माँ : पूर्व सांसद आनंद मोहन रचित रचना !

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                माँ

सृष्टि का आधार है- माँ

जीवन का मूलाधार है-माँ

ममता की मूरत है-माँ

सृजन की साकार सूरत है-माँ

उसकी छाती में अमृत ,

आंचल में ममता

और कदमों में जन्नत होती है |

माँ सदैव बंदिनी होती है ,

माँ पवित्र मन्दाकिनी होती है,

माँ निर्मल निश्छल होती है,

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माँ चंदन सी शीतल होती है,

माँ गंगा सी पावन होती है,

तपती जेठ की दोपहरी में

माँ रिमझिम सावन होती है |

है माँ से बढ़कर कोई नहीं जगती में,

बस,माँ जैसी तो माँ होती है |

माँ तो महान है,

माँ है – तो जहान है |

(सहरसा जेल में बंद पूर्व सांसद आनंद मोहन की रचना मदर्स डे पर)