महाराणा प्रताप की जयंती पर विशेष ( महाराणा ) : पूर्व सांसद आनंद मोहन की रचना !

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महाराणा प्रताप की प्रतिमा हल्दीघाटी,उदयपुर

   महाराणा 

जान लो इस देश में राणा न होता,

जुल्म के आगे वो सर ताना न होता,

स्वाधीनता शायद कोई माने न पाता,

स्वाभिमान का मतलब कभी जाना न होता |

फिरता न रहता वह गुफाओं-कन्दरों  में,

दर-दर भटकता गर नहीं वह जंगलों में,

चट्टान पे तिनके बिछा सोना न होता,

आजदी का अभिप्राय ही जाना न होता |

स्वाभिमान क्या चीज है,उसने बताया,

मुक्ति का मकसद हमें उसने सिखाया,

गर घास की रोटी कभी खाना न होता,

यह राष्ट्र भी राणा को यूँ माना न होता |

चित्तोर,चेतक,प्रताप तो प्रतीक अपना,

स्वाधीनता है आज जिन आँखों का सपना,

मेवाड़ गर मरने का व्रत ठाना न होता,

देश जीने का अर्थ ही जाना न होता |

ANAND MOHAN

(पूर्व सांसद आनंद मोहन जी की रचना )