पेयजल के लिए हाहाकार की आशंका  !

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कलासन स्थित पोखर जहाँ सालो भर पानी रहता था,आज सूखे पड़े हैं।

मधेपुरा/चौसा (संजय कुमार सुमन ) :  भू-गर्भ जल स्तर के घट जाने से चापाकलों के पानी न देने की शिकायत आम होती जा रही है. जिस गति से चापाकल पानी देना बंद कर रहे हैं, बहुत जल्द चौसा में पेयजल के लिए हाहाकार मचने की आशंका है. बेजुवान गरमी व पानी के भीषण अकाल सभी जीवों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है.सालो भर पानी रहने वाले तलाब भी सूखे चुके हैं। पानी के भीषण किल्लत से ग्रामीणों की परेशानी काफी बढ़ गयी है.

आम हो रही चापाकलों से पानी नहीं निकलने की शिकायत |

भीषण गरमी के कारण एवं पानी के जल स्तर अधिक नीचे चले जाने के कारण गांव में लगभग पानी का स्रोत कम होता जा रहा है. पहले तो पोखर से ही पानी गायब हो गया. उसके बाद अब चापाकलों ने भी धीरे-धीरे छोड़ते-छोड़ते पूर्णत: छोड़ दिया. इससे लोग काफी परेशान हैं. वहीं, जहां अभी थोड़ा-थोड़ा चापाकल से पानी दे भी रहा है, वहां आस-पड़ोस में अगर कोई किसान खेत में पानी पटाने के लिए बोरिंग चला दे, तो उस क्षेत्र के अधिकतर चापाकल पानी छोड़ देते हैं. इसको लेकर अगर कोई किसान अपनी खेत में पानी पटाने के कोशिश करता है, तो उस क्षेत्र में हाहाकार मचने लगता है. सभी पड़ोसी लोग बोरिंग नहीं चलाने की सलाह देने पहुंचा जाते हैं. इस कारण किसानों की परेशानी भी बढ़ी हुई है.
उधर अधिक गरमी की वजह से छोटे-छोटे पेड़-पौधे झुलस रहे हैं |
अधिक तापमान रहने व पानी की कमी से जमीन में नमी के अभाव में सूख रहे पेड़-पौधे को बचाने के लिए किसान उपाय ढूंढ़ रहे हैं. किसान आम, बेल, लीची के पेड़ों को बचाने के लिए डीजल पंप चला कर सिंचाई कर रहे हैं. वहीं गमहार, सागवान, महोगनी के छोटे-छोटे पेड़ों को सूखने से बचाने के लिए पंप सेट का सहारा लिया जा रहा है.

भीषण गरमी की वजह से आदमी पर तो असर पड़ ही रहा है, साथ ही फलदार वृक्षों के फल पर भी पड़ना शुरू हो गया है. तीखी धूप का असर सबसे ज्यादा आम के टिकोले पर पड़ना शुरू हो गया है. अधिक तापमान में गरमी की वजह से आम के टिकोले पेड़ से झड़ने लगे है. हलक सुखानेवाली गरमी की वजह से आदमी तो परेशान हैं |