सरकार अब तो मुझे मौत दे दो !

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बीमार युवक

मधेपुरा/चौसा(संजय कुमार सुमन ) : वर्षो से बिस्तर पर हूं। जिन्दगी और मौत से जूझ रहा हूं। अब जिन्दगी बोझ सी बन गई है। अब सांसें नश्तर की भॉंति चुभते हैं। दिल की हर धड़कन चिढ़ाती है। तीस वर्षो से किसी भी जनप्रतिनिधि या सरकार ने मेरे लिए कुछ नहीं किया। एक बूढ़ी मां के सिवा मेरा कोई सहारा नहीं है। मेरा वजूद मां के कष्ट का कारण बन गया है। मैं अब और जीना नहीं चाहता। सरकार मेरे लिए कुछ नहीं कर सकती तो मुझे इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दे। ताकि मैं हसते-हसते मौत को गले लगा सकूं।उक्त हृदय विदारक इच्छा रविन्द्र पासवान ने व्यक्त की है

तस्वीर सांकेतिक मात्र
तस्वीर सांकेतिक मात्र

श्री पासवान चौसा प्रखंड के चौसा पश्चिमी निवासी बिन्देश्वरी पासवान और श्यामा देवी के ज्येष्ठ पुत्र हैं। चार भाई और एक बहन में सबसे बड़े रविन्द्र गत तीस वर्षो से बिस्तर पर जिन्दगी और मौत से जूझ रहे हैं। उनका सिर्फ चेहरा ही सक्रिय है,बाकी अंग सुन्न है। कहते हैं ना मारने वाला है भगवान बचाने वाला है भगवान। रविन्द्र की वयोवृद्ध मां श्यामा देवी कहती हैं कि रविन्द्र का जन्म रविवार को हुआ था और वह रविवार को ही ऐसा बीमार पड़ा कि आजतक फिर दुनिया नहीं देख पाया। वे बताती हैं कि वर्ष 1985 में रविन्द्र जब स्थानीय जनता उच्च विद्यालय चौसा में आठवीं कक्षा में पढ़ता था तो उसी दौरान उसके पैर में दर्द की शिकायत हुई। पूर्णिया के चिकित्सक के0पी0मोदी से इलाज कराया गया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। गरीबी के कारण बड़े डाक्टर को नहीं दिखा पाई। पिछले तीस वर्षो से इसका पूरा शरीर लूंज-पूंज है। गले के नीचे का कोई भाग इसका काम नहीं करता है। इसकी सारी सेवा बिस्तर पर ही करती हूंॅ।

पीड़िता मां श्यामा ने दर्द भरे शब्दों में कहती है कि मैं हूं तो मेरा यह मजबूर बेटा है। मैं भी अब जीवन के अंतिम पहर में हूंॅ। मेरे बाद मेरे लाल का गिरधर गोपाल ही मालिक है। मौके पर उपस्थित पंचायत के मुखिया श्रवण कुमार पासवान ने बताया कि रविन्द्र के साथ पूर्व में नाइंसाफी हुई है। पंचायत द्वारा वित्तीय वर्ष 2012-13 से रविन्द्र को बिहार निःशक्तता पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। लेकिन उनके लिए यह सुविधा नाकाफी है।
वार्त्ता के क्रम में रविन्द्र की आखों से सिर्फ अश्रुधारा बहती देख हृदय चित्कारता रहा। काफी कुरेदने पर उन्होनें कहा कि बाबू तीस वर्षो से लोग आते रहे और जाते रहे। मैं अपने जीवन का जख्म दिखाता रहा लेकिन कभी किसी ने मरहम नहीं लगाया। मेरे लिए सबकुछ मेरी मां है। मेरी मां भी मेरे गम में अंधी होती जा रही है। अब और दुःख नहीं सहा जाता है। ना कोई इच्छा बची है और ना ही जीने की आशा है। सरकार से बस यही प्रार्थना है कि मुझे इच्छा मृत्यु की आज्ञा दे दे। ताकि मैं हसते-हसते अपने मौत को गले लगा सकूं।