बेईमान पिया की तरह धोखे दे रही है तालाब , आज खुद पानी को मोहताज बना हुआ !

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मधेपुरा/चौसा (संजय कुमार सुमन) : प्रखंड के मोरसंडा,चिरौरी,फुलौत,लौआलगान पंचायत के कई गांव कोसी नदी के मुहाने पर अवस्थित है। लगातार कोसी नदी के बहने से दर्जनों की संख्या में अस्थाई चांप और चौर भी है। जहां सालों भर पानी रहता था। बाढ़ के समय में मुख्य कोसी नदी से पानी उफनाकर गांव-गांव एवं आस-पास के खेत खलिहान एवं तालाब-पोखर में पानी फैल जाती थी। लेकिन इन दिनों कोसी नदी के जलस्तर में काफी कमी आ गई और कोसी नदी की धरा सिमट कर सिकुड़ गई है।

अब चांप और चौर में भी पानी का अभाव दिख रहा है।
चांप और चौर में सालो भर पानी के जमे रहने और कोसी नदी के पानी आने से यहां घोंघा,कोकराहा,सौरखी,कोका के फूल आदि की अच्छी मात्रा थी। इसके अलावे सरौंची का साग,सिंगही एवं कबैय मछलियां प्रमुख रूप से पायी जाती थी। जो गरीब लोग इन्हें खाद्य सामग्री के रूप में इस्तेमाल करते थे। लेकिन अब चांप और चौर के सूखे होने से इन पर संकट तो गहरा ही गया है और गरीबों को मुफ्त में मिलने वाली प्रोटीन युक्त भोजन पर भी ग्रहण लग गया है।
मालूम हो कि चौसा प्रखंड में मछली पालन के उद्देश्य से मनरेगा द्वारा दर्जनों स्थानों पर तालाब की खुदाई की गई। तालाबों के विकास के नाम पर जमकर लूट हुई। जिसके कारण तालाब आज बदहाल है और ठीकेदार मालामाल हो गये। दर्जनों बार तालाब की खुदाई और सफाई के नाम पर करोड़ों रूपये की निकासी की गई लेकिन धरातल पर तालाब अपने स्वरूप में कभी लौट नहीं पाया। ऐतिहासिक महत्व रखने वाले कई तालाब आज बदहाली में अपना अस्तित्व खोने को मजबूर है। चंद लोगों ने तालाब की पहचान को सुरक्षित एवं संरक्षित करने के बजाय अपने चंद स्वार्थ के लिए लूट मचाई।

स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया पर हुक्मरानों के सामने किसकी चलती है जगजाहिर है