शराब की जगह नशे के लिए नई तरकीब अपना रहे लोग !

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मधेपुरा/चौसा(संजय कुमार सुमन):बिहार में शराब बंदी होने से अपराध का ग्राफ काफी  हद तक गिरा है।खासकर के  सड़क दुर्घटनाओं में कमी आई है। शराब के नशे में धुत होकर शराबी द्वारा आये दिन मारपीट,रंगदारी जैसे घटनाओं को अंजाम दिया करता था। शराब के नशे में अकारण ही किसी के साथ गाली-गलौज व मारपीट की घटनाएं अब बिल्कुल ही बंद होने से नागरिकों के साथ-साथ पुलिस प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। थाना में अधिकतर मामले ऐसे लोगों से ही जुड़े होते थे। शराब पीने व पिलाने के सवाल पर भी मारपीट की घटनाएं होती थी। अधिकतर अपराध की घटनाओं को अंजाम देने से पूर्व अपराधी शराब का सेवन करते थे। फिर किसी घटना की प्लानिंग करते थे। ऐसे लोगों की भीड़ विभिन्न होटलों में देखने को नहीं मिलती है। इसके साथ ही शराब पीकर वाहन चलाने के बाद होनेवाली घटना में भी काफी कमी आयी है।

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भूमि विवाद मामले को छोड़कर अन्य मामलों में काफी कमी आई है…..

शराब की जगह नशे के लिए नई तरकीब का इजाद:- सूबे में शराब बंद होने के बाद शराबी नशा के लिए नए-नए तरकीब इजाद कर रहे हैं। वे हर चीज में नशा ढूढने में लगे हैं। बीमारी से निजात दिलाने के लिए बनी दवाओं का उपयोग अब नशे के रूप में किया जाने लगा है। इतना ही नहीं सुलेशन, इंक रिमूबर, पेंट आदि भी नशा के रूप में उपयोग करने लगे हैं। दवा दुकानदार भी अपने फायदे के लिए बिना डाक्टर की पर्ची देखे ही ये नशीली दवाएं बेंच रहे हैं। दर्द और एलर्जी से राहत दिलाने के लिए बनाई गई दवाइयों को उपयोग युवा वर्ग नशे के लिए करने लगा है। पेंटविन इंजेक्शन, कोरेक्स सीरप और स्पाजमो प्राक्सीवान कैप्सूल का नशे के लिए उपयोग किया होता है। नशे के ये सामान मेडिकल स्टोर में 2 रुपए से लेकर 15 रुपए में आसानी से मिल जाते हैं। बताया जाता है कि स्पाजमो प्राक्सीवान कैप्सूल पेट दर्द से राहत की दवा है। इसकी कीमत 2 रुपए है। युवा एक साथ चार से पांच कैप्सूल खाकर इसका उपयोग नशे के लिए कर रहे हैं। इसके अलावा पेंटविन इंजेक्शन लगाकर भी युवा वर्ग नशा कर रहे हैं। नशे के लिए युवा स्पाजमो प्राक्सीवान, एंटी एलर्जिक टेबलेट, नारफिन एंपुल, नाइट्रोसीन टेबलेट, आयोडेक्स व कोरेक्स सीरप का भी उपयोग कर रहे हैं। इनमें से नारफिन व नाइट्रोसीन को तो प्रतिबंधित कर दिया गया है, फिर भी ये दवाए दुकानों में बिक रही है।

तस्वीर- सांकेतिक (श्रोत-गूगल)
तस्वीर- सांकेतिक (श्रोत-गूगल)

सुलेशन का भी ले रहे सहारा:-नशे के आदी बन चुके लोगों में कुछ लोग शराब के विकल्प के रूप सुलेशन का उपयोग भी नशा के रूप कर रहे हैं। शायद इनके अंदर मौत का भी खौफ नहीं है। वे सुलेसन का सहारा नशा पूर्ति के लिए ले रहे हैं। सुलेसन का इस्तेमाल ऐसे हो रहा है जैसे हेरोइन और चरस का होता है। अहम बात है कि इस पर न तो सरकार की बंदिश है और ना ही परिवार के लोगों को जानकारी। दुकानदार निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए सब कुछ जानने के बाद भी सुलेसन अवस्यक तक को बेच रहे हैं।

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कैसे होता है उपयोग:-
लोग सुलेसन को खरीदकर उसे सूती कपड़े में लगाकर चीलम में डाल देते है फिर उसमें आग लगाकर गांजे की तरह कश (पीना) लेते है। जिन्हे चीलम नहीं मिलती वे सीधे नाक से धुंआ निगलते है। इसका उपयोग करने वालों की माने तो यह शराब, गांजा और हेरोइन की तरह ही नशा करता है।

इंक रिमूबर, पेंट का भी कर रहे उपयोग:-
यहीं नहीं स्कूली छात्र इंक रिमूबर, पेंट आदि का भी उपयोग नशे के लिए कर रहे है। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो रिमूबर आदि को बच्चे रूमाल में लगाकर सूंधते है इससे उन्हें नशे की अनुभूति होती है। कुछ समय बाद जब इसका नशा कम होता है तो वे दूसरे नशीले पदार्थो का उपयोग करने लगते है।

शराब बंदी के बाद सिगरेट व गुटके की मांग बढ़ी:-
शराब बंदी के बाद हालांकि गुटके की बिक्री में कोई खास अंतर नहीं आया है। पहले से गुटका के आदी हो चुके लोग पूर्ववत गुटका की खरीदारी कर रहे हैं। हां शराब पीने के बाद उसके गंध को दबाने व शौकिया गुटका खाने वालों की संख्या में कमी आयी है। गुटका विक्रेता बमबम कुमार बताते हैं कि गुटके की बिक्री में कोई खास अंतर नहीं आया है। पहले से पांच प्रतिशत बिक्री बढ़ी है। शराब छोड़ने वाले लोग धीरे-धीरे गुटका खाना शुरू कर दिया है।शराब बंदी से सिगरेट की बिक्री भी बढ़ी है। पहले से सिगरेट की बिक्री में तकरीबन 30 प्रतिशत की विर्धि आई है। सिगरेट विक्रेता पंकज कुमार,मुकेश कुमार बताते खासकर शाम में इसकी बिक्री बढ़ जाती है। शौकिया व आदी लोग तो सिगरेट मांगते ही हैं शराब पीने वाले भी अब सिगरेट ले रहें हैं। पहले दिन भर में जहां दस से अधिक पैकेट बिक जाती थी अब दिन भर में 15 से 20पैकेट बिक जाता है।

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गांजा पीने वालो की भी तादाद बढ़ी: शराब नही मिलने से शराबियों ने गांजा का सहारा लेना शुरू कर दिया है।शाम होते ही चौक चौराहे एव मैदान में इसके पीने वालों की तादाद बढ़ जाती है।लोग गांजा को सिगरेट एव चिलम में भर कर आज कल खूब पी रहें हैं।
महिलाओं ने कहा शराब बंद होने से बना शांति का माहौल:-
शराब बंद होने से महिलाएं काफी खुश हैं। महिलाओं ने कहा कि इसके बंद होने से घर में तो सुकुन मिल ही रहा है। घर के बाद भी शांति का माहौल है। सड़कों पर अब नशेड़ी नहीं दिखते हैं।

फुलौत की कौशल्या देवी,माधुरी देवी,अरजपुर की सुनीता देवी,डेजी देवी कहती हैं कि शराब बंद होने से बहुत खुश हैं। रात में पति शराब पीकर आते थे बच्चों समेत मेरे साथ मारपीट करते थे। जब से शराब बंद हुआ है पति की तबीयत जरूर खराब हुई लेकिन घर में शांति का माहौल है। पति भी अब परिवार के साथ मिलकर रहते हैं। घोषई की उषा देवी,पूनम देवी बताती हैं कि सरकार को यह कदम बहुत पहले उठाना चाहिए था। शराब बंद होने से बहुत खुश हूं की अब इन बच्चों को इसकी लत नहीं लगेगी।
लौआलगान की सावित्री देवी,सुनीता देवी कहती हैं कि शराबबंदी के बाद हमारा पूरा परिवार काफी खुश हैं। पति अपनी कमाई का अधिकांश हिस्सा शराब पीने व पिलाने में खर्च कर देते थे। बेटा भी बड़ा हो रहा है। डर था उसके इसी जानकारी मिलेगी तो क्या सोंचेगा। अब शराब बंद होने के बाद वे अपना काम करने के बाद घरेलू काम में भी हाथ बंटाने लगे है।