मुलभूत सुविधाओं से बंचित सहुरिया पंचायत आज भी अपरधियों कि सुरक्षित शरणस्थली !

1995

सिमरी बख्तियारपुर(Brajesh Bharti)अनुमंडल क्षेत्र का बनमा-ईटहरी प्रखंड का एक पंचायत है सहुरिया, यह पंचायत अपने स्थापना काल सन 1995 के बाद किसी ना किसी रूप में सुर्खिया में रहा हैं। पहली बार सहरसा मुख्यालय के तत्कालिन डीएसपी सतपाल सिह कि हत्या इसी पंचायत के नौनहा गांव में आपरधियों के साथ मुथभेड़ में हो जाने के बाद तो दुसरी बार मधेपुरा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पु यादव के द्वारा इस गांव को आर्दश ग्राम योजना के तहत चयन के बाद देश में चर्चा का विषय बना। लेकिन आज अपने स्थापना के 21 वर्षो बाद भी मुलभुत सुविधओं सं बंचित रह गया हैं। दुर्गम भौगोलिक संरचना एवं यातायात विहीन होने कि वजह से आज भी यह पंचायत अपराधियों कि सुरक्षित शरणस्थली बनी हुई हैं।

पंचायत का इतिहास– कुल सात किलोमीटर लंबा एवं तीन किलोमीटर चैडा क्षेत्रफल में फैला इस पंचायत कि कुल जनसंख्या करीब 15 हजार के करीब हैं, 17 वार्ड वाला इस पंचायत में कुल 7 मध्य विधालय,3 प्राथमिक विधालय एवं 4 नवसृजित विधालय संचालित हैं। आंगनबाड़ी केन्द्र के रूप में 20 केन्द्र हैं। लेकिन संचालन के नाम पर सिर्फ कागजी खानापुर्ती होती हैं। वर्ष 2011 में दो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का कार्य शुरू किया गया लेकिन आज तक कार्य पूर्ण नही हो सका हैं।

पहली बार डीएसपी हत्याकांड तो दुसरी बार सांसद पप्पु यादव के गोद लने के बाद सुर्खियों में आया था :

फाइल फोटो
फाइल फोटो

13 मुख्य गांव है पंचायत में- इस पंचायत में मुख्य गांवों में प्रमुख रूप से सहुरिया,तरहा,अम्माडीह,परसाहा,हराहरी,रामपोखर,बहुरबा दो गांव,सुगमा आदि आते है वही छोटे छोटे कई टोले भी इस पंचायत के अधीन आते हैं। बाढ़ कि विभिषिका के ग्रस्त यहां के किसान एक मात्र फसल मकई पर ही आत्मनिर्भर रहते हैं। यहां के लोगों का नगदीक बाजार सौनवर्षाराज पड़ता हैं। आज भी यहां किसान बदहाल जिंदगी गुजर करते हैैं।

स्वास्थ,शिक्षा बेकार– स्वास्थ कि बात कि जाय तो अगर किसी को रात में सर्पदंश कर ले तो उसकी मौत निश्चित हो जायेगी क्योकि अस्पताल आने के लिये करीब 15 किलोमीटर खाट पर लाद कर पैदल ले जाना पड़ेगा। शिक्षा के नाम पर जितने भी विधालय है उसमें कभी भी कोई शिक्षक समय पर नही आते है एमडीएम योजना सिर्फ कागजो पर चलती हैं।

अपराधियों कि सुरक्षित शरणस्थली– संसाधन विहीन होने के कारण एवं भौगोलिक संरचना कि बजह से यहां अपराधी अपने आप को सुरक्षित समझते है इसलिये इस क्षेत्र का अपना पनाहगार बनाये हुये हैं। कालांतर में सन 71 में यहां के एक जमींदार सहदान अली को अपरधियों ने गोलीमार हत्या कर दिया उसके बाद तो माने हत्याओं की लाईन लग गई,डीएसपी कि हत्या उसके बाद धोबी टोला में दो लोगों कि हत्या,सत्तों साह कि हत्या, चर्चित दुध व्यवसाई हत्याकांड आदि आदि कई हत्याओं का गवाह बना है यह पंचायत। वर्तमान में चर्चा का कारण-एसटीएफ के हाथों रविवार को डीएसपी सतपाल सिह हत्याकांड का नामजद आरोपी मो ईमो मिंया का गिरफतारी के बाद एक वार फिर डीएसपी हत्याकांड चर्चा में आ गया है।

डीएसपी हत्याकांड कि चर्चा हो तो सहुरियां पंचायत का उस दुर्गम नौनहा गावं कि चर्चा नही हो एैसा हो नही सकता अगर सहरसा मुख्यालय से नौनहा गांव का सीधा सम्र्पक होता तो सहरसा से पुलिवबल को जाने में रात भर नही लगता ना ही डीएसपी शहीद होते |