सहरसा-मानसी रेलखंड :अच्छे दिन आने का इंतजार !

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इस तरह ढोया जाता है चारा

सहरसा (राकेश कुमार) : पूर्व मध्य रेलवे के सहरसा-मानसी रेलखंड का आमान परिवर्तन होने के बावजूद भी यात्रियों को छोटी रेल लाइन की तरह परेशानी का सामना करना पड़ता है। कोसी इलाके के लिए लाइफ लाइन माने जाने वाले सहरसा-मानसी रेलखंड पर बने विभिन्न स्टेशनों पर मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है।

उपेक्षित है सहरसा-मानसी रेलखंड :-20130324173222

मानसी-सहरसा रेलखंड आज भी उपेक्षा का दंश झेलने को विवश है। कहने को तो वर्षो पूर्व इस रेलखंड को बड़ी लाईन बना दिया गया पर रेलखंड पर बने स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं नदारद है। जिससे यात्रियों को काफी कठिनाई का सामना आज भी करना पड़ रहा है। बताते चलें कि मानसी सहरसा रेलखंड के बीच एक या दो स्टेशन को छोड़ दें तो कहीं भी प्लेटफार्म संख्या दो की सुविधा नहीं है। सहरसा-मानसी रेलखंड के बीच बदला घाट स्टेशन पर अगर प्लेटफार्म संख्या दो है भी तो उसके उपर आज तक शेड नहीं बन सका है। जिससे यात्रियों को कड़ी धूप हो या बरसात में ही ट्रेनों का इंतजार करना पड़ता है। इसी रेलखंड पर एक फनगो हॉल्ट है जिसका कायाकल्प नहीं हो पा रहा है।

मानसी स्टेशन (फाइल)
मानसी स्टेशन (फाइल)

सुविधाओं का टोटा :-

इस तरह होती है सफ़र (फाइल फोटो)
इस तरह होती है सफ़र (फाइल फोटो)

सहरसा-मानसी रेलखंड के धमारा घाट, फनगो हॉल्ट, कोपरिया, बाबा रघुनी हॉल्ट, सोनवर्षा कचहरी, एवं परविनियां हॉल्ट पर यात्रियों को ट्रेन की सवारी करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। बड़ी रेल लाइन होने के बावजूद भी इन स्टेशनों पर प्लेटफार्म की उंचीकरण नहीं के बराबर हो पाया है। जिससे यात्री को ट्रेन पर चढ़ने-उतरने में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

धमारा घाट में 2013 में हुई हादसा (फाइल फोटो)
धमारा घाट में 2013 में हुई हादसा (फाइल फोटो)

28 श्रद्धालुओं की कट कर हो चुकी है मौत :-

19 अगस्त 2013 को धमारा घाट स्टेशन पर राज्यरानी सुपरफास्ट ट्रेन की चपेट में आने से 28 महिला पुरूष एवं बच्चे श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो चुकी है। घटना के बाद घमारा घाट रेलवे स्टेशन को मॉडल स्टेशन का दर्जा दिलाने सहित विभिन्न मागों को लेकर लोक गायक सुनील छैला बिहारी समेत दर्जनों सामाजिक कार्यकत्र्ताओं ने रेलवे स्टेशन पर नौ दिनों तक आमरण अनशन किया था। रेलवे ने 2 करोड़ 41 लाख की लागत से घमारा घाट स्टेशन पर दो नंबर प्लेटफार्म एवं फूट ओवरब्रिज निमार्ण कराने की घोषणा की थी। लेकिन कार्य काफी मंथर गति से चलने के कारण आज तक कार्य आधा अधूरा है।

कहते हैं यात्री……

यात्री ललन यादव, प्रमोद भगत, कुमर यादव, मिथलेश भगत, राजेश राय, कैलाश प्रसाद वर्मा, मनोज यादव, सोहन शर्मा आदि कहते हैं कि किसी भी स्टेशन पर बिजली की सुविधा ठीक नहीं है। प्लेटफार्म का ऊंचीकरण नहीं होने से यात्री को ट्रेन पर चढ़ने उतरने में होती है परेशानी। स्टेशन पर अंधेरा रहने से रात में यात्रियों को काफी परेशानी होती है। शौचालय व पेयजल की भी सुविधा नहीं के बराबर है। जिससे महिला यात्रियों को काफी परेशानी होती है।