आपकी तक़दीर पढने वाले की तक़दीर कौन बदलेगा !

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सहरसा desk : “जा आपका तकदीर बन जावेगा, आपको दुश्मन बहुत लग जाता है, जाओ जब तेरा मनोकामना पूरा हो जावेगा तो अगले साल लोटूंगा तो क्या इस फकीर बाबा को एक गिलास पानी के लिए भी पूछेगा कि नहीं“ यह किसी फिल्म या नाटक की डायलाग नहीं बल्कि ललाट पढ़कर दूसरों के भाग्य बताने वाले लाठौर जाति के जीविका जीने का यह तकिया कलाम है ।

जिले के सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल के बनमा ईटहरी प्रखंड क्षेत्र के घौड़दौड़  पंचायत में लाठौर राजपूत जाति की अच्छी-खासी आबादी है । सीवान जिले के अलीगंज से आकर यहाँ बसे लाठौर जाति आज भी बंजारा की जिन्दगी जीने को विवश है । कहने को तो बनमा ईटहरी प्रखंड के घौड़दौड़ हीं इस जाति का असली ठिकाना है मगर पेट की आग बुझाने के लिए कब और कहाँ खींचकर अपना बसेरा ले जाये यह भी कहना मुश्किल है ।

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बंजारा की जिन्दगी जीने वाले इस लाठौर जाति में प्रतिभा की कमी नही होती है – जहां ये लोगों की ललाट पढ़कर तकदीर गढ़ते हैं वहीं इनकी तकदीर में क्या लिखा है इसे अब तक किसी ने नहीं पढी है । अपने को साधु व अघौरी कहने वाले लाठौर की आवरण वाकई लोगों को आकर्षित व लुभाने वाली होती है । लोगों को भविष्य बताने में इनकी जीह्वा पर जितनी लोच होती है उतनी भयावहता भी । अपने मनोवैज्ञानिक मकर जाल में लोगों को इस कदर फ़ांस लेते हैं कि सात बक्से में बंद खजाना भी इनको दान करने के लिए लोग खोल देते हैं । कहा जाता है कि लाठौर जाति हाथ की सफाई जादूगरी में भी काफी माहिर होते हैं । ये जमीन से कंकड़ भी आपके हाथ की मुट्ठी में बंधवा दे तो खुलने पर फुस या अजूवा चीजें आपको देखने को मिलेंगें । इस जाति की यह चमत्कारिक विद्या भी इनके जीविका का मूल साधन है। अगर गाँव घरों में दुधारू पशु की दुध कम हो जाय तो भी ईलाज कर ठीक कर देते हैं और जो पशु इन्हें पसंद आ जाये उसकी दूध भी ये अपनी नजर से आसानी से कम कर देते हैं । जिसके कारण पशु पालक किसान लाचार होकर मंहगी मवेषी को इनके हाथों कौरी के दाम बेचने को मजबूर हो जाते हैं । इस समुदाय की जायदाद जमीन से ज्यादा नगदी के रूप में सोना-चांदी हीं रखना ज्यादा पसंद करते हैं । फिर भी समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है। चुकि बच्चे से लेकर औरत व बूढे तक शाम ढलने के बाद नशे में धूत हो जाते थे, लेकिन नीतीश सरकार की शराब बंदी इस समुदाय के लिए समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक साबित होगी । यानि जादूई व ज्योतिषी से कमाई गयी रकम को पानी की तरह बहा देना इनके तकदीर मे लिखी है ।

लाठौर बंजारा वृद्ध हरिहर, योगेन्द्र, बिछुन, सुरेश,  छोटकना, पंडित, रणजीत, ठनठनी, बेइ अच्छेलाल, पूनी आदि का कहना है कि सरकार व सरकार की जन कल्याणकारी योजना क्या होती है पता नही । जिसके कारण हम लाठौर जाति लावारिष की जिन्दगी हीं जी रहें हैं  ।

श्रोतसंजय सोनी/(http://dainikkhabar.in/)