बहुचर्चित 391 खाते कि जमीन के जांच का आदेश !

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तस्वीर : फाइल

सहरसा (ब्रजेश भारती ) :इस प्रखंड के बख्तियारपुर मौजा यानि नगर पंचायत के आसपास कि जमीन का भाव सोने से महंगा हो गया हैं। साथ ही भू माफियाओं के द्वारा सरकारी जमीन को भी निजी जमीन दिखा कर उसे करोड़ों के भाव बेचा जा रहा हैं। कल तक जिस जमीन पर मैदान हुआ करता था उस जमीन पर आज ईमारते बनना शुरू हो गया हैं।

बख्तियारपुर मौजा की सरकारी जमीन करोड़ों के भाव हो गई है बिक्री
नगर पंचायत के बख्तियारपुर थाना से सटे बहुचर्चित 391 खाता रकवा 1 वीधा 5 कटटा 4 धुर जमीन पर हो रहे निमार्ण कार्य को गंभीरता से लेते हुये सिमरी बख्तियारपुर एसडीओं सुमन प्रसाद साह ने भूमि सुधार उपसमाहर्ता सिमरी बख्तियारपुर को एक पत्र प्रषित कर उक्त जमीन के सारे कागजात को जांच कर सुचित करने को कहा हैं। यहां बताते चले कि कुछ माह पूर्व इस बहुचर्चित जमीन पर जब निमार्ण कार्य शुरू किया गया था तो उस वक्त जमीन पर विवाद उत्पन्न हो जाने के बाद अंचलाधिकारी सिमरी बख्तियारपुर ने अपने ज्ञापांक 28/12/15 के तहत उक्त जमीन को बिहार सरकार कि जमीन बता कर निमार्ण कार्य पर रोक लगाने का आदेश बख्यिारपुर थाना को दिया गया था।रोक लगने के एक माह बाद ही पुन अंचलाधिकारी ने अपने ही आदेश को रद्ध करते हुये उक्त जमीन को रैयती जमीन मानते हुये रोक के आदेश को हटा दिया गया। आमलोगों के बीच दुसरी बार जब निमार्ण कार्य शुरू हुआ तो चर्चा होने लगा कि क्या एक माह में ही सरकारी जमीन कैसे रैयती जमीन बन गया। जानकारों कि माने तो उक्त जमीन 2 करोड़ कि राशि में विभिन्न नामचिन लोगों के हाथों में बिक्री कि गई थी। सुत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अंचलाधिकारी सिमरी बख्तियारपुर के पास कागजात का रिकार्ड नही होने कि वजह से रोक के आदेश को वापस लेना पड़ा था।

एसडीओ ने डीसीएलआर को दिया जांच का आदेश
यहां भू माफिया का चलता हैं– इस प्रखंड में सर्वे का नोटफाईनल होने भू माफियाओं अहम हथियार बन गया है सन 1902 ई के सर्वे के आधार पर आज भी इस प्रखंड में जमीन कि बिक्री एवं खरीद होती हैं। नया सर्वे साठ के दशम में हुआ था लेकिन वह सर्वे नोटफाईनल है इस बात का फायदा यहां के भू माफिया उठा रहें हैं सरकार के पास सरकारी एवं निजी जमीन कि पुरानी कोई कागजात उपल्बघ नही है। ये बात यहां सभी जानते हैं। नया सर्वे लागू ही नही है कोई भी भू माफिया जाली या फिर रैयतो के जिम्मे रह गये पुराने कागजात लेकर उक्त जमीन को अपनी जमीन बता कर उसे करोड़ों के भाब बेच रातों रात मालामाल हो रहें है चुकि सरकारी पदाधिकारी के पास सत्यापन के लिये कोई पुराना कागजात रिकार्ड नही है।