नीतीश की नैया डुबोएंगे महागठबंधन के ये सिपहसलार !

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 vijay srivastava : जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के सीएम नीतीश कुमार मिशन 2019 के लिए मैदान-ए-जंग में उतर चुके हैं। वे देश भर में अपनी और जदयू की लोकप्रिय छवि बनाने की जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं। चाहे दक्षिण भारत की उनकी हाल की रैलियां हों या फिर यूपी में 12 मई से शुरू हुआ उनका मिशन, हर क़वायद को पीएम पद की ओर कदम बढ़ाने की उनकी महत्वाकांक्षा के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन नीतीश और उनकी पार्टी जदयू को अपने ही राज्य बिहार में अपने नेताओं की बनाई हुई नकारात्मक छवि से उबरने के लिए भारी ऊर्जा लगानी पड़ रही है। नकारात्मक छवि की रही सही कसर महागठबंधन में शामिल उनके मित्र दलों राजद और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने पूरी कर दी है। जदयू, कांग्रेस और राजद के राजनेताओं और उनके रिश्तेदारों के कारनामों से जो बदनामी हो रही है, उसको लेकर नीतीश ख़ासे चिंतित हैं। अगर यही सिलसिला ज़ारी रहा तो नीतीश की नैया डुबोने में उनके सिपहसलार ही आगे होंगे।

बिहार में प्रमुख विपक्षी दल भाजपा को सूबे में गिरती कानून व्यवस्था और जंगलराज के अपने पुराने आरोपों को नये सिरे से उठाने का मौक़ा मिला है। गया की एमएलसी मनोरमा देवी के पुत्र रॉकी पर सरेराह हत्या के लगे आरोपों पर भाजपा फुल फॉर्म में है। पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने एमएलसी पुत्र रॉकी पर कार्रवाई में पुलिस की देरी पर सवाल खड़े किए है। उन्होंने शराब के स्टिंग में फंसे विधायक विनय वर्मा से लेकर रेप के आरोपी विधायक राजवल्लभ यादव, छेड़खानी के आरोपों में फंसे विधायक सरफ़राज आलम और डीएसपी को धमकी देने वाले विधायक गोपाल मंडल तक के मामलों में सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

सुशील मोदी की बातों को हम भले ही विपक्षी नेता के आरोप कहकर ज़्यादा तवज्जो न दें लेकिन बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद कानून व्यवस्था की स्थिति निश्चित रूप से बिगड़ी है। महागठबंधन सरकार बनने के बाद दरभंगा में 75 करोड़ रूपये रंगदारी की मांग को लेकर दो इंजीनियरों की हत्या के बाद अपराध का जो सिलसिला शुरू हुआ था वो रूका नहीं है। हर हफ्ते किसी न किसी व्यवसायी, प्रोफेशनल या राजनीतिक व्यक्ति के साथ अपराध की ख़बर मिल रही है। हत्या, लूट, दुष्कर्म, डकैती, रंगदारी, छेड़खानी जैसे वारदातें रूक नहीं रही हैं।

हालांकि ये भी सही है कि नीतीश कुमार ने इन सभी मामलों में कड़ा रूख अख्तियार किया है। शराब, छेड़खानी, रेप, धमकी, हत्या के मामलों में घिरे राजनेताओं पर सरकार ने कार्रवाई की है। जदयू, कांग्रेस और राजद सभी दलों के आरोपियों पर एक समान कानून सम्मत कार्रवाई हुई है। लेकिन इसके बावजूद सूबे में न तो अपराध रूकने का नाम ले रहा है और न ही बिगड़ैल राजनेता और उनके रिश्तेदार सबक ले पा रहे हैं। इसकी वज़ह से न सिर्फ महागठबंधन सरकार की बदनामी हो रही है बल्कि नीतीश कुमार की साफ़-सुथरी और अमनपसंद छवि पर भी सवाल उठ रहे हैं।

नीतीश कुमार की छवि और उनके मिशन के लिए ये वाकये निश्चित तौर पर ख़तरनाक हैं। जो व्यक्ति एक छोटे से दल का नेता होने के बावजूद देश का पीएम बनने का ख़्वाब पाले बैठा हो, उसके लिए अपने घर को दुरूस्त करना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। नीतीश कुमार ने अपने शराबबंदी के फ़ैसले से न सिर्फ बिहार बल्कि देश में भी अच्छी छाप छोड़ी है। अब वो अपने मिशन पर बिहार से बाहर निकल रहे हैं ठीक उसी समय उनके बिहार में इस तरह की कलंकित करने वाली घटनायें हो रही हैं। इस स्थिति को संभालने के लिए नीतीश कुमार को कई कड़े कदम उठाने पड़ेंगे। अगर समय रहते ऐसा नहीं हुआ तो मंझधार में नीतीश की नैया उनके अपने सिपहसलार ही डुबो देंगे।

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