कार्यकर्ताओं के लिए उदाहरण बने है अशोक नायक !

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भाजपा नेता अशोक नायक

दरभंगा-(धर्मेन्द्र सिंह ) जिला भाजपा में आज अशोक नायक एक ऐसा नाम है जिसके बारे में इस बात से कोई इनकार नही कर सकता कि मौके रहने और पार्टी में तकलीफ झेलने के वाबजूद पार्टी नही छोड़ी। 1974 के जेपी आंदोलन राजनीती शुरू करने वाले अशोक नायक बाल स्वयंसेवक रहे हैं। नियमित रूप से बलरामपुर शाखा में जा कर प्रशिक्षण लिया करते थे। 1985 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद इन्हें इनके बचपन के मित्र डा0 संजय पासवान ने 1998 में भाजपा की सक्रिय राजनीति में शामिल किया और श्री नायक भाजपा प्रदेश व्यवसायी मंच कार्यसमिति के सदस्य बनाये गए।2003 में नगर महामंत्री और 2006 में भाजपा प्रदेश व्यवसायी मंच के प्रभारी बने। 2006 में ही डा0 संजय पासवान ने भाजपा छोड़ राजद ज्वाइन किया पर श्री नायक की दल के प्रति निष्ठा कायम रही।2007 में वैश्य नही होते हुए भी खुद को वैश्य कहने वाले शहर एक जनप्रतिनिधि जो हमेशा पार्टी को पॉकेट में रखने की मंशा रखते थे,उन्होंने वैश्यों के इस उभरते नेतृत्व से खुद केलिए खतरा महसूस किया और अपने रसूख का इस्तेमाल करके पार्टी विरोधी का आरोप लगा कर पार्टी से निलंबित करवा दिया। परंतु उस छद्म कृत के विरोध में तत्कालीन जिलाध्यक्ष गोपालजी ठाकुर, कई पूर्व जिलाध्यक्ष सहित कई बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं ने इनके निलंबन पर पुनर्विचार हेतु प्रदेश नेतृत्व को लिखा। अगस्त 2008 में भाजपा अनुशासन समिति के राष्ट्रीय अध्य्क्ष राम नाईक जो वर्तमान में यूपी के राज्यपाल हैं ,ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह को फैक्स करके 24 घण्टे के अंदर निलंबन वापस लेने का निर्देश दिया क्यूंकि इनके ऊपर लगाया एक भी आरोप सही साबित नही हुआ। इनका निलम्बन तत्काल वापस हुआ। वर्ष 2009 में अमरनाथ गामी जिलाध्यक्ष बने और श्री नायक जिलामंत्री बने। श्री गामी के कार्यकाल में पूरे संगठन का देखरेख श्री नायक ही कर रहे थे। फिर जगदीश साह और वर्तमान जिलाध्यक्ष हरि सहनी के कार्यकाल में भी ये सुचारू रूप से संगठन का कार्य देखते रहे। वर्तमान जिलाध्यक्ष के कार्यकाल में प्रदेश नेतृत्व के द्वारा अनुशंसित जिलामंत्री होने का गौरव भी इन्हें प्राप्त है। अभी हाल के विधानसभा चुनाव में भी इनकी अहम् भूमिका रही है खासकर एक प्रतिनिधि के कृत्यों के कारण पार्टी में विखंडन की स्थिति को रोकने में। चुनाव के ठीक पहले अमरनाथ गामी और जगदीश साह के पार्टी छोड़ने से पार्टी के बहुसंख्यक वैश्य सूरी और तेली जाति के टूटने का खतरा उत्पन्न हो गया जिसे श्री नायक ने अपने दम पर रोका और पार्टी को एक सूत्र में बांधे रहा। इतना ही नही, वैश्य बहुसंख्यक जाले विधानसभा की सीट नए भूमिहार उम्मीदवार जिनके वोट मात्र 18 हज़ार ही हैं एवं महागठबंधन की लहर होने के वाबजूद भाजपा का जीत जाना श्री नायक की छवि एवं इनके बूथ स्तर पर किये गए परिश्रम का ही फल था क्योंकि श्री नायक ही गत तीन वर्षों से जाले विधानसभा के प्रभारी थे। अपने निजी हितो को पार्टी हित में कुर्बान कर देने वाले जिला भाजपा के असली नायक अशोक नायक हाल में होने जा रहे जिलाध्यक्ष चुनाव के प्रबल दावेदारों में से हैं। परंतु एक जनप्रतिनिधि जिसने आजतक किसी वैश्य प्रतिद्वंदी को दरभंगा में उभरने नही दिया,कोई शक नही कि फिर एक बार इनके चयन को रोकने में अपना सर्वस्व लगा दे। परंतु पार्टी के प्रति निष्ठा एवं कार्य ने आज इनके कद को उस प्रतिनिधि से ऊपर ही पहुंचा दिया है।इन सबके के वाबजूद श्री नायाक का स्पष्ट कहना कि स्थितियां जो भी हो,अपने जीवन में भाजपा नही छोड़ेंगे, इन्हें सभी दलो के समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए उदाहरण भी बनाता है।