पंचायत चुनाव उत्साह : न रोजी की फिक्र, न हीं रोटी की !

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मधेपुरा/चौसा(संजय कुमार सुमन): लंबे इंतजार के बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के भाग्य का फैसला होने जा रहा है। मतों का पिटारा खुल रहा है। बारी-बारी से सभी छह पदों के चुनाव परिणाम की घोषणा हो रही है। जैसे ही सुबह की किरणें जमीन पर पड़ती है लोगों की नींद एक उम्मीदों के साथ जाग जाती है । क्योंकि पंचायत सरकार का भविष्य तय होना है। इसके लिए लंबे समय से ताना बाना बुना जा रहा था। जगने के साथ हर गली, चौपाली व चौक-चौराहे पर होने लगी चुनाव नतीजों की चर्चा और देखते-देखते लोग मतगणना केन्द्रों की ओर कूच कर जाते हैं । न रोजी की फिक्र, न हीं रोटी की। मानों कि बस सबों में पंचायती राज व्यवस्था रूप रेखा तैयार करने की होड़।

सुबह के करीब 10 बजे से ही पत्रकारों के सेल फोन पर घंटियां बजने लगती है । सवाल पूछे जा रहे हैं , क्या हुआ? कौन जीत रहा है? किस पंचायत से कौन आगे चल रहा? लोगों के सवालों में उलझे संवाददाता मतगणना केंद्र पर परिणाम जानने को उत्सुक थे।आज शनिवार को सुबह आठ बजे से शुरू होनेवाली मतगणना का आरंभ बैलेट की छंटनी से हुआ। बैलेट बाक्स से मतपत्र निकालने तथा उससे अगल-अगल करने के बाद मतों की गिनती का क्रम थोड़ा धीमा चल रहा था। मतगणना कक्षों में पंखे के बावजूद भीषण गर्मी थी। मतगणना कर्मी से लेकर प्रत्याशी तक परेशान थे, लेकिन, जैसे-जैसे नतीजे आते गए लोगों में उत्साह भरता गया। मतगणना केंद्र व आसपास के क्षेत्रों में जहां विभिन्न प्रखंडों के पंचायतों से पहुंचे प्रत्याशियों के समर्थक परिणाम जानने को बेचैन रहे। सभी यह जानने को बेचैन थे कि क्या हो रहा है। राउंड की गिनती के साथ बेचैनी थोड़ी घटी। जैसे ही नतीजों की घोषणा हुई तो एक बारगी जीतने वाले प्रत्याशियों का खेमा झूम उठा। सबसे पहले वार्ड सदस्य व पंच के परिणाम आने शुरू हुए। उसके बाद अन्य पदों के परिणाम। विजयी प्रत्याशियों के समर्थकों ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई दी और मिठाईंयां बांटी।
मतगणना कार्य आरंभ करने से पहले प्रशासनिक स्तर पर निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुरूप सभी संबंधित लोगों के समक्ष वज्रगृह खुला और मतों की गिनती का काम आरंभ हुआ। इस दौरान शांति व्यवस्था बनी रहे इसके लिए आयुक्त द्वारा प्रतिनियुक्त प्रेक्षक, जिला स्तर से तैनात किए गए अधिकारी,पुलिस बल सक्रिय रहे। जैसे-जैसे अंतिम नतीजे की घड़ी पास आती गई। वैसे-वैसे प्रत्याशियों के दिलों की धड़कनें तेज हो गईं। कोई जीत रहा तो कोई शिकस्त खा रहा था। जीतने वाले के चेहरे पर जहां संतुष्टि और आत्म विश्वास का भाव दिख रहा था। वहीं जिन्हें हार नसीब हुई उनका मन कितना भारी रहा यह भाव भी उनके चेहरे से साफ झलक रहा था। मतगणना की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद केंद्र से निकले सभी की आंखें डबडबाईं थी। किसी की आंखों के पानी जीत के लिए मिले जनादेश को सलाम कर रहे थे। तो किसी की आंखें स्वत समीक्षा के पानी से भर आईं थीं।
तमाम कयासों के बीच चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशी लगातार अपनी स्थिति का आंकलन करते रहे। कोई अपने मतगणना अभिकर्ता से जानकारी ले रहा था। कोई स्वयं जाकर वस्तु स्थिति देख रहा था। वहीं समर्थक नतीजा आने तक अपने जीते प्रत्याशी की एक झलक पाने को बेचैन रहे।
मतगणना के दौरान या उसके बाद किसी भी तरह का कोई हंगामा नहीं हो और शांति व्यवस्था कायम रहे इसके लिए प्रशासन काफी चौकस रहा। मतगणना केंद्र पर आयुक्त द्वारा प्रतिनियुक्त प्रेक्षक, जिला से तैनात किए गए अधिकारी समेत तमाम वरीय अधिकारी सक्रिय रहे।