बिजली एवं सड़क के ठीकेदारों ने विधालय में जमाया कब्जा !

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मध्य विद्यालय भटौनी स्कूल के प्रांगन में बने भवनों पर ठेकेदार के लोगों के द्वारा कब्जा

सहरसा /सिमरी बख्तियारपुर (ब्रजेश भारती ) : प्रखंड के मध्य विद्यालय भटौनी में दो कम्पनीयों के ठिकेदारों ने अवैध रूप से विधालय परिषर एवं विधालय भवन को करीब 6 माह से कब्जा कर पठन पाठन को प्रभावित कर रखा हैं। अबैध रूप से कब्जा करने में एक कम्पनी बिजली विभाग का है तो दुसरा कम्पनी सड़क निमार्ण का हैं। दोनों कम्पनीयों के लोगों के द्वारा विधालय भवन में निमार्ण सामाग्री के साथ साथ मजदुरों के द्वारा डेरा डाल विधालय को आवासीय परिषर के रूप में उपयोग कर रहें हैं। इस मामले में विधालय प्रधान कुछ भी कहने से बच रहे है।

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बताया जाता है कि बिना किसी विभागीय आदेश के इनलोगों के द्वारा अवैध रूप से विधालय में कब्जा जमाये हुये हैं। जानकारी अनुसार विधालय परिषर में एक दो मंजिला भवन बना हुआ है जिसमें दो कमरा निचे एवं दो कमरा उपर है साथ-साथ चापाकल व शौचालय की व्यवस्था भी है। इसी भवन में गत 6 माह से दोनों कम्पनीयों के ठिकेदारों के द्वारा कब्जा जमा लिया गया है।

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भवन में कब्जा जमा लेने के बाद इन दौनों ठेकेदार के मजदूर के साथ सामान भी रहते है। निचे के दो कमरे में एक में बिजली कंपनी का सामान रखा हुआ है तो दूसरा कमरा में सडक निर्माण कंपनी के सिमेंट व अन्य सामान रखा हुआ है। इसके अलावे उपर के दौनों कमरों में उक्त दौनों कंपनी के मजदूर का आवास बना हुआ है। स्कूल के बरामदे पर खाना बनता है तो विधालय के प्रांगण में टैक्टर व मशीन वगैरह रखा जाता है। जबकि ग्रामीण का कहना है कि स्कूल में ठेकेदार व बाहरी लोगों के रहने से स्कूली बच्चों को जाने-आने में कठिनायों के साथ साथ बच्चों के पठन पाठन में बाधा हो रही है इतना ही नहीं इससे बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में महसूस किया जा रहा है। फिर भी स्कूल के द्वारा इस दिशा में अब तक कुछ भी ठोस कदत नहीं उठाया गया है।

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विधालय के कमरों में समान रख,मजदुरों ने बनाया ठिकाना

इस संबंध में विधालय प्रधानाध्यापक बैजनाथ दास ने बताया कि इन लोगों के रहने का कोई वरीय पदाधिकारी का आदेश नहीं दिया गया है बिजली कंपनी के ठिकेदार के द्वारा बिजली विभाग के एसडीओ से मोबाइल पर बात करायी गयी थी। जिस पर उसे रहने के लिए दिया गया। वही सडक निर्माण कंपनी को ग्रामीणों के द्वारा कहने पर विधालय में रहने दिया गया हैं। अब सवाल ये उठ रहा है कि विधालय प्रधान ने अबतक इस संबंध में अपने विभागीय अधिकारीयों को इस बात से क्यों नही अबगत कराया है कि विधालय में दो कम्पनीयों का अड्डा  हैं।