करती है या फिर सभी पुराने मामले कि तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल देगीं।