सखी सैयां तो खूब ही कमात हैं, महंगाई डायन खाए जात है !

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मधेपुरा (संजय कुमार सुमन ) लगातार बढ़ रही गरमी की वजह से सब्जियों के उत्पादन पर असर पड़ा है. बाकी चीजों की आमद भी कम हुई है. ऐसे में महंगाई की मार लोगों को परेशान कर रही है | हाल के दिनों में बढ़ी महंगाई से हर तबका परेशान है. महंगाई की वजह से लोगों के घर का बजट बिगड़ गया है. रसोई से दाल व सब्जी गायब हो रही है. महंगाई का सबसे ज्यादा असर गरीब व मध्य वर्गीय परिवार पर पड़ा है. इससे निबटने की दिशा में सरकार व प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं हो रही है |

सखी सैयां तो खूबै कमात हैं, महंगाई डायन खाये जात है… यह चर्चित फिल्मी गीत रील की जगह इन दिनों  रियल लाइफ की कहानी बन गयी है.

जिसका नतीजा यह है कि लोग बगैर दाल व सब्जी के भोजन करने को विवश हो रहे हैं. तेज धूप की वजह से सब्जी की फसल को नुकसान पहुंच रहा है. इसका सीधा असर सब्जी के उत्पादन पर पड़ा है. हरी सब्जी के दाम में दो गुना तक बढ़ोतरी हो गयी है. यहां तक कि जरूरी अनाज चावल, आटा तक महंगा हो गया है. इसमें कोई भी परिवार चाह कर भी कटौती नहीं कर सकता है.
दरअसल आमलोगों से जुड़ी हर खाने-पीने की वस्तु के दाम में इजाफा हो गया है. ऐसी स्थिति में लोगों के सामने विकट समस्या आ गयी है कि आखिर क्या खायें, जो उनकी बजट का हो. महंगाई की वजह से लोग दाल खाना तो पहले ही छोड़ चुके हैं. अब सब्जी के दाम में हुए इजाफा के कारण सब्जी का इस्तेमाल चटनी के तौर पर करने को विवश हुए हैं. इसका सीधा प्रभाव लोगों के सेहत पर पड़ रहा है.
महंगाई की वजह से जब सब्जी, दाल का सेवन नहीं करेंगे तो विटामिन की कमी होना लाजमी है और! लोग बीमार होंगे. इस प्रतिनिधि ने हाल के दिनों में बढ़े महंगाई से लोगों के घर का बिगड़ा बजट और इससे हो रही परेशानी का पड़ताल किया है. जिसमें पता चला कि महंगाई की वजह से कमोवेश हर तबका परेशान है. गृहणी अमला देवी,साजन देवी कहती है कि महंगाई ने घर का बजट बिगाड़ कर रख दिया है.

हमलोग मध्यवर्गीय परिवार है इसलिए ज्यादा परेशानी हो रही है. व्यवसायी मुकेश कुमार खन्ना बिहारी,सुबोध कुमार कहते हैं कि महंगाई ने सारे रेकार्ड तोड़ दिये हैं. इस पर अंकुश लगाने की दिशा में सरकार को कुछ करना चाहिए. महंगाई ने गरीब की थाली में डाका डाला है. यही स्थिति रही तो गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार को भोजन के लाले पड़ जायेंगे.

दाल पहले रसोई से गायब :  इन दिनों दाल के भाव आसमान छूने लगे हैं. पहले गरीब अब मध्यवर्गीय परिवार की थाली से भी दाल गायब होने लगी है. इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है. चिकित्सक भी दाल खाने की सलाह देते हैं, लेकिन दाल के दाम में लगी आग के बाद रसोई से दाल पूरी तरह से गायब हो गयी है. लोग सप्ताह में एक या दो दिन ही दाल का सेवन कर रहे हैं. प्रतिदिन दाल का सेवन करने से लोगों का बजट बिगड़ जा रहा है. कई लोग तो मेहमान आने के बाद ही दाल घर में बना पा रहे हैं. जो नियमित दाल अब भी खा रहे हैं उसकी मात्रा काफी कम हो गयी है. दरअसल कोई भी दाल सौ रूपये से नीचे नहीं है.  अरहर की दाल में पहले से आग लगी हुई है. मूंग, उड़द सहित अन्य के दाल भी लोगों के बजट से बाहर हो गया है.